POLITICAL NEWS: गुजरात में जीत का दारोमदार राजस्थान के जिम्मे

-बतौर पार्टी प्रभारी राजस्थान का गुजरात से राजनीतिक कनेक्शन दो दशक पुराना, एक बार फिर गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस का भरोसा राजस्थान के प्रभारियों पर टिका

By: Dinesh Bhardwaj

Updated: 08 Oct 2021, 07:15 PM IST

सूरत. गुजरात और राजस्थान को यूं ही सहोदर नहीं कहा जाता क्योंकि दोनों प्रदेश की ना केवल सीमा जुड़ी है बल्कि खान-पान, रहन-सहन और भाषा-बोली में काफी-कुछ समानता वर्षों पुरानी है और अब आधुनिक दौर में इसमें राजनीतिक समानता भी घुल-मिल गई है। राजनीतिक स्तर पर यह संयोग है अथवा प्रयोग, लेकिन दो दशक से राजस्थान के नेताओं को गुजरात में पार्टी प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। एक बार फिर कांग्रेस ने यह जिम्मेदारी निभाने का अवसर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को सौंपा है जबकि भाजपा तो इस मामले में कुछ वर्षों को छोड़ दे तो पिछले 20 साल से कायम है।
गुजरात विधानसभा चुनाव नजदीक है और भाजपा ने हाल ही में बड़े प्रयोग के रूप में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत पूरे मंत्रिमंडल को हटाकर नई भूपेंद्र सरकार को स्थापित कर पहला चुनावी खेल खेला है। उधर, बगैर प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस भाजपा के इस निर्णय से हतप्रभ है और ऐसे हालात में जब विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी है तो पार्टी की तंद्रा टूटी है। इस दिशा में पार्टी ने सबसे पहले प्रदेश प्रभारी के तौर पर राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को कमान सौंपी है। कहा तो यह जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निकटस्थ डॉ. शर्मा को गुजरात प्रभारी की कमान भी उनके हस्तक्षेप से ही मिली है अन्यथा डॉ. रघु शर्मा का संगठन में कोई बहुत-ज्यादा दखल कभी राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति में नहीं रहा है। गौरतलब है कि 2017 में आयोजित गुजरात के १४वें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रभारी के रूप में कमान अशोक गहलोत के पास ही थी और अथक मेहनत व राजनीतिक सूझबूझ से कांग्रेस चुनाव परिणाम में सत्ता के काफी करीब पहुंच गई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में रही वो कसर पूरी करने का मौका गहलोत के नजदीकी और भरोसेमंद डॉ. रघु शर्मा को मिला है। वहीं, भाजपा इस मामले में पहले से ही गुजरात में सुनिश्चित जीत का दारोमदार राजस्थान के नेताओं के जिम्मे सौंपकर दो दशक से लगातार आगे बढ़ रही है। बीते दो दशक में भाजपा के गुजरात प्रभारी की शृंखला में 2002 के 11वें विधानसभा चुनाव में यह जिम्मा जयपुर के रामदास अग्रवाल के पास था और उनके बाद लम्बे समय तक पार्टी प्रभारी का दायित्व पाली के ओम माथुर ने संभाला। 2017 के 14वें विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यह जिम्मा तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निकटस्थ अजमेर के भूपेंद्र यादव को सौंपा और तब से यादव लगातार इस पद पर काबिज है। हाल ही में भूपेंद्र यादव नवगठित मोदी सरकार में केबिनेट मंत्री का दर्जा भी हासिल किए है।

-परिणाम के नजदीक पहुंचकर पिछड़े

2017 में 14वें गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी अशोक गहलोत की राजनीतिक सूझबूझ व बेहतर नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन किया और 2012 के 13वें विधानसभा चुनाव से 16 सीटें ज्यादा जीती। गहलोत ने गुजरात में तत्कालीन पाटीदार आंदोलन को भी कांग्रेस के पक्ष में करने की भरपूर कोशिश की और नतीजे भी काफी हद तक अनूकूल रहे, हालांकि सूरत समेत दक्षिण गुजरात से गहलोत व कांग्रेस को अपेक्षा मुताबिक चुनाव परिणाम नहीं मिल सका, जिसकी वजह से कांग्रेस 77 सीट तक ही पहुंच पाई। उधर, भाजपा की 99 के फेर में ही फंसी रह गई।

-भाजपा व कांग्रेस दोनों के प्रभारी अजमेर से

2022 में गुजरात के 15वें विधानसभा चुनाव भाजपा व कांग्रेस को जिताने का जिम्मा दोनों ही पार्टियों ने राजस्थान के नेताओं को सौंपा है और इसमें भी दिलचस्प यह है कि दोनों ही पार्टी के प्रभारी राजस्थान के अजमेर जिले से हैं। भाजपा के गुजरात प्रभारी भूपेंद्र यादव केंद्र सरकार में श्रम व रोजगार मंत्री है तथा लम्बे समय से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी है। वहीं, कांग्रेस के नियुक्त गुजरात प्रभारी डॉ. रघु शर्मा अजमेर जिले के सावर कस्बे से हैं और संगठन स्तर पर भले ही कमजोर है, लेकिन कांग्रेस सरकार में मंत्री पद का लम्बा अनुभव रखते हैं।

-दोनों ही प्रभारी प्रवासियों से अछूते

भाजपा के प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव लम्बे समय से दायित्व संभाल रहे हैं, लेकिन उनका सूरत समेत गुजरातभर में बसे प्रवासी राजस्थानियों से सीधा-सीधा सम्पर्क नहीं है और अब कांग्रेस के गुजरात प्रभारी बने डॉ. रघु शर्मा का भी कुछ ऐसा ही हाल है। हालांकि भूपेंद्र यादव बिहार के प्रभारी रहने के दौरान वहां चुनाव में कई प्रवासी कार्यकर्ताओं के सम्पर्क में आए मगर सूरत और गुजरात में उनके संबंध पूर्व प्रभारी ओम माथुर, रामदास अग्रवाल के समान प्रवासियों से प्रगाढ़ नहीं बन पाए। वहीं, डॉ. शर्मा भी इस मामले में मंजे हुए नेता नहीं कहे जाते है।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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