वापी/वांसदा.

गुजरात के डांग जिले में पिछड़े आदिवासी गांव कराडीआंबा में गरीब परिवार की बेटी सरिता गायकवाड़ ने जकार्ता एशियाड में गोल्ड मेडल जीतकर साबित कर दिया है कि मंजिल चाहे जितनी लंबी और कठिनाइयों भरी हो, दृढ़ इरादा कर लिया तो उसे पाना नामुमकिन नहीं है। डांग जिले और गुजरात राज्य ही नहीं, पूरे देश के लिए गौरव बनी अंतरराष्ट्रीय धाविका सरिता गायकवाड़ आज सफलता के जिस मुकाम पर पहुंची है, वहां तक पहुंचना उसके लिए आसान नहीं था। कठिन और अभावग्रस्त परिस्थितियों से जूझते हुए सरिता अब पीटी उषा की तरह उडऩपरी के रूप में विख्यात हो चुकी है।

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