GSRTC एसटी विभाग को पड़ रही दोहरी मार

क्षमता से 30 फीसदी कम यात्रीभार के कारण किराए का हो रहा नुकसान लेकिन टोलटैक्स का करना पड़ रहा पूरा भुगतान

By: विनीत शर्मा

Published: 24 Oct 2020, 03:04 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम को कोरोना की दोहरी मार पड़ रही है। बस सेवाएं शुरू होने के बाद बसों में पूरी क्षमता के साथ यात्रियों के परिवहन पर पाबंदी अब तक लागू है जिससे निगम की बसों की कमाई घट गई है। इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकार ने टोल टैक्स में निगम की बसों को कोई छूट नहीं दी है। निगम हो हर महीने करीब सात करोड़ रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। कोरोना की इस दोहरी मार ने प्रदेश में निगम की कमाई पर बड़ी चोट की है।

कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन और फिर अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जब एसटी बसों को सड़क पर दौडऩे की मंजूरी दी गई थी तो राज्य सरकार ने इसके लिए प्रोटोकॉल भी जारी किए थे। इसके मुताबिक बसों को आधी क्षमता से ही चलाया जा सकता था। कोरोना से पहले हालांकि एसटी बसों अपनी क्षमता से औसतन 25 से 30 फीसदी ज्यादा यात्रियों को लेकर जाती थीं, जिससे राजस्व आय अधिक होती थी। आधी क्षमता से ही बसों को चलाने के कारण निगम की आमदनी पर सीधे तौर पर 70 से 80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बाद में यात्री क्षमता को 70 फीसदी बढ़ाया गया, लेकिन निगम की बसें अब भी घाटे में ही चल रही हैं।

बसों में यात्रीभार तो घटकर आधा रह गया, लेकिन टोल टैक्स में निगम को कोई छूट नहीं दी गई। प्रदेशभर में दौड़ रही बसें रोजाना करीब 60 लाख रुपए का टैक्स चुका रही हैं। एसटी की वोल्वो और प्रीमियम बसें भी हर महीने 3.75 करोड़ रुपए के घाटे से चल रही हैं। 19 जून से 30 सितंबर के बीच निगम ने फास्टैग से केंद्र को भी 17.78 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। राज्य का एसटी विभाग हर महीने करीब सात करोड़ रुपए का भुगतान टोल टैक्स के रूप में कर रहा है।

विनीत शर्मा Reporting
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