बनेगी सूरत की पर्यावरण पॉलिसी

policyफिर रंग लाई पत्रिका की मुहिम, सैद्धांतिक रूप से सहमत हुआ मनपा प्रशासन

By: विनीत शर्मा

Published: 30 Dec 2018, 07:36 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. राजस्थान पत्रिका की पहल पर शहर की अपनी पर्यावरण पॉलिसी का मुद्दा मनपा के एजेंडे में शामिल हुआ है। शहर को प्रदूषण की मार से बचाने के लिए मनपा प्रशासन ने पर्यावरण पॉलिसी बनाने का निर्णय किया है। इससे पहले मनपा प्रशासन पार्किंग पॉलिसी, वाटर पॉलिसी और सोलर पॉलिसी पर भी ड्राफ्ट तैयार कर चुका है। पार्किंग पॉलिसी को राज्य सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है। अब इस पर अमल की कवायद की जा रही है।

किसी भी शहर के लिए उद्योग विकास की पहली शर्त है तो प्रदूषण उसके लिए स्थाई समस्या बनकर आता है। तेजी से बढ़ते शहर में उद्योग के ऑक्सीजन से अर्थव्यवस्था तो मजबूत होती है, लेकिन उनसे निकलने वाली जहरीली हवा शहर के लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बना देती है। दुनिया में बहुत कम शहर ऐसे हैं, जो प्रदूषण की मार से खुद को बचा पाए हैं। सूरत विकास के जिस दौर में है, ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स ने उसे दुनिया के सबसे तेज आर्थिक वृद्धि वाले शहरों की सूची में शामिल किया है। इस सूची में देश के ऐसे दस शहरों में सूरत शीर्ष पर है। यह रिपोर्ट जहां सूरतीयों के हौसलों को पंख देती दिखती है, प्रदूषण की मार नई चुनौतियां पेश कर रही है।

राजस्थान पत्रिका ने शहर में बढ़ती प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए आठ दिसंबर से सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित कर लोगों का ध्यान इस ओर खींचा था। 19 दिसंबर को पत्रिका ने ‘पर्यावरण के लिए भी तय हो पॉलिसी’ शीर्षक से टिप्पणी प्रकाशित की थी। इसमें शहर में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए अपनी नीति तय करने पर जोर दिया गया था। राजस्थानी पत्रिका की पर्यावरण नीति की मांग के समर्थन में आमजन के साथ ही जनप्रतिनिधि भी जागरूक हुए और मनपा तथा जिला प्रशासन पर दबाव बनाने के साथ ही मामले को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाया। इस दबाव का असर रहा कि मनपा प्रशासन शहर की अपनी पर्यावरण नीति को लेकर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुआ।

हर स्तर पर बढ़ा प्रदूषण

शहर में प्रदूषण के मामले में हवा, पानी, ध्वनि और भूजल समेत अन्य स्तरों पर हालात चिंताजनक हैं। कपड़ा उद्योग और डायमंड के हब के रूप में पहचान बना चुकी औद्योगिक नगरी की हवा सांस लेने योग्य नहीं रह गई है। औद्योगिक इकाइयों की धुआं उगलती चिमनियों ने हवा को भी जहरीला कर दिया है। शहर में सुबह और रात के समय प्रदूषण की मात्रा इतनी बढ़ जाती है कि हवाखोरी के लिए निकलने वाले लोगों को स्वच्छ हवा की जगह प्रदूषित हवा का दंश झेलना पड़ रहा है। शहर का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स इस समय 300 के पार पहुंच जाता है। स्थानीय प्रशासन के पास इस पर नियंत्रण के प्रभावी नीति नियम नहीं हैं तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कागजी शेर बनकर रह गया है। उसके पास तो हवा में प्रदूषण को मापने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम ही नहीं है। सूरत महानगर पालिका ने शहर में प्रदूषण का स्तर मापने के लिए लिंबायत और वराछा जोन क्षेत्र में दो एयर मॉनिटरिंग मशीन लगाई हंै, लेकिन सिस्टम खर्चीला होने के कारण अन्य जोन में इन्हें लगाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है।

 

प्रदूषण मुक्त शहर के लिए सूरत का चयन

विश्वबैंक ने सूरत को दुनिया के प्रदूषण मुक्त शहरों के लिए चुना है। इसके लिए विश्व बैंक ने गाइडलाइन भी तैयार की है। इस पर अमल करते हुए मनपा प्रशासन भविष्य में इ-बस चलाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा रास्तों को धूलमुक्त करने के लिए भी मनपा प्रशासन रोडमैप तैयार कर रहा है।

पहले भी चेताया था

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वित्त वर्ष 2018-19 का बजट पेश करने के दौरान मनपा प्रशासन ने एन्वायरमेंट इम्प्रूवमेंट चार्ज लगाया था। इससे 40 करोड़ रुपए का कर वसूला जाना था। पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए मनपा प्रशासन ने बजट में एन्वायरमेंट इम्प्रूवमेंट चार्ज को तो शामिल कर लिया, लेकिन यह पर्यावरण संरक्षण के लिए किस तरह खर्च किया जाएगा, इसकी कोई गाइडलाइन बजट में नहीं बताई गई थी। राजस्थान पत्रिका ने उस वक्त भी (4 फरवरी को) पर्यावरण नीति तय करने की मांग करते हुए ‘पॉलिसी भी साथ ही करनी थी तय’ शीर्षक से टिप्पणी प्रकाशित की थी। वित्त वर्ष का तीन चौथाई समय गुजर चुका है और मनपा प्रशासन अभी तक यह साफ नहीं कर पाया कि एन्वायरमेंट इम्प्रूवमेंट चार्ज के रूप में वसूली जा रही राशि को किस तरह और कहां खर्च करना है। हालांकि शहर के लोगों पर पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर कर लगाकर सूरत महानगर पालिका प्रदेश की पहली मनपा हो गई है, जिसने पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखाई है।

दूसरा अवसर, जब मनपा प्रशासन ने सुनी पत्रिका की बात

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यह दूसरा मौका है, जब मनपा प्रशासन राजस्थान पत्रिका के उठाए मुद्दे पर इतना गंभीर हुआ है कि सैद्धांतिक मंजूरी तक देनी पड़ी। इससे पहले राजस्थान पत्रिका ने जनवरी में महिलाओं के लिए महिला बाजार की मुहिम को आवाज दी थी। सत्ता और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के समर्थन तथा शहर की महिलाओं के दबाव के बाद मनपा प्रशासन ने महिला बाजार के प्रस्ताव को वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में शामिल किया था। इस बार शहर के लिए अपनी पर्यावरण पॉलिसी की पत्रिका की मुहिम को मनपा प्रशासन ने सैद्धांतिक सहमति दी है। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका अपनी स्थापना से ही आमजन की आवाज को उठाता रहा है। यह सिलसिला गुजरात में भी आगे बढ़ा। पत्रिका ने जनता से जुड़े मुद्दों को जगह दी और उनकी समस्याओं के साथ प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया।

विनीत शर्मा Reporting
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