आरटीई अंतर्गत सूरत कॉर्पोरेशन में आठ हजार से अधिक आवेदन

राइट टु एज्युकेशन (आरटीई) अंतर्गत सूरत कॉर्पोरेशन में आठ हजार से अधिक आवेदन भरे जा चुके हैं। वहीं, राज्यभर में 1 लाख, 76 हजार...

By: मुकेश शर्मा

Published: 24 May 2018, 10:26 PM IST

सूरत।राइट टु एज्युकेशन (आरटीई) अंतर्गत सूरत कॉर्पोरेशन में आठ हजार से अधिक आवेदन भरे जा चुके हैं। वहीं, राज्यभर में 1 लाख, 76 हजार, 671 विद्यार्थियों के फॉर्म भरे गए हैं। सूरत कॉर्पोरेशन में भरे गए फॉर्म में से 3 हजार 900 से अधिक प्रवेशफॉर्म का सत्यापन किया जा चुका है। प्रशासन ने फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है। इनमें से 147 आवेदनों को रद्द कर दिया गया है। इस बार फर्जी प्रमाणपत्र जमा करने वालों और उसे बनाने वालों दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

इस बार मात्र सूरत कॉर्पोरेशन से ८ हजार ६६ से अधिक अभिभावकों ने अपने बच्चे के लिए आवेदन किया है। इनमें से अब तक 3 हजार 915 आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। अन्य आवेदनों का सत्यापन जारी है। इस बार प्रशासन आवेदन करने वालों की बारीकी से जांच कर रहा है। जितने भी प्रमाणपत्र जमा किए गए हैं सभी का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही प्रमाणपत्र फर्जी है या नहीं, इसकी भी जांच हो रही है। इसमें खास कर जाति और आय के प्रमाणपत्र की जांच पर जोर दिया गया है।

इनमें से कई अभिभावकों की ओर से जमा किए गए प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। करीब 147 आवेदनों को रद्द कर दिया गया है। फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर प्रवेश लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग होने लगी है। पिछले साल प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पता चला था कि कई अभिभावकों ने फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर प्रवेश लिया है।

आरटीई का गलत उपयोग किया गया है। स्कूलों की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच की थी। जांच के बाद फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर प्रवेशों को रद्द किया गया था। साथ ही अभिभावकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की गई है। इस बार गुजरात से 1 लाख, 76 हजार से अधिक आवेदन भरे गए हैं। अभिभावकों की मांग पर फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 5 मई से बढ़ाकर 8 मई कर दी गई है। साथ ही 9 मई तक प्रमाणपत्र स्वीकार किए जाएंगे।


अधिकारी व टाउट के खिलाफ कार्रवाई की मांग


जिनाज्ञा सेवा ट्रस्ट की ओर से शुक्रवार को कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है। ट्रस्ट ने मांग की है कि आरटीई में प्रवेश के लिए अभिभावकों की ओर से फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए हो तो यह फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नागरिक सुविधा केन्द्र के बाहर टाउट घूमते रहते हैं। जो अभिभावकों से पैसे लेकर अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी प्रमाणपत्र बना देते हैं। यह फर्जी प्रमाणपत्र अभिभावक प्रवेश के लिए उपयोग में लेते हैं।

मुकेश शर्मा Reporting
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