शालू डाइंग आग प्रकरण: मिल मालिक आशीष जैन को उच्च न्यायालय से जमानत

आग लगने के साथ स्ट्रक्चर ढहने से दो श्रमिकों की हुई थी मौत

By: Sandip Kumar N Pateel

Published: 19 Jan 2019, 09:23 PM IST

सूरत. पांडेसरा जीआइडीसी की शालू डाइंग मिल में आग लगने से हुए हादसे में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार मानते हुए सापराध मनुष्यवध के आरोप में गिरफ्तार मिल मालिक आशीष जैन को उच्च न्यायालय ने जमानत पर रिहा कर दिया। सेशन कोर्ट की ओर से जमानत याचिका नामंजूर करने पर आशीष जैन ने अधिवक्ता नरेश गोहील और रुस्तम मार्शल के जरिए उच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी।

 


पांडेसरा जीआइडीसी की शालू डाइंग मिल में 9 जून की रात भीषण आग लगने के बाद स्ट्रक्चर धराशायी हो गया था। हादसे के वक्त 18 श्रमिक अंदर फंस गए थे, जिन्हें रेस्क्यू कर दमकलकर्मियों ने बहार निकाला था। हालांकि मलबे के नीचे दबने से गंभीर रूप से घायल दो श्रमिकों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। वेसू के आगम आर्केड़ में हुए हादसे के बाद छह महीने बाद पांडेसरा पुलिस ने शालू डाइंग हादसे के लिए मिल मालिक आशिष ओमप्रकाश जैन और कमल ओमप्रकाश जैन को जिम्मेदार मानते हुए सापराध मनुष्य वध का मामला दर्ज कर आशीष जैन को गिरफ्तार कर लिया था। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आशिष जैन ने सेशन कोर्ट से जमानत के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन सेशन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका नामंजूर कर दी थी। इसके बाद आशीष जैन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से पेश होकर अधिवक्ता गोहील और मार्शल ने दलीलें पेश कर मिल मालिकों की लापरवाही नहीं, बल्कि घटना को महज आकस्मिक हादसा बताया। कोर्ट ने उनकी दलीलों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त आशीष जैन को जमानत पर रिहा करने का हुक्म सुनाया।

Sandip Kumar N Pateel Reporting
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