थम गए भारी वाहनों के चक्के


ट्रांसपोर्टर्स की देशव्यापी हड़ताल
बैठक में हड़ताल को सफल बनाने पर चर्चा

By: सुनील मिश्रा

Updated: 20 Jul 2018, 10:01 PM IST


वापी. ट्रांसपोर्टर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का वापी में भी असर देखा गया। वापी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के हड़ताल को समर्थन दिए जाने से शुक्रवार को पहले दिन से ही हजारों भारी वाहन खड़े हो गए। हड़ताल के संबंध में शुक्रवार को ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन में हुई बैठक में बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर शामिल हुए।
बैठक में एसोसिएशन के प्रमुख भरत ठक्कर समेत कमेटी के अन्य सदस्यों ने हड़ताल के कारणों और उससे उपजे हालात के बारे में लोगों को अवगत कराया। इस दौरान हड़ताल को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का सभी लोगों ने समर्थन किया। हड़ताल का असर बगवाड़ा टोलनाके पर भी देखा गया। रोजाना यहां से निकलने वाले वाहनों की संख्या में पहले दिन ही 70 प्रतिशत तक कमी पाए जाने की जानकारी मैनेजर ने दी । बैठक में बताया गया है कि टोलनाके समाप्त करने की मांग काफी समय से की जा रही है। ट्रांसपोर्टर एक बार में भी रोड टैक्स की तरह टोल टैक्स भी जमा करने को तैयार हैं। क्योंकि पूरे देश में करीब ३५० टोलनाकों पर भ्रष्टाचार और वाहनों के खड़े रहने पर होने वाले जाम से ट्रांसपोर्ट उद्योग को जितना नुकसान होता है,उससे कम आय ही सरकार टोलटैक्स से प्राप्त होती है। जबकि यह उद्योग वन टाइम टोल टैक्स के रूप में इससे कई गुना रकम जमा करवा सकता है।

हाइवे पर दिखे भारी वाहन
हड़ताल के बावजूद हाइवे पर भारी वाहनों की आवाजाही देखी गई। हालांकि यह रोजाना की अपेक्षा बहुत कम रही। इस बारे में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से बताया गया है कि यह तय किया गया है कि जिस गाड़ी ने 19 जुलाई में माल भरा होगा, उन्हें रास्ते में परेशान नहीं किया जाएगा। हालांकि नजदीकी गंतव्य पर ही वाहन जा रहे हैं। एक-दो दिन के बाद हड़ताल का व्यापक असर दिखेगा।

रोजाना छह से आठ करोड़ रुपए का नुकसान
हड़ताल के कारण वापी में हजारों ट्रक खड़े हो गए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत ठक्कर ने बताया कि हड़ताल से वापी में ही इस उद्योग को छह से आठ करोड़ रुपए का रोजाना नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि हड़ताल चलने तक हजारों लोग बेरोजगार रहेंगे। भरत ठक्कर ने बताया कि इ-वे बिल और जीएसटी से ट्रांसपोर्ट उद्योग की दिक्कतों को दूर करना जरूरी है। इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस फीस में कमी, डीजल के दाम में कमी लाकर इसे जीएसटी के दायरे में लाने, टोलनाके खत्म करने समेत कई मांगें हड़ताल का प्रमुख कारण हैं।

ट्रक हड़ताल से माल परिवहन ठप
सिलवासा. डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में ट्रक मालिकों की देशव्यापी हड़ताल से प्रदेश से बाहरी राज्यों में माल परिवहन ठप पड़ गया है। उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में ट्रकों के पहिए थम गए हैं। हड़ताल में स्थानीय ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं। हालांकि नजदीक के शहरों में कुछ टैम्पो और छोटे मालवाहक सड़कों पर चलते दिखाई दिए। ट्रक ट्रांसपोर्ट हड़ताल में बस, टैक्सी, ऑटो, सिटी बसें, स्कूल बस बाहर हैं।
आमली, सिलवासा, दादरा, नरोली, मसाट, रखोली, खानवेल सहित सभी विस्तारों में ट्रांसपोर्टर्स ने बुकिंग गोदाम बंद कर दिए हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि मांगें मंजूर नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेगी। डीजल की कीमतें कम होनी चाहिए और इसे जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए। उद्योगपतियों का कहना है कि हड़ताल ज्यादा दिन चली तो हालात बिगड़ सकते हैं। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि कि मोदी सरकार ने टोलमुक्त का वादा किया था, लेकिन इसके विपरीत डीजल व पेट्रोल को जीएसटी से दूर रखकर ट्रांसपोर्टरों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। डीजल और पेट्रोल की कीमतें रोज घटती बढ़ती हैं, लेकिन ट्रक मालिक रोज किराए में बदलाव नहीं कर सकते हैं। ट्रक यूनियनों की लोडिंग सीमा बढ़ाने के साथ दो ड्राइवर की अनिवार्यता समाप्त करने, डीजल कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाने, टोल सिस्टम बदलने, थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम पर जीएसटी खत्म करने जैसी कई मांगें हैं।

सुनील मिश्रा
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