प्यासे ही हैं पानी किनारे के कंठ

जलापूर्ति योजना गांव से गुजरने के बावजूद ग्रामीणों को नहीं मिल रही पानी की एक भी बूंद

By: विनीत शर्मा

Updated: 15 Sep 2020, 05:28 PM IST

बारडोली. बारिश के सीजन में भी जिले की मांगरोल तहसील के झरणी गांव में पेयजल की किल्लत पैदा हो गई है। करोड़ों की लागत से बनी जलापूर्ति योजना गांव से ही गुजरती है, लेकिन गांव के लोगों को ही इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा। सभी घरों में नेटवर्क पहुंच गया, पानी की टंकी बन गई, घरों में नल लग गए लेकिन नलों से पानी निकलना शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों को जर्जर कुएं से दूषित पानी भरने को मजबूर होना पड़ रहा है।

वांकल ग्रुप ग्राम पंचायत में शामिल आठ सौ की आबादी वाले झरणी में पेयजल से लेकर सड़क तक प्राथमिक सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी घरों में नल तो लगा दिये लेकिन इन नलों से पानी आने की व्यवस्था नहीं की गई। पशुओं के लिए तो गांव में पानी की व्यवस्था है, लेकिन लोगों के लिए पीने का पानी मुहैया नहीं हो रहा। लोग 1972 में बने जर्जर हो चुके कुएं से पानी लाकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। इन दिनों तो बारिश के कारण कुएं में खेतों का गंदा पानी भी गया है, जिससे पानी दूषित हो चुका है। लोग भी यही पानी पीने को मजबूर हैं। यह हाल तब है जब गांव से बोरसद देगडिय़ा जलआपूर्ति योजना गुजरती है। इस योजना का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों में रोष है।

रास्ते भी जर्जर

पेयजल के साथ ही गांव की सड़कें भी खस्ताहाल हैं। ग्राम पंचायत वांकल तक का रास्ता अब तक नहीं बना है। गांव से सरकारी कॉलेज तक का रास्ता भी खराब है। बारिश में इन रास्तों से गुजरना तकलीफभरा है। रास्ते खराब होने के कारण लोगों को लंबा घूमकर जाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि स्थानीय विधायक और प्रशासन को कई बार शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही।

गांव की टंकी से दूसरे गावों को पानी

हमारे गांव में पानी के लिए टंकी है, जिसमें से दूसरे गांवों को पानी मिलता है। गांव में पानी की टंकी के बाद भी हमें कुएं पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
तेजस्वनी चौधरी, झरणी निवासी

विनीत शर्मा Reporting
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