पहली से ज्यादा घातक हो सकती है कोरोना की दूसरी लहर : डॉ. चंद्रेश

- प्रत्येक नागरिक को स्वअनुशासित होकर करनी होगी सरकार की मदद

- फिलहाल सरकारी और अर्धसरकारी अस्पतालों में बेड खाली

- निजी अस्पतालों में भी कोरोना बेड आरक्षित किए

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 24 Nov 2020, 10:32 PM IST

सूरत.

शहर समेत राज्य में दीपावली के बाद से कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कोरोना की सेकंड वेव के रोकथाम की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को सेल्फ डिसिप्लीन, सेल्फ कंट्रोल और सेल्फ क्वारन्टाइन के जरिए निभानी होगी। यह कहना है इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के गुजरात ब्रांच के पूर्व प्रमुख का। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर, पहली से अधिक घातक हो सकती है। महानगरपालिका ने निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बेड आरक्षित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

दीपावली के एक दिन पहले तक बाजारों में खूब भीड़-भाड़ दिखाई दे रही थी। शहरवासियों ने जमकर खरीदारी की। इसके बाद धूमधाम से त्योहार मनाया, लेकिन अगले दिन से ही सूरती घूमने के लिए निकलने लगे। कई लोगों ने शहर के बाहर का भी दौरा किया है। अब जब वे सूरत लौट रहे हैं तो उन्हें कर्फ्यू समेत दूसरी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी जा रही है। दीपावली के पहले लोग इतने लापरवाह हो गए कि सोशल डिस्टेंसिंग को भूल गए। गुजरात इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख डॉ. चंद्रेश जरदोश ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि त्योहार के दौरान तीन कारण प्रमुख तौर से जवाबदार है जिसके चलते कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं। पहला त्योहार मनाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग भूलना। दूसरा पटाखे से हवा में प्रदूषण फैलना और तीसरा कारण सर्दी की शुरुआत है। इन तीनों कारणों से राज्य में कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को ही गुजरात, दिल्ली समेत कुछ राज्यों की हालत पर चिंता जताई है। यही स्थिति आने वाले पन्द्रह दिनों से शुरू होकर अगले दो माह तक देखने को मिल सकती है। सूरत, वडोदरा और राजकोट में दीपावली के पहले कोरोना केसों की संख्या डेढ़ सौ से कम थी। लेकिन अब दो सौ से सवा दो सौ केस आ रहे हैं। आगामी दिनों में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 300 के करीब या उसको पार भी कर सकता है। ठंड के कारण सर्दी, छींक, खांसी और सामान्य फ्लू आदि बीमारी अधिक देखने को मिलती है। कोरोना वायरस ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है। इसलिए शहरवासी अभी से सतर्क हो जाएं। हाल में शादियों का सीजन चल रहा है।

आमतौर पर हम मित्रों से बातचीत में मास्क हटा देते हैं। बात करते समय भी मास्क पहनने की आदत डालें। समारोहों में सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। सामूहिक भोज के दौरान थाली लेते समय डिस्टेंस बनाकर रखें। दूसरी तरफ सीनियर सिटीजन, डायबिटिज, ब्लड प्रेशर समेत दूसरी बीमारी से पीडि़त कोमोर्बिड मरीज घर में ही रहें। अभी बच्चों को घर में ही रखना है।

कर्फ़्यू और लॉकडाउन स्थायी समाधान नहीं

रात्रि कर्फ़्यू और इसके आगे अंतिम उपाय के तौर पर लॉकडाउन है। इसके जरिए कोरोना वायरस को रोका जा सकता है लेकिन यह स्थाई उपाय नहीं है स्थाई उपाय तब है जब वायरस को एक बार पूरी तरह से सुनने कर दिया जाए। इसके लिए
लिए प्रत्येक नागरिक को जवाबदारी समझनी होगी। लॉकडाउन से आर्थिक स्थिति कमजोर होगी।

19 अस्पतालों में 555 रिजर्व बेड

मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणि, स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष नायक समेत अन्य अधिकारियों ने हाल में ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, डॉक्टर एसोसिएशन, पिड्याट्रिक एसोसिएशन समेत अन्य चिकित्सकों के साथ बैठक की थी। इसमें कोरोना मरीजों के लिए निजी अस्पतालों में रिजर्व बेडों की संख्या बढ़ाने पर फिर चर्चा हुई। डॉ. आशीष नायक ने बताया कि दीपावली के पहले 288 बेड निजी अस्पताल में आरक्षित थे। अब उसे बढ़ाकर 19 अस्पतालों में 555 बेड करने का निर्णय किया है। हाल में सरकारी और अद्र्धसरकारी अस्पतालों में काफी बेड खाली हैं। आवश्यकता होने पर निजी अस्पतालों में रिजर्व बेड की सुविधा तुरंत शुरू कर दी जाएगी।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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