तीन में से एक महिला और पांच में से एक पुरुष ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज

वल्र्ड ऑस्टियोपोरोसिस-डे पर विशेष...

जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों से बीमारी को रोकना संभव

सूरत.

ऑस्टियोपोरोसिस अर्थात हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति। ऑस्टियोपोरोसिस को जीवन-शैली में परिवर्तन और कभी-कभी दवाइयों के सहारे रोका जा सकता है। जीवन-शैली बदलने में नियमित रूप से व्यायाम करना, खुद को गिरने से बचाना, सही तरीके का खान-पान लेना शामिल हैं। दवाइयों में कैल्शियम, विटामिन-डी, बिसफ़ॉस्फ़ोनेट और कई अन्य तत्व शामिल हैं। डब्लूएचओ के द्वारा हर साल 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस-डे मनाया जाता है। इस दिन आम लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जागरूक किया जाता है।

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. धीरज रस्तोगी ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ती उम्र के बाद विशेष तौर से महिलाओं में देखी जाने वाली समस्या है। चिकित्सकों के सलाह में चहलक़दमी वाली मांसपेशियों को तानने के लिए व्यायाम, ऊतक-संवेदी-सुधार अभ्यास और संतुलन चिकित्सा शामिल हैं। व्यायाम के प्रभाव से भी ऑस्टियोपोरोसिस को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। इस बीमारी का उम्रदराज लोगों को अधिक सामना करना पड़ता है। ये समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। आंकड़े बताते हैं कि पूरी दुनिया में हर तीन में से एक महिला और हर पांच में से एक पुरुष को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण फैक्चर होने का जोखिम बना रहता है। इसलिए इससे बचाव के तरीकों के बारें में जानकारी होना जरूरी हो जाता है।


ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

ऑस्टियोपोरोसिस का शाब्दिक अर्थ पोरस बोन्स है। अर्थात ऐसी बीमारी, जिसमें हड्डियों की गुणवत्ता और घनत्व कम होता जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण सामान्यत: जल्दी दिखाई नहीं देते हैं। दरअसल हमारी हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स से बनी होती हैं। अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ ये मिनरल नष्ट होने लगते हैं, जिससे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। कई बार तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि काई छोटी सी चोट भी फै क्चर का कारण बन जाती है।

यह है कारण

ऑस्टियोपोरोसिस होने के कई कारण हैं। जिनमें प्रमुख कारण आनुवांशिक, प्रोटीन एवं विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, व्यायाम न करना, बढ़ती उम्र, धूम्रपान, डायबिटीज, थाइरॉयड तथा शराब का सेवन आदि शामिल हैं। इसके अलवा दौरे की दवाओं तथा स्टेरॉयड आदि के सेवन से भी ये समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक पीने, ज्यादा नमक खाने तथा महिलाओं में जल्दी पीरियड्स खत्म होने से भी इस बीमारी को पांव पसारने का मौका मिलता है।


क्या हैं लक्षण

जोड़ों में दर्द के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ खास लक्षण नहीं दिखाई देते है। लेकिन, जब कोई मामूली चोट लग जाने पर भी फैक्चर होने लगे, तो यह बड़ा संकेत है। इसके अलावा जल्दी थक जाना, शरीर में बार-बार दर्द, खासकर सुबह के वक्त कमर में दर्द होना भी लक्षण होते हैं। शुरुआत में तो हड्डियों और मांसपेशियों में हल्का दर्द होता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे बढ़ता है। खासतौर पर पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में हल्का सा भी दबाव पडऩे पर दर्द तेज हो जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि 40 साल की उम्र के बाद हर तीन वर्ष में एक बार बोन डेंसिटी टेस्ट करा लेना चाहिए।

बीमारी हो जाने पर क्या करें

ऑस्टियोपोरोसिस होने पर जंपिंग और स्किपिंग जैसी भारी व्यायाम करना संभव नहीं होता है। ऐसे में चलना, एरोबिक्स, डांस तथा हलके व्यायाम करें। योग भी आराम पहुंचाता है। जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव जरूरी हैं। निष्क्रिय जीवनशैली बीमारी के खतरे को और बढ़ा देती है। पौष्टिक आहार लें, जिनमें कैल्शियम और विटामिन डी भरपूर हो।

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Sanjeev Kumar Singh
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