अब सुरक्षित स्थल पहुंचे 10 हजार से ज्यादा पार्सल

रास्ते में फंसे मालवाहक वाहन पहुंचे गोडाउन, लेकिन सूरत से फिलहाल ट्रांसपोर्ट संभव नहीं

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 16 May 2020, 09:10 PM IST

सूरत. कपड़ा बाजार के हजारों व्यापारियों की चिंता का सबब दूर हो गया है क्योंकि मार्च के दूसरे सप्ताह में भेजा गया माल अब ट्रांसपोर्ट्र्स के यहां सुरक्षित पहुंच गया है। वहीं, जनता कफ्र्यू के बाद से ही ट्रांसपोर्टेशन से रह गया माल भी यहीं गोडाउन में सुरक्षित रखा हुआ है। व्यापारियों में चिंता थी कि लॉकडाउन के दौरान रास्ते में फंसे मालवाहक वाहनों में उनके माल पता नहीं किस परिस्थिति में होगा और ऐसे 10 हजार से ज्यादा पार्सल थे।
पिछले कुछ दिनों से जिला प्रशासन के समक्ष ट्रांसपोटर््र्स को गोडाउन में रखे माल के परिवहन की छूट दिए जाने की मांग की जा रही है, ताकि कपड़ा बाजार के व्यापारियों को बाहरी मंडियों में भेजा गया माल लॉकडाउन खुलते ही वहां के व्यापारियों को मिल जाने से अटकी रकम की उलझन से मुक्ति मिल जाए। स्थानीय कपड़ा बाजार में पूरे वर्ष में सबसे बड़े सीजन के रूप में मार्च-अप्रेल व मई के माह को लग्नसरा सीजन के रूप में कपड़ा व्यापारी गिनते हैं और उनके मुताबिक सालाना कपड़ा कारोबार का 20 से 25 फीसदी व्यापार इन्हीं तीन माह में होता है। कोरोना वायरस संक्रमण व लॉकडाउन से पहले मार्च के दूसरे सप्ताह तक कपड़ा बाजार में जमकर ग्राहकी थी और भारी मात्रा में तैयार माल के पार्सल ट्रांसपोर्ट्र्स के यहां अन्यत्र मंडियों में परिवहन के लिए पहुंच रहे थे। 15 मार्च के दो-तीन दिन बाद तक का माल तो सुरक्षित अन्यत्र मंडियों के ट्रांसपोर्ट गोदाम तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद सूरत से निकले अधिकांश मालवाहक वाहन 22 मार्च को जनता कफ्र्यू और उसके बाद 25 मार्च से लॉकडाउन की वजह से रास्ते में ही अटक गए थे और देश के विभिन्न मार्गों में अटके मालवाहक वाहनों की संख्या ढाई सौ से ज्यादा बताई गई है।

अकेले एमपी में ही होम डिलीवरी सिस्टम

देश के अधिकांश प्रदेश की कपड़ा मंडियों में माल छुड़वाने का सेल्फ सिस्टम है और इसमें ज्यादातर व्यापारी अपनी सहुलियत के मुताबिक सूरत कपड़ा मंडी से पहुंचे माल को छुड़वाने के लिए ट्रांसपोर्ट्र्स के यहां 8-10 दिन में पहुंचते हैं। हालांकि मध्यप्रदेश में यह सिस्टम नहीं है, वहां पर जैसे ही ट्रांसपोर्ट गोदाम में माल पहुंचता है तो उसकी कागजी कार्रवाई पूरी कर व्यापारी के यहां ट्रांसपोटर््र्स होम डिलीवरी करवा देते हैं। ऐसी स्थिति में लॉकडाउन से पहले 20-21 मार्च तक अन्यत्र मंडियों में पहुंचे माल की डिलीवरी केवल मध्यप्रदेश में ही संभव हो पाई।

रास्ते में अटक गए थे ढाई सौ ट्रक

सूरत टैक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की मानें तो लग्नसरा ग्राहकी के तैयार माल को सूरत कपड़ा बाजार से 20-21 मार्च तक निकले ज्यादातर मालवाहक ट्रक जनता कफ्र्यू के साथ ही देश के विभिन्न प्रदेशों में रास्ते में ही अटक गए थे और इनकी संख्या ढाई सौ से ज्यादा थी। इसी तरह से शहर के उधना, सारोली आदि में ट्रांसपोर्ट गोदाम में बाहर जाने के लिए 50 से ज्यादा मालवाहक वाहनों का तैयार माल लॉकडाउन की वजह से अटका था। हालांकि थर्ड पार्ट में रास्ते में अटके वाहनों को गंतव्य पहुंचने की छूट मिली और वे निश्चित स्थल पहुंचे तो व्यापारियों का माल सुरक्षित ट्रांसपोर्ट गोदाम तक पहुंचा।

मंजूरी मिल भी जाए तो मुश्किलें यथावत

लग्नसरा सीजन में व्यापारियों के यहां से अन्यत्र मंडी भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट्र्स को सौंपे गए माल को निर्धारित स्थल पर पहुंचाए जाने की मंजूरी जिला प्रशासन से मांगी जा रही है। हालांकि इस मामले में ट्रांसपोर्ट्र्स कुछ अलग ही राय रखते हैं। उनके मुताबिक पहले तो जो माल अन्यत्र मंडियों तक पहुंच गया है वो भी व्यापारियों तक तब ही पहुंचेगा जब वहां मंडी शुरू होगी। इसके अलावा यहां से लेबर, स्टाफ जा चुका है और मालवाहक वाहन भी फिलहाल मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में गोदाम में रखे माल की डिलीवरी हाल में तो संभव नहीं है।


राहत भी मुश्किल भी


रास्ते में अटके मालवाहक ट्रक देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंच गए है, यह ट्रांसपोटर््र्स व कपड़ा व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। लेकिन लेबर, स्टाफ व ट्रकों की अनुपलब्धता से यहां से माल भेजने में फिलहाल तो मुश्किल है।
सुरेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, सूरत टैक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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