एहतियात : सोच-समझकर पहनें एन-95 मास्क, हो सकती है सांस की दिक्कत

एन 95 मास्क: चिकित्सकों की सलाह- हर किसी के लिए नहीं है उपयुक्त, कोमोरबिड कंडीशन वाले तो दूर ही रहें, शरीर श्रम से भी बचें

By: विनीत शर्मा

Updated: 02 Jun 2020, 07:51 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हर कोई एन 95 मास्क पहनने पर ही जोर दे रहा है। एक्सपट्र्स की रिपोर्ट में भी यही बताया जा रहा है कि एन 95 मास्क संक्रमण से 95 फीसदी सुरक्षा दे रहे हैं। लेकिन इसे सोच-समझ कर इस्तेमाल करने की जरूरत है। बगैर जरूरत पहन लिया तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं। कोमोरबिड कंडीशन वालों में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे बनी हुई इम्युनिटी भी खत्म हो सकती है। चिकित्सक भी आम आदमी को एन 95 मास्क से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही यह हिदायत भी कि यदि शारीरिक श्रम का कोई काम कर रहे हैं या साइकिलिंग कर रहे हैं तो इसे कतई न पहनें, वरना फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। आम आदमी के लिए घर में बना कपड़े का मास्क पहनना ज्यादा सहूलियतभरा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मल्टीलेयर होने के कारण एन-95 मास्क पहनने से सांस की थोड़ी परेशानी होती है। यह पूरी तरह चेहरे से चिपका होता है, जो लोगों की दिक्कत में इजाफा करता है। दौड़ते वक्त या व्यायाम के दौरान सांस की गति धीरे-धीरे बढती है। उस वक्त फेफड़े को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जबकि एन-95 मास्क में हवा भी फिल्टर होकर आती है। हवा का दबाव कम होने के कारण ऑक्सीजन का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। चिकित्सक साइकिलिंग के दौरान भी एन-95 मास्क न पहनने की सलाह दे रहे हैं।

एन-95 मास्क भी फुलप्रूफ नहीं

औपचारिक रूप से भले कुछ न कहें लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एन-95 मास्क भी फुलप्रूफ नहीं है। एन-95 मास्क 0.3 माइक्रोन या इससे बड़े आकार के कणों को 95 प्रतिशत तक रोक सकता है, जबकि वायरस इससे कहीं छोटे नैनो मीटर साइज का होता है। स्त्री और पुरुषों में यह मास्क बराबर काम नहीं करता। पुरुषों की मूंछ और दाढ़ी वाले हिस्सों के कारण मास्क एयर टाइट नहीं रह पाता। इन स्थानों से वायरस प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा एन 95 मास्क में लगे वॉल्व से वायरस बाहर फैल सकता है। चिकित्सक उस एन 95 मास्क के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं जिसमें छिद्र ना हो। सांस छोड़ते वक्त छिद्रों से हवा के साथ बैक्टीरिया या वायरस भी बाहर निकल सकते हैं, जो दूसरे लोगों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

इनके लिए बेहतर है सर्जिकल मास्क

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हेल्थ केयर और सफाई कर्मियों को सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक जो लोग सीधे तौर पर कोरोना से नहीं लड़ रहे उन्हें सर्जिकल मास्क ही पहनना चाहिए। अहमदाबाद के चिकित्सक डॉ. प्रवीण गर्ग के मुताबिक आम आदमी के लिए घर में कपड़े का बना मास्क ही पर्याप्त है। हर इस्तेमाल के बाद सर्जिकल मास्क का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित हो नहीं तो संक्रमण और ज्यादा मारक हो जाएगा। हालांकि न्यू सिविल अस्पताल के टीबी चेस्ट विभाग की अध्यक्ष डॉ. पारुल वडगामा अलग राय रखती हैं। उनके मुताबिक एन 95 मास्क सुरक्षित है, लेकिन कुछ लोगों को मास्क पहनने से घबराहट होती है। उनके मुताबिक ऑक्सीजन की कमी से इम्यून सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ता। कोविड-19 मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर को यह मास्क अनिवार्य रूप से पहनना चाहिए।

मास्क ही काफी नहीं

मास्क का इस्तेमाल ही कोरोना से नहीं बचा सकता। कोरोना से निपटने के लिए व्यक्ति को अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा। बार-बार हाथ धोना, साफ-सफाई रखना, खांसने-छींकने का तरीका और दूसरों से छह फीट की दूरी बनाना जरूरी है। अगर बाहर निकल रहे हैं तो दस्ताने भी पहन सकते हैं। एक बार दस्तानों का इस्तेमाल करने के बाद उनका वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करें।

इन स्थितियों में पहनें मास्क

- अगर पूरी तरह स्वस्थ हैं तो बाहर निकलते समय ही मास्क पहनें। किसी बीमार व्यक्ति की देखरेख में लगे हैं, खासकर यदि वह कोरोना संक्रमित है तो एन 95 मास्क पहनें।
- अगर आपको खांसी, सर्दी और छींक आ रही है तो मास्क का इस्तेमाल करें।
- मास्क तभी असरदार साबित होगा जब उसके साथ हैंड हाइजीन का भी ख्याल रखा जाए। यानी नियमित रूप से हैंड वॉश करते रहें।
- सर्जिकल या एन 95 मास्क पहन रहे हैं तो उसका वैज्ञानिक निस्तारण भी सुनिश्चित करें।

मास्क पहनते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

- मास्क पहनने से पहले अपने हाथों को साबुन पानी या फिर ऐल्कॉहॉल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें
- अपनी नाक और मुंह को मास्क से अच्छी तरह से ढंक लें ताकि मास्क और चेहरे के बीच कोई गैप न रहे
- मास्क पहने हुए हैं तो उसे बार-बार गंदे हाथों से टच ना करें
- सिंगल यूज मास्क को दोबारा बिलकुल यूज न करें और हर बार एक नए मास्क का इस्तेमाल करें
- मास्क को हटाते वक्त उसे सामने से बिलकुल टच न करें। पीछे की तरफ से पकड़ कर खोलें और तुरंत कवर्ड डस्टबिन में डाल दें।
- मास्क हटाने के बाद एक बार फिर हाथों को साबुन से धो लें या सैनिटाइजर से साफ कर लें।

एन 95 मास्क में यह होती है मुश्किल

- मल्टीलेयर होने के कारण इसे पहनकर श्वास लेने में तकलीफ होती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है।
- शरीर में आक्सीजन की कमी से हमारा इम्यून सिस्टम भी खराब हाता है। बेहतर इम्यून सिस्टम कोरोना संक्रमण से लडऩे में कारगर है।
- यह मास्क सिर्फ वायु प्रदूषण के समय ही अधिक कारगर।
- दमा, टीबी, दिल, किडनी समेत कोमोरबिड कंडीशन वाले दूसरें लोगों और 60 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों को एन 95 मास्क के इस्तेमाल से जब तक जरूरी न हो बचना चाहिए।
- स्वस्थ सामान्य व्यक्ति के लिए घर में बना सूती कपड़े का मास्क ही पर्याप्त है। सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल कोरोना संक्रमितों से अलग दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों व सफाई कर्मचारियों के लिए उपयुक्त। एन 95 मास्क वही पहनें जो किसी न किसी वजह से सीधे तौर पर कोरोना संक्रमितों के संपर्क में हैं।

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विनीत शर्मा Reporting
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