'बेटा, हर परीक्षा में खरा उतरना, मेरे सपनों को पूरा करना'

Vineet Sharma

Publish: Mar, 14 2018 11:37:24 PM (IST)

Surat, Gujarat, India
'बेटा, हर परीक्षा में खरा उतरना, मेरे सपनों को पूरा करना'

परीक्षा के दौरान 'कड़ी परीक्षा' : पिता के अंतिम संस्कार से पहले उनकी इच्छा का रखा मान, 10वीं के छात्र को परिवार, स्कूल और परिचितों का मिला संबल

सूरत. कैसे जिंदगी हर पल कड़े इम्तिहान लेती है, इसका कड़वा अनुभव महज 15 साल के मासूम हर्ष माहोर को बीते कुछ घंटों में हो गया। बीती शाम अचानक पिता की हृदयघात से मौत के बाद घर-परिवार में ऐसा कोहराम मचा कि सब अपनी सुध-बुध खो बैठे।

दसवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटा हर्ष भी समझ नहीं पाया कि बुधवार सुबह वह विज्ञान का पेपर दे भी पाएगा या नहीं। लेकिन, परिवार के सदस्यों ने हर्ष का मनोबल बढ़ाया और परीक्षा देेने के लिए मनाया। उसे याद दिलाया कि पिता ने जो सपने देखे, उन्हें साकार करने के लिए साहस दिखाना होगा।

हर्ष ने पूरी मेहतन और लगन के साथ पेपर दिया और दोपहर बाद पिता का परम्परा और रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया। हर्ष की इस हिम्मत के बारे में जिसने भी सुना-जाना, वह भावुक हो उठा।

आधी रात तक पढ़ाई, सारे प्रश्न किए

अडाजन के जिस प्रेसीडेंसी स्कूल में हर्ष का परीक्षा केन्द्र है, वहां वह निर्धारित समय से पहले पहुंचा। विज्ञान का पेपर हाथ में आते ही पूरे मनोयोग से हर प्रश्न को पढ़ा और उसका उत्तर लिखा। स्कूल प्रिंसिपल दीपिका शुक्ल ने बताया कि छोटी उम्र में ऐसी मनोदशा से गुजरना बड़ों के बस की बात नहीं होती, हर्ष तो छोटा है। उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित करेंगे और जितना सहयोग हो सकेगा, जरूर करेंगे।

दो बहनों और मां की चिंताएं भी बढ़ीं

पालनपुर पाटिया की योगी दर्शन सोसायटी में रहने वाले हर्ष के पिता पेशे से टेलर थे और 20 साल पहले उत्तर प्रदेश के आगरा से रोजी-रोटी की तलाश में सूरत आए थे। कड़ी मेहनत से उन्होंने परिवार को पाला। इकलौते पुत्र हर्ष को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना देखा। दो बेटियों को भी हमेशा आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। हर्ष की बड़ी बहन कॉलेज में पढ़ रही है तो छोटी नवीं कक्षा में। मां गृहणी हैं। घर के मुखिया के यकायक साथ छोडऩे के बाद सबकुछ थम गया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि समझ ही नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा?

सारे पेपर दूंगा और जिम्मेदारी संभालूंगा

patrika

घर आने के बाद हर्ष फूट-फूट कर रोने लगा। मां और बहनों को देख-देख कर उसका कलेजा मुंह को आने लगा। पिता को याद करके परिवार के सदस्यों को भरोसा दिलाता रहा कि वह हर कसौटी पर खरा उतरेगा। मन लगाकर पढ़ाई करेगा और सारे पेपर देगा। परिवार की टूटती आस को बंधाने के लिए मासूम यह तक कहता रहा, आप सब परेशान मत हो, मैं सारी जिम्मेदारी संभाल लूंगा। वहां खड़े पड़ोसियों और रिश्तेदारों की आंखें भी नम हो गईं।

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