SPECIAL NEWS: बालमन को ककहरा की सीख से पर्यावरण जागृति का सबक

सूरत वन विभाग ने बनाई ऐसी पेंसिलें, जिनसे बच्चे चाहेंगे तब तक क ख ग सीखेंगे और बाद में उसमें से बीज निकालकर रोपेंगे पौधे

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 20 Nov 2020, 09:16 PM IST

सूरत. कहते है कि बच्चों का मन कोमल होता है और उनके समक्ष जैसे विचार रखेंगे वे वैसा ही भविष्य में करेंगे। संभवत: इसे ही ध्यान में रख सूरत जिला वन विभाग ने ऐसी योजना बनाई है कि जिससे बच्चे क ख ग की पढ़ाई-लिखाई तो सीखें ही साथ ही वे पर्यावरण के बाल्यकाल से ही सजग प्रहरी भी बनकर तैयार हो जाए।
कोरोना महामारी से उपजे संकटकाल में एक से एक अनूठे प्रयोग ुजेहन में उपजे है और इनमें से ज्यादातर प्रयोग अब लोगों के बीच अमल में भी लाए जाने लगे हैं। ऐसा ही एक प्रयोग सूरत जिला वन विभाग ने भी किया है और इस प्रयोग में विभाग ने कोरोना महामारी के दौरान आयुर्वेदिक औषधियों की अचानक बढ़ी मांग को ध्यान में रखकर किया है। बच्चों के बालमन के सहज व सरल स्वभाव को विभाग ने इस प्रयोग में खासा ध्यान रखते हुए उनकी पढ़ार्ई-लिखाई के माध्यम से ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन की सीख देने का निश्चय किया है। विभाग ने ऐसी पेंसिलें बनवाई है जिनके पीछे अंत में किसी न किसी आयुर्वेदिक औषधि के बीज रखे जाते हैं। अब ऐसी पेंसिल से बच्चे जब तक चाहें तब तक पढ़ाई-लिखाई करते रहे और जैसे ही पेंसिल पूरी होने को आए तब उसके अंतिम छोर में लगे आयुर्वेदिक औषधि के पौधे के बीज को घर में ही अथवा खुले स्थल पर मिट्टी के गमले या कुंडे में रोप दें।

-औषधीय पौधे व वन्य प्राणियों की जानकारी

कोरोना काल के दौरान बच्चों को सहज तरीके से पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाई गई पेंसिल के बॉक्स हरा पिटारा पर उन्हें उगाने का तरीका बताया है वहीं, पेंसिल पर उसके आयुर्वेदिक औषधीय पौधे के बीज तथा वन्य प्राणियों की सचित्र जानकारी भी दी गई है। इससे बच्चे आसानी से वन्य प्राणी तथा आयुर्वेदिक औषधीय पौधों के बारे में जान सकते हैं। पेंसिल के अंतिम छोर पर एलोवीरा, अदरक, तुलसी, मेथी, मधुनाशिनी, अश्वगंधा, त्रिफला, मीठा आंवला समेत अन्य कई आयुर्वेदिक औषधीय पौधों के बीज रोपे हुए हैं, जिन्हें बच्चे पेंसिल पूरी होने के बाद गमले में रोपकर प्रकृति के सजग पहरेदार बन सकेंगे। फिलहाल यह प्रयोग जिले की सरकारी स्कूलों से शुरू किया जाना है, ताकि बच्चे सरलता से पर्यावरण के प्रति जागरूक बनकर भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

-बच्चों से शुरुआत जरूरी

जिस तरह से वृक्षों की कटाई हो रही है, ऐसे हालात में बच्चों में पर्यावरण के प्रति सरल सीख पनपना आवश्यक हो गया है। सीड्स पेंसिल से बच्चे पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ घर में ही पर्यावरण व आयुर्वेदिक औषधीय पौधों का महत्व आसानी से सीख पाएंगे।
पुनीत नैय्यर, जिला वन अधिकारी, सूरत वन विभाग

-हरा पिटारा बॉक्स पर ही दी है पूरी विधि

आम तौर पर स्टेशनरी की दुकानों पर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए पेंसिल बॉक्स आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यह हरा पिटारा नामक पेंसिल बॉक्स भी ऐसा ही है, लेकिन इसमें खास बात यह है कि इस बॉक्स में रखी एक दर्जन पेंसिलें केवल पेंसिल तक सीमित नहीं है बल्कि उनके पीछे अलग-अलग आयुर्वेदिक औषधीय पौधों के बीज भी हैं। इसके अलावा हरा पिटारा बॉक्स पर ही बच्चों के आसानी से समझ में आ जाए, इस तरह से सचित्र सीड्स पेंसिल के पूरे इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई है। इसमें पहले क्रम में पेंसिल का अंत तक लिखने में प्रयोग, दूसरे क्रम में सीड्स पेंसिल को मिट्टी के गमले में एक इंच तक दबाकर रखें। तीसरे व चौथे क्रम में मिट्टी के गमले को नियमित पानी व प्रकाश मिले तथा दो-तीन सप्ताह में गमले में दबा बीज पौधे के रूप में पनपने की जानकारी दी है।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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