सांप के साथ छेड़छाड़ करना हो सकता है घातक

सांप के साथ छेड़छाड़ करना हो सकता है घातक

Sunil Mishra | Publish: Aug, 12 2018 08:59:24 PM (IST) Surat, Gujarat, India

विशेषज्ञों ने जागरुकता सेमिनार में दी सर्प के बारे में जानकारी

वापी. बरसात के मौसम में सर्पदंश के बढ़ते मामलों को देखते हुए धरमपुर के सांईनाथ अस्पताल के डॉ. डीसी पटेल की ओर से जागरुकता शिविर आयोजित किया गया। इसमें विविध समाजिक संस्थाएं, एनिमल सेविंग्स ग्रुप, नवसारी, डांग , आहवा, वापी एवं सिलवासा समेत आसपास के अन्य स्थानों से लोग इसमें शामिल हुए थे। बताया गया कि सांप के साथ छेड़छाड़ नहीं करें। ऐसा करना जीवन के लिए घातक हो सकता है।


इस दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने पावर प्रजेन्टेशन के माध्यम से सर्प को पहचानने, जहरीला है या नहीं, सर्पदंश के बाद व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने तथा उसके बाद के लक्षणों की पहचान संबंधी जानकारी प्रदान की। सिलवासा से आए वेटरनरी डॉक्टर ने सर्प की शारीरिक संरचना, उसके संूघने की क्षमता समेत कई महत्वपूर्ण बातें बताई। इस कार्यक्रम में उपस्थित धरमपुर के एसीएफ युवराज सिंह झाला ने स्नेक कैचर संस्थाओं के सदस्यों को वन विभाग के वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 के संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसके शिड्युल -1 में सर्प का समावेश होता है, जिससे हर व्यक्ति सर्प नहीं रख सकता है। ऐसा करने पर 25 हजार रुपए का दंड अथवा तीन साल तक की सजा हो सकती है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था के प्रतिनिधि ने बताया कि आजकल सर्प को पकडऩे के बाद उसका वीडियो बनाने तथा सोशल साइट पर अपलोड करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो ठीक नहीं है और सर्प पकडऩे के बाद वन विभाग को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्प पकडऩे के बाद उसके साथ फोटो लेने तथा अन्य करतब करने के दौरान ही सर्पदंश के मामले सामने आ रहे हैं। वापी पुलिस समन्वय टीम के मुकेश उपाध्याय ने सर्प को पकडऩे की सुरक्षित तकनीक बताई और सर्प पकडऩे के लिए आने वाले फोन एवं घटना स्थल के माहौल को लघु नाटिका के जरिए समझाया। सेमिनार में तीन सौ से ज्यादा लोग उपस्थित थे।

दो प्रकार का होता है सर्प विष
सेमिनार में डॉ. डीसी पटेल ने बताया कि सर्प में दो प्रकार का जहर न्यूरोटोक्सिन और हिमोटोक्सिन होता है। न्यूरोटोक्सिन जहर वाले सर्प में कोबरा और क्रेट प्रजाति के सर्प होते हैं। इसके दंश से व्यक्ति को उल्टी और धीरे-धीरे आंख बंद होने के लक्षण दिखते हैं। यह जहर सीधे ज्ञानतंत्र पर असर करता है। जबकि हिमोटोक्सिन जहर वाले सर्प में रसेल वाइपर और सोस्कल वाइपर शामिल हंै। इन सर्पों के दंश से व्यक्ति लकवाग्रस्त हो जाता है, जिससे व्यक्ति मौत के मुंह में पहुंच जाता है। इसके अलावा दम भी घुटने लगता है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बाद एन्टी विनम इंजेक्शन किस तरह देना है यह भी व्यक्ति के लक्षण को देखने के बाद तय किया जाता है।

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