कोविड अस्पताल में रोगियों को मिल रहा है सुकून

सूरत के अस्पतालों में देशभर में पहला प्रयोग, मरीज समेत चिकित्सक भी पहले से बेहतर फीलिंग्स को मानें

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 31 Jul 2020, 08:39 PM IST

सूरत. कानों से शरीर के भीतर पहुंचता शांत ध्वनि का संगीत जहां सामान्य व्यक्ति के मन को प्रफुल्लित कर देता है वहीं, रोगी-पीडि़त के मनोबल को मजबूती भी प्रदान करता है। शायद यहीं कारण है कि गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत के कोविड-19 अस्पताल में मरीजों को म्यूजिक का अतिरिक्त डॉज दिया जा रहा है और वे भी बेटर फील कर रहे हैं।
सूरत शहर में कोविड-19 के मरीजों के लिए बेहतर से बेहतर सेवा देने के प्रयास लगातार प्रशासन के साथ-साथ स्वयंसेवी संगठन कर रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में सात दिन पहले ही म्यूजिक थैरपी को शामिल किया गया है और इसके कारगर परिणाम भी देखने को मिलने लगे हैं। स्वयं मरीज इसे काफी बेहतर बताने लगे हैं और कहने लगे हैं कि यह उन्हें कोविड-19 मर्ज से ठीक करने में मानसिक तौर पर मजबूत बनाने वाली मारक दवा के रूप में काम कर रही है। वहीं, चिकित्सक भी मानते हैं कि संगीत की कर्णप्रिय धुन से मरीज का रोग से पनपता तनाव कम होता है और मन-मस्तिष्क आराम की अनुभूति करते हैं। तनावमुक्त शरीर में दवा रोग की क्षमता खत्म करने में शत-प्रतिशत कार्य करती है।
यूं आया था विचार
सूरत के न्यू सिविल होस्पीटल व स्मीमेर मेडिकल कॉलेज एंड होस्पीटल के कोविड-19 अस्पताल में लगातार सेवा दे रही सेवा फाउंडेशन के संस्थापक अशोक गोयल व प्रमुख राजीव ओमर ने जब बेड पर बैठे-लेटे मरीजों के बुझे-बुझे चेहरे देखे तो उन्हें यह विचार आया। पहले उन्होंने कोविड-19 अस्पताल इंचार्ज से बात की और फिर योजना बनाई। योजना के तहत स्मीमेर होस्पीटल की मल्टीलेयर पार्किंग के तीनों फ्लोर को ध्वनियुक्त बनाने के लिए सभी जगह साउंड सिस्टम लगाए और बाद में सुबह 6 से रात्रि 8 बजे तक थोड़े-थोड़े अंतराल में संगीत की धुनें बजने लगी।
संगीत से मिलते हैं यह लाभ
वैज्ञानिक रिसर्च बताते हैं कि संगीत से मनोरंजन ही नहीं बल्कि ढेरों मानसिक फायदे होते हैं। संगीत की स्वर तरंगों से काम के बोझ से थके दिमाग की नसों में नई ऊर्जा आती है और यह दिमाग के कार्टिसोल को कम करता है, जिससे दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है। म्यूजिक थैरपी से सांस की दिक्कत कम हो जाती है और इससे शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द का एहसास भी खत्म होता है। इससे याददाश्त अच्छी होती है और संगीत सुनने से एंडोर्फिस हार्मोन का स्त्राव होता है जो कि दिल की क्षमता को अंदरुनी तौर पर बढ़ाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है।
यह धुन घोलती है शरीर में नई ऊर्जा
भारतीय शास्त्रीय संगीत में शामिल स्वर, लय, ताल के अलावा वाद्ययंत्र वीणा, बांसुरी, सितार आदि का कर्णप्रिय स्वर कोविड-19 अस्पताल में थोड़े-थोड़े अंतराल में मरीजों समेत उनके उपचार में तत्पर मेडिकल स्टाफ के कानों में हल्की धुन के साथ गूंजता रहता है। इसमें ऊंकार, रामधुन, राधाकृष्ण, सतनाम आदि के अलावा वीरगाथा की धुनें प्रमुखता से शामिल है। कोविड-19 अस्पताल में कार्यरत वॉलिएंटर मोनिका गौतम बताती है कि धुन सुनकर मरीज स्वयं को तरोताजा तो महसूस करते ही हैं बल्कि दूसरे मरीज का भी उत्साह बढ़ाने लगे हैं।


माइंड फ्रेश म्यूजिक


कोरोना महामारी का जितना भय बाहर फैला है उतना यहां कोविड-19 अस्पताल में नहीं है। विश्राम के समय के अलावा बजने वाला म्यूजिक माइंड फ्रेश करता है और शरीर को नई ताकत देता है।
सुरेंद्र (बदला हुआ नाम), मरीज, कोविड-19 अस्पताल


लडऩे की मिलती है ताकत


शरीर को खोखला करने वाली कोरोना बीमारी से मेडिकल ट्रीटमेंट तो शरीर में मजबूती लाता ही है और वार्ड में धीमी-धीमी आवाज में गूंजने वाला म्यूजिक इस महामारी से लडऩे की ताकत देता है।
महेश (बदला हुआ नाम), मरीज, कोविड-19 अस्पताल


संगीत बेहतर चिकित्सा पद्धति


यह दवा तो नहीं पर दवा से कम भी नहीं है। संगीत थैरपी मरीज को मर्ज के दबाव से बाहर निकालती है और शरीर की अंदरूनी शक्तियों को जागृत करती है, जिससे मरीज जल्द स्वस्थ होता है। संगीत की स्वर तरंगों से काम के बोझ से थके दिमाग की नसों में नई ऊर्जा आती है और यह दिमाग के कार्टिसोल को कम करता है, जिससे दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है।
डॉ. अदिति मित्तल, मेडिटेशन एक्सपर्ट


रिलेक्सेसन म्यूजिक थैरेपी से इलाज में मदद


कोविड-19 हॉस्पिटल में ज्यादातर मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती है। इन मरीजों की मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के लिए रिलेक्सेसन म्यूजिक थैरेपी से मदद मिलती है। ग्राउंड, प्रथम और सेकंड समेत सभी जगहों पर धीमे आवाज में म्यूजिक बजाने से अच्छा वातावरण बनता है। मरीज के अलावा डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों पर भी अच्छा असर होता है। इसके लिए रिलेक्सेसन म्यूजिक का सलेक्शन करके कंप्यूटर में फिड करते है। इसी सिस्टम से प्रोनिंग क्रिया करवाते समय मरीज को कैसे पेट के बल लेटना है बताते है। दूसरी सूचना जो मरीज के लिए जरुरी है वह उन्हें बताने में आसानी होती है।
डॉ. पराग शाह, एसोसिएट प्रोफेसर और अध्यक्ष, मनो चिकित्सक विभाग, स्मीमेर अस्पताल, सूरत।

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