संघ प्रदेश में बारिश के दौरान सर्प सडक़ों पर

संघ प्रदेश में बारिश के दौरान सर्प सडक़ों पर
संघ प्रदेश में बारिश के दौरान सर्प सडक़ों पर

Dinesh O.Bhardwaj | Updated: 19 Sep 2019, 08:20:55 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

बिलों में पानी भरने से आए बाहर

सिलवासा. संघ प्रदेश दानह के वन्य व पर्वतीय क्षेत्रों में सर्पों की कई प्रजातियां विद्यमान हैं और बारिश के दिनों में बिलों में पानी भर जाने की वजह से आवासीय इलाकों में दिखाई देने लगे है। प्रदेश के सिंदोनी, मांदोनी, कौंचा, लुहारी के जंगल में जहरीले ग्रीन बैंबू पिट वाइपर, रसल वाइपर, धारीदार करैत, सेंड बोआ, कोबरा आदि बड़ी संख्या में हैं। मानूसन में यह सर्प गांव और खेतों में पहुंच जाते हैं।
सेवानिवृत्त वन अधिकारी एडी निकम ने बताया कि सरिसृप रेप्टेलिया वर्ग का प्राणी हैं। प्रदेश के घने जंगलों में कोबरा एवं करैत की विषैली प्रजातियां हैं। कोबरा, सेंड बोआ की प्रजातियां भी है, जो अब लुप्त होने लगी है। जंगल में खेतों के प्लॉट बन जाने से सर्पों की आबादी घटी है। जहरीले सांप जंगल से निकलकर गांव और खेतों में आ रहे हैं। जंगलों में ग्रीन बैंबू पिट वाइपर एवं रसल करैत की प्रजातियां बहुतायत से मिलती हंै। यह सांप अफ्रीका एवं श्रीलंका में अधिक पाए जाते है। शरीर का रंग पेड़-पौधो की पत्तियों जैसे होने के कारण ग्रीन बैंबू पिट वाइपर हरे पेड़ पौधों पर लिपट कर आसानी से शरण ले लेता है। डॉक्टरों के अनुसार वाइपर और करैत सुस्त सांप हैं, इसका 6 माइक्रोग्राम विष मौत की नींद सुला सकता है। मानसून में आदिवासी खेतों में काम करते हैं, जिससे सर्पदंश के मामले अस्पतालों में तेजी से बढ़े हैं। डॉ. गणेश वरणेकर ने बताया कि सर्पदंश के मरीज को इंट्रामस्कुलर देकर तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए। अस्पतालों में एंटीवेनम के साथ डेकाड्रान की डोज देकर मरीज को सर्पदंश से बचाया जाता है। यहां कई तरह के सर्प मिलते हैं।

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