निजी विश्वविद्यालय कर रहा है विद्यार्थियों की तलाश !

- इंजिनियरिंग के साथ सभी तरह के पाठयक्रमों में संचालकों को सता रहा है रिक्त सीटों का भय
- मास प्रमोशन से बढ़ी उम्मीद पर भी फिर गया पानी
- विद्यार्थियों को निजी से ज्यादा राज्य के विश्वविद्यालय पर भरोसा

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 14 Oct 2021, 01:33 PM IST

सूरत.
शहर के निजी विश्विद्यालय इन दिनों विद्यार्थियों की तलाश में जुट गए है। इंजीनियरिंग के साथ कई कोर्स चलाने वाले इन निजी विश्वविद्यालयों को सीटें रिक्त रहने का डर सताने लगा है। मास प्रमोशन का भी निजी विश्वविद्यालयों को कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। विद्यार्थियों को निजी विश्वविद्यालयों के मुकाबले राज्य के
विश्वविद्यालयों पर अधिक भरोसा है। जिनसे उन्हें रोजगार की एक उम्मीद है।
सूरत शहर में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय स्थित है। जिस के अंतर्गत 30 से अधिक विभाग और 300 से अधिक कॉलेज है। यहां तापी से लेकर वापी तक के विद्यार्थी सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर पीएचडी की पढ़ाई करते है। सूरत में ही अब चार निजी विश्वविद्यालय भी कार्यरत हो गए है। पहले ओरो यूनिवर्सिटी फिर भगवान महावीर यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। इसके बाद इसी साल सार्वजनिक और वनिता विश्राम निजी विश्वविद्यालय बने। चार निजी विश्वविद्यालयों के आने से लगा की वीएनएसजीयू के प्रति विद्यार्थियों की रुचि कम होगी। लेकिन ऐसा हुआ नही। आज चार निजी विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों की तलाश है। क्योंकि इनके सभी पाठयक्रमों में विद्यार्थियों की कमी हैं। इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए के साथ सभी पाठयक्रम की ज्यादातर सीट रिक्त है।
फीस बड़ा कारण:
निजी विश्वविद्यालयों में सभी पाठयक्रम की फीस राज्य विश्वविद्यालय से अधिक होती है। फीस एक बड़ा विषय है जिस के चलते विद्यार्थी इसमें प्रवेश लेना पसंद नही करते। वैसे भी विद्यार्थी कोरोना के बाद फीस में कटौती की मांग कर रहे है। परीक्षा की फीस भी वापस करने के लिए आग्रह कर रहे है। ऐसे में अधिक फीस के साथ निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेना उचित नही मान रहे है।
- सरकारी क्षेत्र में रोजगार का प्रश्न
विद्यार्थियों को ऐसा भी लग रहा है की निजी विश्वविद्यालयों की डिग्री के चलते सरकारी क्षेत्र में रोजगार को लेकर दुविधा हो सकती है। कहीं निजी विश्वविद्यालयों की डिग्री को मान्य नहीं रखा गया तो आगे जा कर बड़ी समस्या हो सकती है। फिर निजी क्षेत्र में ही रोजगार के भरोसे पर रहना पड़ सकता है। इनके कोर्स यूजीसी ने मान्य किए है या नही इसकी भी अलग से जांच कर प्रवेश लेना होता है। कई बार ऐसा हुआ है की पढ़ाई के बाद पता चलता है की कोर्स यूजीसी में मान्य ही नहीं है।
मास प्रमोशन से भी लाभ नहीं:
कोरोना के कारण इस बार सभी विद्यार्थियों को मास प्रमोशन दिया गया। 12वीं में सब से अधिक सूरत जिले के ही विद्यार्थी पास हुए है। इससे देख निजी विश्वविद्यालय को लगा की सारी सीट भर जाएगी। लेकिन इसका विपरीत हो रहा है। निजी विश्वविद्यालय को भी विद्यार्थी मिलना मुश्किल हो गया है।
- फीस में बड़ा अंतर
राज्य और निजी विश्वविद्यालयों की फीस में बड़ा अंतर है। सामान्य फीस में ही राज्य के विश्वविद्यालय से डिग्री मिल जाती जाती है। जिसके मुकाबले निजी विश्वविद्यालयों की फीस दो से चार गुना अधिक होती है।
- केतन राठौड़, विद्यार्थी
- डिग्री के साथ कई अवसर
सरकारी विश्वविद्यालय में भविष्य संवारने के अधिक अवसर होते है। डिग्री के साथ पीएचडी तक की पढ़ाई के लिए अवसर मिलता है। वो भी सामान्य फीस पर। निजी में इसके लिए काफ़ी खर्च होता है। सरकारी विश्वविद्यालय की डिग्री और पीएचडी पर जल्द रोजगार की भी उम्मीद है।
- नेहा सिंह, विद्यार्थी
विद्यार्थी नहीं मिलने पर निजी विश्वविद्यालय को दिक्कत
निजी विश्वविद्यालय का के प्राध्यापकों का कहना है की फीस के कारण विद्यार्थी निजी विश्वविद्यालय से दूर भागते है। साथ उन्हे इनकी डिग्री पर भी शक होता है। सबसे पहले विद्यार्थी सरकारी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना पसंद करता है। वहां प्रवेश नहीं मिलने पर निजी विश्वविद्यालय की और रुख करता है। निजी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की फीस पर ही चलते है। विद्यार्थी की कमी सबके वेतन और यूनिवर्सिटी को चलाने पर असर करते है। ऐसे में कई प्राध्यापकों के वेतन में कटौती भी हुई है। विद्यार्थी नहीं मिलने पर निजी विश्वविद्यालय को दिक्कतों का सामान करना पड़ता है।
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Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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