थोड़े समय सब्र, फिर पटरी पर दौड़ेगी तेजी

थोड़े समय सब्र, फिर पटरी पर दौड़ेगी तेजी

Dinesh O.Bhardwaj | Updated: 08 Aug 2019, 09:10:57 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

सूरत कपड़ा मंडी से जम्मू-कश्मीर में सालाना 5 हजार करोड़ का होता है व्यापार

 

सूरत. भारतमाता के ताज जम्मू-कश्मीर में से अनुच्छेद 370 हटने की खुशी में पूरा देश झूम रहा है, लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो इस खुशी को व्यापारिक नजरिए से चौगुनी होते भी देख रहा है। इस तबके में गुजरात की औद्योगिक राजधानी सूरत महानगर के पांच सौ से ज्यादा कपड़ा व्यापारी शामिल है, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर की प्रत्येक गतिविधि पर गंभीरता से नजरें टिकाए बैठे है।
सूरत कपड़ा मंडी से जम्मू-कश्मीर की विभिन्न कपड़ा मंडियों का छह दशक पुराना नाता है और ज्यादातर कपड़ा व्यापारी वाया दिल्ली कपड़ा मंडी, अमृतसर कपड़ा मंडी, जम्मू कपड़ा मंडी, श्रीनगर कपड़ा मंडी वहां प्रतिदिन 3 से 4 ट्रक कपड़ा पहुंचाते है। स्थानीय व्यापारियों की मानें तो सूरत कपड़ा मंडी से जम्मू-कश्मीर में सालाना 5 हजार करोड़ का कपड़ा कारोबार होता है और अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस कारोबार में निश्चित रूप से समर सीजन में 25 से 30 फीसदी बढ़ोतरी के आसार है। इन आसार की पुष्टि करते हुए न्यू टैक्सटाइल मार्केट के कपड़ा व्यापारी गणेश अग्रवाल ने पत्रिका संवाददाता को बताया कि जम्मू-कश्मीर में सूरत कपड़ा मंडी से बहुतायत मात्रा में ड्रेस मैटेरियल जाता है और वो भी 60 फीसदी से ज्यादा घाटी में उपयोग लिया जाता है। वहां साल में छह महीने तो कफ्र्यू रहने से दुकानें बंद रहती है। अब परिस्थितियां बदलेगी और कफ्र्यू नहीं रहेगा, दुकानें खुलेगी तो निश्चित तौर पर कपड़े की बिक्री भी बढ़ेगी। जम्मू-कश्मीर में कपड़ा कारोबार के लिए दो ही सीजन होते हैं और इनमें से एक विंटर तो दूसरा समर सीजन होता है। इन दोनों ही सीजन के लिए सूरत कपड़ा मंडी से बड़ी मात्रा में कपड़ा भेजा जाता है। विंटर सीजन भले ही जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद स्थितियां संभलने में मामूली कारोबार के साथ बीत जाए लेकिन समर सीजन निश्चित तौर पर स्थानीय कपड़ा कारोबार के लिए तेजी से भरपूर रहेगा।


थोड़ा संभलकर करेंगे व्यापार


न्यू बॉम्बे मार्केट के कपड़ा व्यापारी नवलेश गोयल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की कपड़ा मंडियों के साथ फिलहाल बदले हुए रूप में संभलकर कपड़ा कारोबार होगा। संभव है कि बनारस समेत अन्य बड़ी कपड़ा मंडियों के समान कश्मीर का हैंडलूम, कालीन व्यवसाय भी सूरत मंडी की ओर बढ़े। केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद व्यापार की विपुल संभावना भी बढ़ेगी, इसलिए फिलहाल सूरत के कपड़ा कारोबारी विंटर सीजन तक तो माहौल पर नजर बनाए रखेंगे और उसके बाद ही कपड़ा कारोबार में नया करने का मानस बनाएंगे।


ड्रेस मैटेरियल की बड़ी मंडी


सूरत कपड़ा मंडी के ड्रेस मैटेरिटल कारोबार में देश की सबसे बड़ी मंडी पंजाब है तो दूसरी बड़ी मंडी के रूप में जम्मू-कश्मीर को गिना जाता है। यहां विंटर सीजन में मोटे कपड़े के रूप में पश्मीना, अल्पाइन, कुलकुल, पश्मीना जैकार्ड, 45 बाय 45 पीसी, हैवी रेयॉन कपड़ा वैरायटी की डिमांड रहती है वहीं, समर सीजन में कॉटनबेस जामसिल्क, पीसी, केम्ब्रिक, जाम कॉटन, इंडोनेशिया कॉटन आदि रहते है। सूरत मंडी से भेजे जाने वाले ड्रेस मैटेरियल व कुर्ती की रेंज 300 से 900 रुपए तक की रहती है।


एजेंसी के माध्यम से कारोबार


न्यू टैक्सटाइल मार्केट के कपड़ा व्यापारी अमित दोदराजका बताते है कि जम्मू व कश्मीर दोनों जगह पर ज्यादातर एजेंसी के माध्यम से सूरत के कपड़ा व्यापारी कारोबार करते है। जम्मू क्षेत्र की जम्मू, कठुवा, किश्तवाड़, विजयपुर में रकम डूबने व गुड्स रिटर्न के नाममात्र चांस होते हैं वहीं, कश्मीर की श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, कुलवामा, सोपोर, शोपिया आदि मंडियों में यह मात्रा दस फीसदी तक रहती है। कानून भी वहां अलग होने से पहले डूबत में सूरत के कपड़ा व्यापारियों के पास मन मसोसने के सिवाय कुछ नहीं बचता था, पर अब ऐसा नहीं होगा।

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