जीएसटी, नोटबंदी कइयों के लिए बड़े मुद्दे नहीं

चुनाव से पहले नोटबंदी और जीएसटी आम आदमी के लिए जितना बड़ा मुद्दा दिखता था, मतदान के दिन वह व्यक्तिगत जरूरत का मुद्दा रह गया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल

By: मुकेश शर्मा

Published: 10 Dec 2017, 10:13 PM IST

सूरत।चुनाव से पहले नोटबंदी और जीएसटी आम आदमी के लिए जितना बड़ा मुद्दा दिखता था, मतदान के दिन वह व्यक्तिगत जरूरत का मुद्दा रह गया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल और उनकी टीम जिन मुद्दों को लेकर प्रदेशभर में जनमत बना रही थी, युवाओं की उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो निर्णयों नोटबंदी और जीएसटी को लेकर लोगों के साथ ही विपक्षी दलों में भी गहरी नाराजगी थी। जीएसटी के खिलाफ शहर के कपड़ा व्यापारियों ने जहां आंदोलन किया, कांग्रेस ने गुजरात समेत देशभर में जीएसटी के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी टीम ने गुजरात चुनावों को देखते हुए नोटबंदी और जीएसटी पर प्रदेशभर में आम लोगों और व्यापारियों से मिलकर इसके खिलाफ जनमत बनाने की कवायद की। मतदान के दिन आम आदमी ने दोनों मुद्दों को अपने-अपने हिसाब से पारिभाषित किया। प्रोफेशनल्स और छोटे कारोबारियों के लिए दोनों ही मुद्दे ज्यादा बड़े साबित नहीं हुए।


सूरत-पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मतदान करने आए सीए सोनक जवेरी ने नोटबंदी की सराहना करते हुए कहा कि इससे खाते में पैसा जमा कराने के लिए बैंक जाने का झंझट खत्म हो गया। युवा भी नोटबंदी के बाद जेब में पैसे रखने के झंझट से मुक्त हो गए। उनके लिए ऑनलाइन और एप से कहीं भी भुगतान से खर्च का हिसाब रखना आसान हो गया है। व्यापारी संदीप सीरावाला ने जीएसटी के असर को नकार दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में दिक्कतें थीं, लेकिन अब धीरे-धीरे प्रक्रिया आसान हो रही है। ईमानदारी से काम करने की जरूरत है। नोटबंदी भी उन जैसे युवाओं के लिए बड़ी मुश्किल नहीं रही।

कारोबारी लोगों के लिए पाटीदार आंदोलन से बड़ा मुद्दा जीएसटी और नोटबंदी रहा। उनका मानना है कि पाटीदार आंदोलन का असर अब ज्यादा नहीं रह गया है, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी उनके कारोबार से जुड़ा मामला है।

उनके लिए नोटबंदी में पड़ी रकम को खपाना बड़ा सिरदर्द साबित हुआ था। फिर जीएसटी ने काम-धंधे की कमर तोडक़र रख दी। बड़े कारोबारियों के लिए जीएसटी की मुश्किल प्रक्रिया से ज्यादा बड़ी मुश्किल आमदनी के स्रोतों का उजागर होना है। जीएसटी की भरपाई तो उपभोक्ता कर देगा, लेकिन आमदनी पर जो इनकम टैक्स लगेगा, वह कारोबारियों को परेशान कर रहा है। सलाबतपुरा के 82 वर्षीय देवीदास ने कहा कि नोटबंदी का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा।

सुरक्षा बड़ा मुद्दा

ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं, जिनके लिए नोटबंदी, जीएसटी और पाटीदार से बड़ा मुद्दा सुरक्षा का है। उन्हें लगता है कि हर मुश्किल का विकल्प तभी खोजा जा सकता है, जब व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करे। सरकार को हर व्यक्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी और नोटबंदी की बात तो की, लेकिन आम आदमी की सुरक्षा की बात कहीं नहीं की।

अफवाहों से एक-दूसरे को गिराने की कोशिश

चौर्यासी और लिंबायत में समर्थन की अफवाहें वायरल

चुनावी मैदान के शह और मात के खेल में शनिवार को कई विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के समर्थन में बैठने की अफवाहें उड़ाई गईं। इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर देने से प्रत्याशियों को सफाई देनी पड़ी। लिंबायत में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रविन्द्र पाटिल और चौर्यासी मेें निर्दलीय प्रत्याशी अजय चौधरी के लिए अफवाहें उड़ाई गई कि वह भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आ गए हैं।

शनिवार सुबह से सोशल मीडिया के विभिन्न ग्रुप में निर्दलीय प्रत्याशी अजय चौधरी के भाजपा के समर्थन में बैठ जाने की अफवाह घूमने लगी। इसकी जानकारी मिलते ही चौधरी ने खंडन करते हुए इसे विरोधियों की साजिश करार दिया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह उनका नाम लेकर बैठ जाने की बातें कही जा रही हैं, विरोधी खेमा दहशत में लगता है। लिंबायत में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रविन्द्र पाटिल के भाजपा प्रत्याशी को समर्थन के मैसेज वायरल होने से मतदाताओं में कुछ देर असमंजस का माहौल रहा। खबर लगते ही रविन्द्र पाटिल ने इसका खंडन किया। एक दिन पहले सूरत-उत्तर के कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश काछडिय़ा का सेक्स सीडी वायरल किया गया था, जिसे काछडिय़ा ने फेब्रिकेटेड और उन्हें बदनाम करने की साजिश करार दिया था।

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मुकेश शर्मा Reporting
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