scriptMission Admission: It became difficult to fill the seats of MBA - MCA | मिशन एडमिशन : एमबीए और एमसीए की सीट भरना हो गया मुश्किल | Patrika News

मिशन एडमिशन : एमबीए और एमसीए की सीट भरना हो गया मुश्किल

- एसीपीसी ने रिक्त सीट भरने का जिम्मा कॉलेजों को सौंपा
- सीट भरने के लिए प्रवेश परीक्षा नही देने वाले विद्यार्थियों को भी सीट दे दिया जाएगा प्रवेश

सूरत

Published: October 26, 2021 11:04:49 pm

सूरत.
राज्य के एमबीए एमसीए कॉलेजों में रिक्त सीटों का सिलसिला इस साल भी जारी रहा है। प्रवेश के दो राउंड आयोजित होने के बाद भी एमबीए एमसीए की सीट नहीं भर पाई है। इसलिए प्रवेश समिति ने कॉलेजों को ही रिक्त सीट भरने का जिम्मा सौंप दिया है। संचालकों को रिक्त सीट भरने में काफी परेशानी होने वाली है।
एक समय था जब एमबीए और एमसीए में प्रवेश लेनेंके लिए भीड़ उमड़ पड़ती थी। लेकेन आज एमबीए और एमसीए की सीट भर पाना मुश्किल हो गया है। राज्य में एमबीए और एमसीए को मिलाकर 16 हजार के आसपास सीट है। राज्य में लाखो डिग्री होल्डर विद्यार्थी होने के बावजूद एमबीए और एमसीए के लिए 16 हजार विद्यार्थी मिलना मुश्किल हो गया है। एडमिशन कमिटी फॉर प्रोफेशनल कोर्स ने दो बार प्रवेश राउंड आयोजित किए। फिर भी पूरी सीटें नही भर पाई। स्वनिर्भर कॉलेज तो ठीक अनुदानित कॉलेजों को भी सीट खाली पड़ी है। दोनो को मिलाकर हजारों सीट खाली पड़ी है। अनुदानित कॉलेज की सीट भरने के लिए एसीपीसी एक बार फिर प्रवेश राउंड आयोजित करेगा। लेकिन स्वनिर्भर की सीट भरने का जिम्मा कॉलेजों को ही सौंप दिया है। कॉलेजों को मेरिट के आधार पर प्रवेश देने के लिए सूचित किया है। संचालकों का कहना है कि रिक्त सीटों को भर पाना मुश्किल हो गया है। मुश्किल से एक दुक्का विद्यार्थी मिलते है। जिसके सामने कई सीट रिक्त पड़ी रहती है।
मिशन एडमिशन : एमबीए और एमसीए की सीट भरना हो गया मुश्किल
मिशन एडमिशन : एमबीए और एमसीए की सीट भरना हो गया मुश्किल
प्रवेश में नियमों की उड़ेगी धज्जियां:
प्रवेश परीक्षा के आधार पर एमबीए एमसीए में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। एसीपीसी इसी के आधार पर मेरिट तैयार करता है। अब कॉलेजों को प्रवेश का जिम्मा सौंप देने के बाद प्रवेश परीक्षा के नियम पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। जिसने प्रवेश परीक्षा नही दी होगी वैसे विद्यार्थी को भी प्रवेश दिया जाएगा। सीट भरने के लिए नियमों को अनदेखा कर दिया जाएगा। हर साल स्वनिर्भर कॉलेजों में सीट भरने के लिए ऐसा ही किया जाता है। कई विद्यार्थी भी ऐसे होते है जो प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने की ही राह देखते है। बाद में रिक्त सीट पर जा कर आसानी से प्रवेश लेते है। पर ऐसे विद्यार्थियों की संख्या कम होती है। जिसके सामने रिक्त सीटों की संख्या अधिक होती है।

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