scriptMother forced to sell mangalsutra for daughter's education | बेटी की शिक्षा के लिए मंगलसूत्र बेचने को मजबूर हुई मां, दो युवकों ने मदद के लिए बढ़ाए हाथ | Patrika News

बेटी की शिक्षा के लिए मंगलसूत्र बेचने को मजबूर हुई मां, दो युवकों ने मदद के लिए बढ़ाए हाथ

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वादे के बाद भी जब मुंह मोड़ लिया तो नवागाम के समधान पाटिल और निलगीरी के महेन्द्र गोस्वामी ने छात्रा का स्कूल में दाखिला भी करवाया और मां का मंगलसूत्र भी लौटाया

सूरत

Published: June 23, 2022 03:45:22 pm

सूरत. राज्य सरकार पर शिक्षा के व्यापारीकरण के आरोप लगते रहे हैं। सरकारी स्कूलें जहां बंद हो रही हैं, वहीं निजी संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन सब के बीच जो मां-बाप आर्थिक रूप से सक्षम नहीं उनके लिए सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को दाखिला दिलवाना भी कठीन डगर साबित हो रहा है। सूरत के गोड़दारा क्षेत्र की एक मां ने 9वीं कक्षा में अपनी बेटी को दाखिला दिलाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया। हालांकि यह बात जब दो युवकों को पता चली तो वे इस महिला की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने छात्रा का दाखिला एक सरकारी स्कूल में करवाया और बेचा हुआ मंगलसूत्र महिला को वापस दिलाया।
बेटी की शिक्षा के लिए मंगलसूत्र बेचने को मजबूर हुई मां, दो युवकों ने मदद के लिए बढ़ाए हाथ
File Image

गोड़दारा क्षेत्र निवासी महिला की पुत्री अब तक नगर प्राथमिक शिक्षण समिति की स्कूल में ही पढ़ रही थी। आठवीं कक्षा पास करने के बाद अब वह नौवीं कक्षा में आई, लेकिन सरकारी स्कूल में उसे दाखिला नहीं मिल रहा था। बेटी के एडमिशन के लिए मां यहां से वहां धक्के खा रही थी। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने दाखिला करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन यह आश्वासन कोरा साबित हुआ। स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई तब भी छात्रा को सरकारी स्कूल में एडमिशन नहीं मिला तो आखिर मजबूर मां ने बेटी का एडमिशन निजी स्कूल में करवाने का निर्णय किया। हाथ में रुपए नहीं थे, तो मजबूर मां ने अपना मंगलसूूत्र बेच दिया। यह बात जब क्षेत्र में ही रहने समधान पाटिल और महेन्द्र गोस्वामी को पता चला तो उन्होंने इस महिला और उसकी बेटी की मदद करने का निर्णय किया। दोनों ने अपने संपर्को के जरिए ना सिर्फ छात्रा का सरकारी स्कूल में एडमिशन करवाया, बल्कि बेचा हुआ मंगलसूत्र भी महिला को वापस दिलाया।

सैंकड़ों विद्यार्थियों को नहीं मिल पाया है दाखिला


नगर प्राथमिक शिक्षण समिति की स्कूल से 8वीं कक्षा पास करने वाले सैंकड़ों विद्यार्थी मनपा संचालित सुमन स्कूल में प्रवेश से वंचित है। मनपा की ओर से कक्षा से 9 से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए सुमन स्कूल शुरू किए गए हैं, लेकिन पास आउट होने वाले विद्यार्थियों के मुकाबले वर्गो की संख्या कम होने के कारण 75 फीसदी से कम अंक वाले विद्यार्थियों को सुमन स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाया है। अब तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अभिभावकोंं के लिए अब अपने बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए जेब से रुपए खर्च निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

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