पति की आंखें बन मीनू ने दिखाई नई राह

मीनू पिछले एक दशक से यार्न व्यवसायी आनंद की नई आंखें बनकर ना केवल सामाजिक बल्कि व्यापारिक स्तर पर भी कदम-दर-कदम आगे बढ़ा रही है

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 07 Mar 2020, 07:02 PM IST

सूरत. आधी दुनिया, पूरी ताकत..., नारी तू नारायणी...जैसे कई सशक्त, समृद्ध व सम्मानजनक वाक्यों से अलंकृत नारी शक्ति यूं तो वर्षपर्यन्त पूजनीय व अनुकरणीय है, लेकिन विश्व महिला दिवस सरकारी-गैरसरकारी स्तर पर विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है। रविवार को भी देशभर में सामाजिक, आर्थिक, व्यापारिक, शैक्षणिक समेत अन्य सभी क्षेत्रों में सक्रिय महिला वर्ग की प्रतिनिधियों को मंच पर स्थान मिलेगा। गुजरात की औद्योगिक राजधानी सूरत नगरी में भी ऐसी कई महिलाएं है जिन्होंने घर-गृहस्थी के अलावा अपने व्यापारिक कौशल से व्यावसायिक क्षेत्र में जगह सुनिश्चित की है।

व्यवसायी के साथ-साथ डॉक्टर का तजुर्बा

जिंदगी की गाड़ी को निर्विघ्न गतिशील बनाए रखने के लिए पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक होते है और सुख-दुख में एक लय में कदम बढ़ाते हुए चलते है। इसकी मिसाल मूल राजस्थान के झुंझुनूं जिले की मीनू पोद्दार ने जिले में ही मूल सींथल निवासी अपने पति आनंद पोद्दार के साथ बेहतर तरीके से रखी है। मीनू पिछले एक दशक से यार्न व्यवसायी आनंद की नई आंखें बनकर ना केवल सामाजिक बल्कि व्यापारिक स्तर पर भी कदम-दर-कदम आगे बढ़ा रही है। एक समय में मीनू उड़ीसा के संबलपुर में एमएससी की पढ़ाई कर एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट बनी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन वो नहीं हो सका फिर भी आज वो व्यवसायी के साथ-साथ डॉक्टर का तजुर्बा भी रखती है और प्राणिक हिलिंग थेरॉपी के माध्यम से वो जरुरतमंद का उपचार भी करती है। मीनू बताती है कि वे शादी के बाद वर्ष 2000 में सूरत आ गई थी और कुछ करने की चाह में डायमंड ग्रेडिंग का कोर्स कर बिजनेस शुरू किया था। समय बीतने पर पति आनंद की आंख में दिक्कत हुई उन्हें उनकी नई आंखें बनने का सुअवसर मिला और पति के यार्न व्यवसाय में सहयोगी बनी। अब वो जहां भी जाती है वहां, आनंद का साया बनकर हाथ पकड़े साथ होती है। व्यावसायिक काम-काज में श्वसुर पुरुषोत्तम पोद्दार व घरेलू कार्य में सास ललिता पोद्दार के विशेष सहयोग से आज वो मंजी हुई व्यवसायी और कुशल गृहणी बनकर जिम्मेदारी निभा रही है। इसके अलावा सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में प्राणिक हिलिंग थेरॉपी का विशेष अध्ययन कर ध्यान प्रक्रिया के माध्यम से जरुरतमंद की शारीरिक-मानसिक तकलीफ भी दूर करती है।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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