चेकडेम एवं जलस्रोतों में आया भरपूर पानी

ओखी तूफान ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, वहीं रबी की जरूरतों को पूरा करके चेहरे पर मुस्कान भी ला दी है। 5 दिसम्बर को 24 घंटे बारिश होने

By: मुकेश शर्मा

Published: 11 Dec 2017, 09:28 PM IST

सिलवासा।ओखी तूफान ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, वहीं रबी की जरूरतों को पूरा करके चेहरे पर मुस्कान भी ला दी है। 5 दिसम्बर को 24 घंटे बारिश होने से ग्रामीण विस्तार के 70 प्रतिशत चेकडेम पानी से फिर भर गए हैं। मानसून में अच्छी बारिश के चलते चेकडेम 10 से 20 प्रतिशत खाली हुए थे। ओखी चक्रवात से फिर चेकडेम पानी से लबालब हो गए हैं। इससे गांवों में पेयजल और सिंचाई की किल्लत नहीं रहेगी। इस बारिश ने बोरवेल व कुओं के गिरते जलस्तर पर भी रोक लगा दी है।

इस बार जल संचयन के अधिकांश स्रोत पानी से भरे हुए हैं। जिला पंचायत ने खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में योजना के तहत खानवेल, रूदाना, मांदोनी, सिंदोनी, आंबोली, रखोली, दपाड़ा, रांधा, किलवणी के 40 गांवों में चेकडेम निर्मित किए हैं। यह सभी चेकडेम पानी से भर गए हैं। नदी नालों पर बने चेकडेम व छोटे बांधों में जमकर पानी आया है। कौंचा, दूधनी, परजाई के चेकडेम में पानी दिखाई देने लगा हैं।

दमण गंगा नदी से संलग्न बांध पानी लबालब भर गए हैं। खानवेल, बिन्द्राबीन, खानवेल, रखोली के छोटे बांध शोभायमान हो गए हैं। अब गर्मी तक पानी की कमी नहीं रहेगी। मैदानी क्षेत्रों के नालों में भी बारिश का पानी बहने लगा है। पानी के साथ जलस्रोतों में मछलियां भी आई हैं, इससे मछुआरों का धंधा चल निकला है। बेमौसमी बारिश से बोरवेल और कुओं का जलस्तर भी बढ़ा हैं।

पेयजल की समस्या हल


वर्ष में गर्मी आने से पहले पर्वतीय क्षेत्र मांदोनी, सिंदोनी, खेरड़ी में पेयजल की परेशानी बढ़ जाती है। अप्रैल आते ही अधिकांश गांवों के बोरवेल जबाव देने लगते हंै। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चेकडेम भरने से गर्मी में पानी की ज्यादा समस्या नहीं रहेगी। रबी की फसलों के लिए सिंचाई की जरूरतें लगभग पूर्ण हो गई हैं।

संविधान एवं विश्व मानव अधिकार दिवस मनाया


संगमित्रा फाउंडेशन द्वारा दमन के स्वामी विवेकानंद सभागार में ६१वां संविधान दिवस एवं ६९वां विश्व मानव अधिकार दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित एडवोकेट सुषमा आदरे ने भाषण में मानव अधिकारों के बारे में बताया। बताया कि बाबा साहेब अम्बेडकर ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का संविधान सौंपा था। कार्यक्रम में सभी समाज के लोगों के अलावा संगमित्रा फाउंडेशन के प्रमुख प्रशांत आजाद, सुषमा आदरे, शौकत मिठानी आदि उपस्थित थे।

मुकेश शर्मा Reporting
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