32,500 करोड़ रुपए के सौदों पर बाकी कैपिटल गैन टैक्स की वसूली

32,500 करोड़ रुपए के सौदों पर बाकी कैपिटल गैन टैक्स की वसूली

Pradeep Devmani Mishra | Publish: Nov, 10 2018 08:28:34 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 08:28:35 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

आयकर विभाग अब इन मामलों में रिकवरी की कार्रवाई करने की सोच रहा है


प्रदीप मिश्रा, सूरत
आयकर विभाग ने पिछले वर्षो में स्थिर संपत्ति के 50 लाख रुपए से अधिक के सौदे कर कैपिटल गेन टैक्स नहीं भरने वाले मामलों की जांच शुूरू की है। इतने दिनों तक चुप रहने के बाद आयकर विभाग अब इन मामलों में रिकवरी की कार्रवाई करने की सोच रहा है।
आयकर विभाग के नियम 194 के अनुसार कोई भी नोन एग्रीकल्चर स्थिर संपत्ति के 50 लाख रुपए से अधिक के सौदे पर विक्रेता 1 प्रतिशत टीडीएस काटकर आयकर विभाग में जमा करवाएगा। पिछले दिनों आयकर विभाग की एक जांच में पाया गया कि कुछ वर्षो में सीआईटी-1 में 120 करोड़, सीआईटी-2 में 110 करोड़ और सीआइटी-3 में 105 करोड़ टीडीएस के 1 प्रतिशत के तौर पर जमा हुए हैं। अर्थात कि 32500 करोड़ रुपए के सौदे हुए हैं। इतने बड़े सौदे होने के बाद आयकर विभाग ने इन सौदों की अधिक जांच शुरू की, लेकिन जांच में पता चला कि इतनी बड़ी रकम की खरीद-बिक्री करने वाले 100 से अधिक लोगों ने रिटर्न फाइल नहीं किया है और जिन लोगों ने रिटर्न फाइल किया है उनमें से 90 करदाताओं ने रिटर्न में यह जानकारी छुपाई है। बताया जा रहा है कि यदि आयकर विभाग इस मामले में टैक्स नहीं भरने वालों को नोटिस देकर बुलाए या रिकवरी शुरू करे तो विभाग को लगभग 6000 करोड़ रुपए का टैक्स मिल सकता है। फिलहाल आयकर विभाग इस मामले में विचार कर रहा है और जल्दी ही कार्रवाई शुरू करे ऐसी संभावना है।
उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग अलग-अलग ढंग से करदाताओं पर नजर बिछाए हैं। यदि करदाता बड़ी रकम की कोई जमीन या संपत्ति आदि खरीदता है तो रजिस्ट्रार कार्यालय से वह जानकारी आयकर विभाग को मिल जाती है। इसी तरह से एक लाख से अधिक के सौदे पर पैनकार्ड अनिवार्य होने से ऐसे सौदे भी आयकर विभाग की रडार में आ जाते हैं। इस तरह से आयकर विभाग की नजर से ज्यादा बच पाना करचोरों के लिए मुश्किल हो चुका है।

Ad Block is Banned