NATIONAL NEWS: सजा हो गई पूरी पर छूटने की आस अधूरी

पाकिस्तान में सवा चार सौ करीब भारतीय मछुआरे कैद और तीन सौ से अधिक की सजा हो गई पूरी, कोरोना महामारी में परिजनों में बना हुआ है भय

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 14 May 2021, 07:57 PM IST

सूरत. कोरोना महामारी जब से प्रारम्भ हुई है तब से भारत-पाकिस्तान के बीच 2008 के समझौते के तहत डिप्लोमेटिक बातचीत व कैदियों की सूची साझा नहीं हो पाई ह और तीन सौ से ज्यादा भारतीय मछुआरे सजा की अवधि पूरी होने के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में नारकीय यातना भुगतने को मजबूर है। उस पर कोरोना महामारी ने कैदी मछुआरों के परिजनों में भय का माहौल बना रखा है।
गुजरात की सीमा से सटी अरब सागर की खाड़ी में मत्स्याटन के दौरान समुद्री सीमा पार का जुर्म सामान्य रूप में भारत व पाकिस्तान के मछुआरों से हो जाता है और पुलिस व कोर्ट के समक्ष उनकी पुख्ता पहचान होने के बाद दो से छह माह की सजा होती है तथा इसके बाद दोनों देशों के बीच समझौते के तहत उन्हें प्रत्येक वर्ष जनवरी व जुलाई में कैदियों की सूची साझा कर रिहा कर दिया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया १४ फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही बंद पड़ी बताई है। नतीजन पाकिस्तान की जेल में 418 भारतीय कैदी बंद है और इनमें से ज्यादातर गुजरात के मछुआरे हैं और उनमें से भी अधिकांश के जुर्म की सजा पूरी हो गई है, लेकिन वे रिहा होकर घर नहीं लौट पाए हैं। इधर, कोरोना महामारी ने गतवर्ष से ही देश-दुनिया में हाहाकार मचा रखा है और ऐसे हालात में पाकिस्तान की जेल में कैद मछुआरों के परिजनों की चिंता उनकी सलामती के लिए बढ़ी हुई है। इस संबंध में समुद्र श्रमिक सुरक्षा संघ के प्रमुख बालू सोसा बताते हैं कि यह वक्त भारत-पाकिस्तान की सरकारों के समझने का है और जल्द से जल्द सभी मछुआरों को रिहा करना चाहिए। दोनों ही देश में कैद मछुआरों के परिजन कोरोना काल में उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए फिक्रमंद है और उन्हें उनकी घरवापसी का बेसब्री से इंतजार है। पाकिस्तान के 77 से ज्यादा मछुआरे भारत में कैद बताए है।

-रमेश की मौत से बढ़ी चिंता

दो साल पहले गिरफ्तार गुजरात के मछुआरे रमेश सोया की सजा 3 जुलाई 2019 को पूरी हो गई थी, लेकिन उसकी रिहाई नहीं हो पाई और इस बीच इसी वर्ष 26 मार्च को उसकी कराची जेल में ही किसी बीमारी से मौत हो गई। उसकी मृतदेह भी गिरसोमनाथ जिले की कोडिनार तहसील के नानावाड़ा गांव में परिजनों को 43 दिन बाद मिल पाई। हालांकि रमेश की मृत्यु में कोविड-19 को कारण नहीं बताया है, लेकिन गुजरात के समुद्र तटीय ग्रामीणों व पाकिस्तान में कैद मछुआरों के परिजनों में उनकी सलामती के लिए चिंता बढ़ गई है। अकेले नानावाड़ा गांव में ही ढाई सौ परिवार ऐसे है जिनका व्यवसाय मत्स्याटन है और इनमें से कई मछुआरे पाकिस्तान में सजा पूरी होने के बाद भी यातना भुगत रहे हैं।

-ईद पर इमरान खान को भेजा संदेश

पाकिस्तान-भारत पीपल्स फॉरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी नामक एनजीओ से जुड़े रहे सामाजिक कार्यकर्ता जतिन देसाई ने इस संबंध में बताया कि अभी उन्होंने तीन-चार दिन पहले ही ईद के मौके पर लम्बी अवधि से पाकिस्तान में कैद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए ट्विट किया था और बताया था कि इससे दोनों देशों के बीच सौहार्द व सद्भावना को मजबूती मिलेगी। इस ट्विट पर दोनों ही देश के सैकड़ों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी, लेकिन वो नहीं हो पाया जो चाहते थे। बहरहाल इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत विदेश मंत्री व अन्य जिम्मेदार लोगों को भी समय-समय पर बताया गया है, लेकिन सजा पूरी होने के बाद भी पाकिस्तान की जेल में कैद भारतीय मछुआरों की रिहाई कोरोना काल में अभी तक नहीं हो पाई है।

-बजट सत्र में उठाया था मुद्दा

कोरोना काल में पाकिस्तान में कैद भारतीय मछुआरों की सलामती की चिंता उनके परिजनों को हैं। इसी वर्ष संसद में बजट सत्र के दौरान भारत सरकार के समक्ष सजा पूरी होने के बाद भी पाकिस्तान की जेल में कैद मछुआरों व उनके परिजनों की चिंता के प्रश्न उठाए थे, सरकार उन पर ठोस जवाब नहीं दे पाई।
शक्तिसिंह गोहिल, सांसद, राज्यसभा

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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