सेग-वे व्हीकल मिलने के एक महीने बाद भी उपयोग नहीं

सूरत स्टेशन पर गश्त लगाने के लिए दिए गए, जवानों को ट्रेनिंग का इंतजार

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 10 Apr 2019, 09:59 PM IST

सूरत.

सूरत रेलवे स्टेशन पर गश्त लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल को सेग-वे व्हीकल उपलब्ध करवाए करीब एक महीना हो गया, लेकिन इनका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों ने बताया कि इनके उपयोग की ट्रेनिंग देने के लिए निजी कंपनी को बुलाया गया है।

 


रेलवे परिसर में यात्रियों के सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे सुरक्षा बल और रेलवे पुलिस की है। रेलवे सुरक्षा बल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त एस. आर. गांधी ने बताया कि पश्चिम रेलवे ने मुम्बई मंडल को बारह सेग-वे व्हीकल उपलब्ध करवाए थे। चर्च गेट, दादर, अंधेरी, बान्द्रा टर्मिनस, बोरीवली और सूरत को दो-दो सेग-वे व्हीकल दिए हैं।

 

सूरत स्टेशन पर यह व्हीकल १८ मार्च को आए थे, लेकिन एक महीने बाद भी इनका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। सूरत रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सुरक्षा आयुक्त राकेश पांडेय ने बताया कि निजी कंपनी के अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया गया है। पिछले दिनों कंपनी के लोग ट्रेनिंग देने सूरत आए थे। उस दौरान एक-दो जवानों को ही ट्रेनिंग दी जा सकी थी। अन्य जवानों को ट्रेनिंग देना बाकी है।

 

थाने में कमरे की शोभा बढ़ा रहे

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल सेग-वे व्हीकल रेलवे सुरक्षा बल के थाना निरीक्षक के कमरे की शोभा बढ़ा रहा हैं। रेलवे परिसर में इन व्हीकल को चलाने के दौरान जवानों के गिरकर घायल होने की आशंका के कारण इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। रेलवे परिसर में प्लेटफॉर्म तथा सर्कुलेटिंग एरिया में तुरंत पहुंचने के उद्देश्य से रेलवे सुरक्षा बल को यह वाहन उपलब्ध करवाए गए हैं, लेकिन सूरत स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ काफी होती है। पीक आवर में स्टेशन पर पैर रखने तक की जगह नहीं होती। ऐसे में सेगवे व्हीकल चलाना जवानों के लिए खतरे से कम नहीं है।

 

कहते हैं सेल्फ बेलेंसिंग स्कूटर भी

सेगवे व्हीकल को सेल्फ बेलेंसिंग स्कूटर भी कहा जाता है। एक अमरीकी कारोबारी शेन चेन ने वर्ष 2013 में इनका उत्पादन शुरू किया था। इसके एक साल बाद यह चीन में भी बनाए जाने लगे। पश्चिमी देशों में यह इलेक्ट्रॉनिक वाहन ज्यादा लोकप्रिय हैं। इसमें एक पैड से दो पहिए जुड़े होते हैं। पैड पर दोनों पैर रख कर सवारी की जा सकती है। सवार आगे या पीछे झुक कर रफ्तार को नियंत्रित कर सकता है। पश्चिमी देशों में इन वाहनों में बैटरी से आग लगने के कई हादसे हो चुके हैं।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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