पोस्टमार्टम रूम में वृद्धा के पैर को चूहों ने खाया, परिजनों में आक्रोश

- दक्षिण गुजरात के सबसे बड़े न्यू सिविल अस्पताल में चूहों का आतंक...

- चिकित्सक ने शव की पहचान के लिए परिजन को बुलाया, पैर पर चोट के निशान देखकर हुआ खुलासा

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 22 Jul 2021, 09:23 PM IST

सूरत.

न्यू सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम में स्वच्छता के अभाव के कारण चिकित्सकों समेत स्टाफ को काम करने में मुश्किल हो रही है। चूहों का उपद्रव इतना बढ़ गया है कि कोल्ड रूम में रखे शवों को खराब कर रहे हैं। ताजा मामला बुधवार को सामने आया जिसमें अडाजन निवासी एक वृद्धा की इलाज के दौरान मौत होने के बाद शव को कोल्ड रूम में रखा गया था। लेकिन सुबह जब पोस्टमार्टम के लिए शव टेबल पर लाया गया तो उसके पैर के हिस्से में चूहों के कुतरने का निशान देख परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर अनदेखी और मृत्यु के बाद भी शव को सुरक्षित नहीं रखने पर रोष व्यक्त किया। गौरतलब है कि न्यू सिविल में चूहे के उपद्रव की पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी शवों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती रही है।

न्यू सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, अडाजन स्वस्तिक नगर निवासी लक्ष्मी देवान वसावा (60) 15 जून को घर में गिरकर घायल हो गई थी। उनको न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया था। मंगलवार रात 11 बजे मौत हो गई। एमएलसी केस दर्ज होने के कारण शव को पोस्टमार्टम रूम में रखवा दिया गया। परिजनों को सुबह पोस्टमार्टम के पहले चिकित्सकों ने शव की पहचान करने के लिए बुलाया। परिजनों ने शव की पहचान की, लेकिन पैर के हिस्से में चूहे के काटने का घाव देखकर नाराजगी व्यक्त की। वार्ड ब्वाय ने बताया कि कोल्ड रूम में चूहे इतने बढ़ गए हैं कि शव को खाने की घटनाएं रोज सामने आ रही है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

गंदगी और भिनभिनाती आती मक्खियों के बीच रोज होते हैं कई पोस्टमार्टम

कर्मचारियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से पोस्टमार्टम रूम में स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गंदगी और बदबू के माहौल में पोस्टमार्टम रूम में ज्यादा देर तक खड़ा नहीं रहा जा सकता है। फिर भी डॉक्टर और कर्मचारी रोजाना 8 से 10 पोस्टमार्टम करते है। पोस्टमार्टम रूम में चौबीस घंटे में दिन के समय पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाती है।

दो डॉक्टर और चार कर्मचारी नियमित शवों के पोस्टमार्टम के लिए उपलब्ध रहते हैं। लेकिन इन कर्मचारियों को कार्य का उचित माहौल देने में अस्पताल प्रशासन विफल रहा है। कर्मचारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रूम में मक्खियों पर नियंत्रण के लिए ब्लू लाइट वाली मशीन लगाई गई थी,लेकिन उसके बिगडऩे के बाद मक्खियों व किट-पतंगों की संख्या बढ़ गई है। चिकित्सकों ने बताया कि एक पीएम करने और कागज तैयार करने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। लेकिन इतने देर तक पोस्टमार्टम रूम में रहने और दुर्गन्ध से सिर चकराने लगता है।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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