करोड़ों के ऑर्डर रद्द

दिवाली वेकेशन के बाद अच्छी शुरुआत की उम्मीद लगाए बैठे कपड़ा उद्योग को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ कई क्षेत्रों में वेतन बढ़ाने की

By: कमल राजपूत

Published: 04 Dec 2015, 11:41 PM IST

सूरत। दिवाली वेकेशन के बाद अच्छी शुरुआत की उम्मीद लगाए बैठे कपड़ा उद्योग को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ कई क्षेत्रों में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिकों की हड़ताल के कारण उत्पादन ठप है तो दूसरी तरफ चेन्नई में बाढ़ के हालात के कारण करोड़ों रुपए के ऑर्डर रद्द हो गए हैं। कपड़ा बाजार के सूत्रों के अनुसार दिवाली वेकेशन के बाद बाजार खुलने के एक-दो सप्ताह बाद दक्षिण के व्यापारी पोंगल की खरीद के लिए सूरत आते हैं।

पोंगल वहां धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर कम और मध्यम कीमत की साड़ी तथा ड्रेस मटीरियल की अच्छी डिमांड रहती है। व्यापारी दिसम्बर के आरंभ में ऑर्डर दे देतें हैं,  लेकिन इस साल चेन्नई में भारी बारिश के कारण कई व्यापारियों को सूरत दौरा रद्द करना पड़ा है तो कई व्यापारी हालात को देखकर ऑर्डर रद्द कर रहे हैं।

चेन्नई के दो ट्रांसपोर्ट गोडाउन में पानी भर जाने से वहां रखे करीब छह सौ पार्सल अटक गए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से तीन सौ से अधिक पार्सल सूरत के कपड़ा व्यापारियों के हैं। फोस्टा के प्रमुख मनोज अग्रवाल ने बताया कि चेन्नई में बाढ़ के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों को परिस्थिति देखकर ऑर्डर भेजना चाहिए। सूरत टैक्सटाइल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रमुख युवराज देसले ने बताया कि वहां गए ट्रकों ने सुरक्षित स्थानों पर माल उतार दिया है और यहां के व्यापारी अब वहां पार्सल नहीं भेज रहे हैं।

पैमेन्ट में होगा विलंब
कपड़ा व्यापारी ब्रिज मोहन अग्रवाल ने बताया कि चेन्नई की बाढ़ ने पूरे कपड़ा बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। व्यापारियों के करोड़ों रुपए के ऑर्डर रद्द हो गए हैं। दक्षिण के जिन व्यापारियों ने दिवाली पर माल लिया था, उनका पैमेन्ट जनवरी- फरवरी में आना था। बाढ़ के कारण इस पैमेन्ट पर भी अनिश्चितता छा गई है।

लूम्स कारखाने आज खुलने की संभावना
छह दिन से लूम्स कारखानों में चल रही हड़ताल शुक्रवार को समाप्त होने के आसार हंै। वीवर्स शनिवार सुबह श्रमिकों के काम पर आने की उम्मीद व्यक्त कर रहे हैं। कपड़ा उद्योग के सूत्रों के अनुसार वराछा, कापोद्रा, लसकाणा तथा सायण क्षेत्र में पांच हजार लूम्स यूनिट छह दिन से बंद हैं। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिक काम पर नहीं आ रहे थे। बुधवार को लसकाणा के एक कारखाने पर पथराव भी हुआ। इस घटना के बाद गुरुवार को सभी वीवर्स की मीटिंग में पुलिस से सुरक्षा मांगने का फैसला किया गया था।

शुक्रवार को कई श्रमिक बिना शर्त अपने-अपने कारखाने पहुंचे और काम शुरू करने पर सहमति जताई। वराछा क्षेत्र के वीवर हरिभाई कथीरिया ने बताया कि पुलिस सुरक्षा की मांग के फैसले के बाद धमाल करने वाले श्रमिक नरम पड़ गए। जो श्रमिक काम करना चाहते हैं, उनके शनिवार को कारखाने पहुंचने की उम्मीद है।
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