बहुमंजिला पार्किंग व्यवस्था अटकी कागजों में

बहुमंजिला पार्किंग व्यवस्था के कागजों में अटक जाने के बाद लम्बे-चौड़े भूभाग में फैले हिंदी बाहुल्य साहुकारपेट इलाके में केवल एक ही पार्किंग स्थल हैं। ऐसे में वाहन चालकों को वाहन सडक़ किनारे खड़े करने पड़ रहे हैं। हालांकि कई सडक़ों के पास वाहनों को खड़ा करने की अनुमति दे रखी हैं बावजूद पार्किंग की कमी अखरती है।

By: मुकेश शर्मा

Published: 25 Nov 2018, 11:25 PM IST

चेन्नई।बहुमंजिला पार्किंग व्यवस्था के कागजों में अटक जाने के बाद लम्बे-चौड़े भूभाग में फैले हिंदी बाहुल्य साहुकारपेट इलाके में केवल एक ही पार्किंग स्थल हैं। ऐसे में वाहन चालकों को वाहन सडक़ किनारे खड़े करने पड़ रहे हैं। हालांकि कई सडक़ों के पास वाहनों को खड़ा करने की अनुमति दे रखी हैं बावजूद पार्किंग की कमी अखरती है।
हालांकि क्षेत्र में कई निजी पार्किंग स्थल भी विकसित हो चुके हैं लेकिन बावजूद इसके वाहनों की अधिकता के चलते पार्किंग एक बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आई है। साहुकारपेट में थोक का व्यापार है।

ऐसे में समूचे महानगर के साथ ही आसपास के इलाकों से भी व्यापारी एवं ग्राहक आते हैं। दिन के समय तो हालात यह हो जाते हैं कि सडक़ पर भी वाहनों की पार्किंग के लिए जगह नहीं मिल पाती। एनएससी बोस रोड पर बना पार्किंग स्थल तो सुबह ही फूल हो जाता है। जो देर रात तक भरा रहता है।

ऐसे में वाहन चालकों के लिए वाहन को खड़ा करने में परेशानी उठानी पड़ती है। एनएससी बोस रोड, रतन बाजार एवं अन्य कुछेक बाजारों में सडक़ के एक मार्ग के पास वाहनों की पार्किंग के लिए जगह बना ली गई है। बावजूद व्यापारियों के वाहनों के साथ ही ग्राहकों के वाहन भी खड़े रहने से पार्क के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। ब्राडवे बस स्टेशन के पास बहुमंजिला पार्किंग शुरू करने के लिए कई बार योजनाएं बनीं लेकिन योजना बनने से पहले ही दम तोड़ देती है।

बहुमंजिला पार्किंग बन जाती है तो व्यापारियों एवं ग्राहकों को काफी सुविधा मिल सकती है। दो साल से नगर निगम में भी जनप्रतिनिधियों के अभाव के चलते भी कई विकास कार्य अटके हुए हैं। व्यापारियों ने बहुमंजिला पार्किंग के लिए कई बार मांग की है लेकिन इस दिशा में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है। वाहनों के इधर-उधर खड़ा करने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार तो वाहन दुकानों के रास्ते के आगे खड़े कर दिए जाते हैं जिस कारण दुकानों में प्रवेश का रास्ता तक बन्द हो जाता है। वाहनों को सटाकर खड़े कर दिए जाने से भी लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रास्ता पार करने में मुश्किल होती है।

हालांकि कई जगह निजी पार्किंग स्थल भी विकसित किए गए हैं लेकिन उनमें भी अधिकांश पार्किंग स्थलों में कारों की पार्किंग ही हो रही है। दुपहिया वाहन चालकों के लिए पार्किंग की कमी ही है। कई बार यातायात पुलिस नो-पार्किंग में पार्क किए वाहनों को भी उठा ले जाती है। जब ग्राहक खरीदारी कर वापस आते हैं तो पाते हैं कि उनका वाहन वहां नहीं हैं जहां उन्होंने पार्क किया था। कई बार तो ग्राहक यह समझ लेते हैं कि उनका वाहन चोरी हो गया है। बाद में पता चलता है कि पुलिस का गश्ती वाहन उनके वाहन को ले गया है। बाद में जुर्माना अदा कर वाहन को छुड़ाना पड़ता है।


क्या कहते हैं व्यापारी व प्रवासी:

समूचे साहुकापेट में कहीं पार्किंग स्थल नजर ही नहीं आता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में वाहन सडक़ किनारे ही खड़े करने पड़ते हैं। यातायात जाम का एक कारण यह भी है। प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। यदि पार्किंग स्थल बना दिए जाते हैं तो जाम पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।

डी.सी. जैन, व्यापारी

इलाके में वाहन पार्किंग स्थल ही नहीं हैं तो फिर वाहन चालक अपने वाहन कहां खड़े करें। कुछ चयनित एवं प्रमुख स्थलों के पास पार्किंग स्थल विकसित किए जाने चाहिए ताकि ग्राहकों एवं व्यापारियों को अधिक परेशानी न हो। बहुमंजिला पार्किंग स्थल भी इसका विकल्प हो सकता है।
नाथूसिंह जोधा, प्रवासी राजस्थानी

मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned