Surat News; दूषित पानी बना सकता है पांजरापोल के पशुओं को बीमार


ट्रस्टियों ने गंदे पानी की शिकायत जीपीसीबी, पंचायत, मामलतदार और कलक्टर से की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी


The trustees complained to the GPCB, Panchayat, Mamlatdar and Collector about the dirty water, but no one listened

Sunil Mishra

December, 0410:45 PM

वापी. वापी से सटे राता में श्री अजीत सेवा ट्रस्ट संचालित पांजरापोल में रहने वाले अबोल पशु और उनकी देखभाल के लिए रहने वाले लोग जल प्रदूषण के कारण परेशानी का सामना कर रहे हैं।
12 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पांजरापोल के बीच प्राकृतिक जलबहाव क्षेत्र है। वर्तमान समय में राता और छीरी के कुछ विस्तारों का डोमेस्टिक गंदा पानी बह रहा है। इससे सुबह के समय दुर्गन्ध रहती है और भूजल भी दूषित हो रहा है। इसमें से बरसात का पानी यहां से होकर राता खाड़ी में मिलता है। पांजरापोल में रहने वाले पशुओं के उपयोग के लिए ट्रस्ट के अनुरोध पर दमणगंगा नहर विभाग ने माइनर नहर लिंक की थी। इसके द्वारा पानी छोड़ा जाता था। करीब दस साल पहले यहां विभाग की ओर से चेकडेम भी बनाया गया था। गंदे पानी के कारण होने वाली परेशानी की शिकायत जीपीसीबी, पंचायत, मामलतदार और कलक्टर से ट्रस्टियों ने की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

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गंदे पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं
जानकारी के अनुसार पांजरापोल राता गांव में स्थित है। राता और उससे सटे छीरी में बीते कुछ समय से बड़े-बड़े अपार्टमेन्ट के अलावा कई चालियां, कबाड़ गोदाम खड़े हो गए हैं, लेकिन गंदे पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं किया गया। इसके कारण डोमेस्टिक गंदा पानी खुले में बहता है। जो पांजरापोल स्थित जलक्षेत्र में पहुंचकर उसे गंदा कर चुका है। इसके अलावा कंपनियों से लाए गए कबाड़ को धोने के बाद निकला दूषित पानी भी बहकर इसी पानी में मिलता है। गंदे पानी के साथ कूड़ा कचरा भी बहकर आने से समस्या गंभीर होती जा रही है। यही पानी आगे जाकर राता नदी की खाड़ी में मिलकर उसे भी गंदा कर रहा है। ट्रस्टियों ने बताया कि एक तरफ स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है। दूसरी तरफ जलप्रदूषण जैसी गंभीर समस्या के खिलाफ शिकायत के बाद भी कोई विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है।

डेढ़ हजार से ज्यादा पशुओं का आश्रय
श्री अजीत सेवा ट्रस्ट के राजेश शाह ने बताया कि वर्तमान समय में करीब 1800 सौ पशु यहां रहते हैं। इसमें गाय, भैंस, बैल, भेंड़, बकरियां समेत अन्य अबोल जीव शामिल हैं। किसी समय में इसी पानी का उपयोग पांजरापोल में रहने वाले पशु पक्षियों के लिए होता था। इस पानी में मछलियां भी रहती थी। विभिन्न धार्मिक अवसरों पर लोग उन्हें चारा खिलाने भी आते थे। पिछले कई महीने से यह पानी इतना ज्यादा दूषित हो गया है कि किसी बड़े नाले में तब्दील हो गया है। मछलियां भी नहीं बची। सुबह में कई बार दुर्गन्ध और झाग निकलने से यहां पशु पक्षियों के अलावा उनकी देखभाल के लिए रखे करीब 40 लोगों के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल होता है। कई बार जीपीसीबी से शिकायत की गई। कुछेक बार पानी की सैम्पल भी ले गए, लेकिन उसके बाद अपनी जिम्मेदारी से हाथ ऊपर कर पंचायत के सिरे डाल दिया। लिखित शिकायत के बाद भी गंदे पानी को खुले में छोडऩे वाले अपार्टमेन्ट या घरों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। पानी के दूषित होने के बाद ट्रस्ट को कई बोरिंग करवानी पड़ी। अब इस पानी का उपयोग पशु कर रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह पानी भी खराब हो रहा है।

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Sunil Mishra
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