अब आई व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराए में कमी

रिंगरोड कपड़ा बाजार के कई बड़े टैक्सटाइल मार्केट में घट चुका हैं दुकानों का 25 से 30 फीसदी किराया

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 29 Jun 2020, 08:43 PM IST

सूरत. कोरोना से उपजे संकटकाल में यह कपड़ा व्यापारियों के लिए अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन कपड़ा कारोबार के लिहाज से कतई नहीं पर यह सच है कि रिंगरोड कपड़ा बाजार के कई नामी-गिरामी टैक्सटाइल मार्केट में व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराए में 25 से 30 फीसदी तक कमी आ गई है।
सूरत कपड़ा मंडी के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि समूचा कपड़ा बाजार 2 माह व 12 दिन तक लगातार बंद रहा। कोरोना संक्रमण से उपजी बंद की स्थिति भी कपड़ा कारोबार में उस वक्त रही जिस वक्त में कपड़ा व्यापारी पूरे साल का 35 से 40 फीसद व्यापार करता है। व्यापार के समय में कपड़ा बाजार बंद रहने के बुरे असर आने तय थे और वो अब धीरे-धीरे स्पष्ट तरीके से नजर आने लगे हैं। कोरोना से उपजे संकटकाल का बड़ा विपरीत असर फिलहाल रिंगरोड कपड़ा बाजार के टैक्सटाइल मार्केट के व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराए पर दिखने लगा है। बीते कल तक महीने के लाख-डेढ़ लाख किराए वाली दुकानें अब 70-75 से 90-95 हजार तक की हो गई है और किराएदार व्यापारी तो मानते हैं कि 2020 तो ऐसे ही बीतने वाला है और इसमें अभी और डाउनफॉल ही आएगा। यह रिंगरोड कपड़ा बाजार के उन बड़े-बड़े टैक्सटाइल मार्केट की स्थिति है जो कि देशभर की कपड़ा मंडियों में ब्रांडनेम बन चुके हैं।


यह बतातें है वजह


व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराए में कमी की वजह में स्वयं व्यापारी बतातें है कि पूरे साल का पीक सीजन कोरोना की भेंट चढ़ गया और अब जो माल बेचा था व बचा है बस उसका भुगतान जमा करना है और बेचना है। साल के पहले छ महीने यूं ही बीत गए और अगले छह माह भी ऐसे ही बीतना तय है तो वे मौजूदा स्थिति में व्यापार कॉर्नर की डबल दुकान का महंगा किराया चुकाए बगैर भी कर सकते हैं। मसलन, जोड़े की दुकान के बजाय अब व्यापारियों ने सिंगल अथवा मार्केट के ग्राउंड-अपर के बजाय सैकंड-थर्ड फ्लोर पर दुकान किराए पर लेकर बड़ा खर्च बचा लिया। इसके अलावा कम किराए की दुकान वाले दूसरे टैक्सटाइल मार्केट में शिफ्ट कर लिया।


अभिनंदन में बन चुकी ऐसी स्थिति


करीब 12-15 साल पहले रिंगरोड कपड़ा बाजार में श्रीसालासर हनुमान मार्ग पर बने अभिनंदन एसी टैक्सटाइल मार्केट में सिंगल-डबल दुकानों का किराया काफी ऊपर तक पहुंचा था, लेकिन वक्त बीतने के साथ नए मार्केट मिलेनियम, यूनिवर्सल आदि रिंगरोड पर बने और वहां से व्यापारियों ने सस्ते किराए में यहां आकर तब दुकानें ली। व्यापारी बतातें है कि 2008 तक अभिनंदन मार्केट में 80 हजार तक भाड़ा था जो आज 15-20 हजार हो गया है। कम खर्चे में व्यापार की परिपाटी कोरोना काल में एक बार फिर व्यापारियों में जगी है तो रिंगरोड कपड़ा बाजार के टैक्सटाइल मार्केट में किराया घटने लगा है।


वो भी हर कीमत पर बैठे हैं तैयार


रिंगरोड कपड़ा बाजार में कम व्यापार और महंगे खर्चे से मजबूर किराएदार कपड़ा व्यापारियों को सारोली कपड़ा बाजार की ओर लुभाने के भी प्रयास इन दिनों खूब किए जा रहे हैं। हालांकि रिंगरोड कपड़ा बाजार पूरे कपड़ा कारोबार की जान है और व्यापारी जल्दी यहां से हटना नहीं चाहते, लेकिन फिर भी कई व्यापारियों ने यहां से मूव भी किया है। उनके मुताबिक यह साल ऐसे ही बीतना है तो महंगे खर्चे में कम व्यापारिक सुविधा क्यों पसंद की जाए? रिंगरोड कपड़ा बाजार से सारोली कपड़ा बाजार अथवा सहारा दरवाजा के निकट नए टैक्सटाइल मार्केट की ओर किराएदार व्यापारियों को खींचने में ब्रोकर्स भी भूमिका निभा रहे हैं।


व्यापार होगा तो महंगा भी मंजूर


कोरोना ने कपड़ा कारोबार की कमर तोड़ दी है। व्यापार के अभाव में व्यापारी खर्चे भुगतने को तैयार नहीं है, इसीलिए वो कम किराए की दुकान देख रहा है। व्यापार जब होगा तो उसे महंगे से भी कोई परहेज नहीं रहेगा।
बबलू सेठिया, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम टैक्सटाइल मार्केट


स्थिति फिलहाल तो ऐसी ही


यह सही है कि रिंगरोड कपड़ा बाजार के अधिकांश टैक्सटाइल मार्केट में सिंगल-डबल दुकानों के किराए में काफी गिरावट आई है और उसकी बड़ी वजह यहीं है कि व्यापारी व्यापार के अभाव में अधिक खर्च के साथ समझौते के मूड में नहीं है।
अमित शर्मा, अध्यक्ष, सूरत टैक्सटाइल शॉप ब्रोकर्स एसोसिएशन।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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