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सर्वे से हो जाओ सावधान : 42 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने के लिए साबुन नहीं !

- सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत किए सर्वे में मिली चौकाने वाली हकीकत
- शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को सर्वे के आधार पर साबुन बैंक बनाने का दिया आदेश

सूरत

Updated: October 26, 2021 07:58:55 pm

सूरत.
सूरत सहित राज्य के कई स्कूलों में बुनियादी सुविधा का अभाव विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और स्कूल में स्वच्छता के अभाव की कई बार शिकायत सामने आई है। कई बार इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। बस नोटिस देकर खाना पूर्ति को जाती है। इस बीच सर्व शिक्षा अभियान के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए गए सर्वे में चौकाने वाली बात सामने आई है। राज्य के 42 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने का साबुन ही नहीं है। कोरोना संकरण के सामने लड़ने के लिए पहला हथियार साबुन ही है। इसके नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को साबुन बैंक बनाने का आदेश दिया है।
कोरोना के पहेली और दूसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव शिक्षा जगत पर हुआ है। बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए आज भी केजी से कक्षा 5 की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। ऑफलाइन पढ़ाई में भी बच्चों को स्कूल में सुरक्षित दूरी पर बिठाने का आदेश दिया गया है। इस बीच सर्व शिक्षा अभियान के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत राज्य के स्कूलों का सर्वे किया गया। सर्वे में चौकाने वाली बात सामने आई है। राज्य के 42 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने का साबुन ही नहीं उपयोग में लगाया जाता है। इसलिए सर्व शिक्षा अभियान के डायरेक्टर की ओर से राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी को एक परिपत्र जारी किया गया है। विद्यार्थी के हाथ के स्वच्छता और सावस्थ्य को केंद्र में रख स्कूलों को सूचना दी गई है। गुजरात वॉश 2020 सर्वे के अनुसार राज्य के 42 प्रतिशत स्कूलों में रोजाना हाथ धोने का साबुन ही नही होता है। स्कूलों दी गई सूचना के अनुसार स्कूल में साबुन होना जरूरी हैं। विद्यार्थी 8 से 10 घंटे बिताता है। साबुन से हाथ धोने पर विद्यार्थी के स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार होता है। विद्यार्थी को स्वच्छ रहने की आदत होने लगती है। जो भविष्य में विद्यार्थी और उसके परिवार के लिए रोग से दूर रहने का योग्य मार्ग बन जाएगा। इसलिए स्कूल में साबुन का होना जरूरी होने का परिपत्र जारी किया गया है।
सर्वे से हो जाओ सावधान :  42 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने के लिए साबुन नहीं !
सर्वे से हो जाओ सावधान : 42 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने के लिए साबुन नहीं !
कोरोना से बचने के लिए साबुन पहला हथियार:
जब कोरोना की शुरुआत हुई तब हाथ को साफ रखने पर जोर दिया जाने लगा। साबुन से बार बार हाथ धोने से कोरोना संकरण से बचे रहने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए चिकित्सक और प्रशासन भी सभी को साबुन से हाथ धोते रहने की सूचना देते रहते है।
साबुन बैंक को इस तरह करना होगा काम:
स्कूल में किसी भी आकार और कद के बॉक्स की स्थापना करनी होगी। जो संभालने में आसान और वॉटर प्रूफ रहे। स्कूल संचालक, प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सब साबुन बैंक में साबुन का दान करने के लिए लोगो को प्रेरित करे। जिससे विद्यार्थी के साथ समाज में भी हाथ को साफ रखने के लिए जागरूकता आए। स्कूल में आने वाले मेहमानों को भी साबुन दान करने के लिए गुजारिश करनी होगी। इस साबुन बैंक का संचालन स्कूल के एक शिक्षक को सौंपा जाए। शिक्षक को इसका मूल्यांकन भी करना होगा।

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