भूखी-प्यासी रहकर जया पार्वती को पूजा

भूखी-प्यासी रहकर  जया पार्वती को पूजा

Sunil Mishra | Updated: 14 Jul 2019, 09:10:39 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

अलुणा व्रत, आहार में नमक का सेवन नहीं
कुंआरी युवतियों ने शिव-पार्वती की पूजा की और अच्छे वर की कामना की

सिलवासा. रविवार को नवविवाहित महिलाओं ने जया पार्वती व्रत रखा। पांच दिवसीय पर्व के पहले दिन भूखी प्यासी रहकर किशोरी और कुंआरी युवतियों ने शिव-पार्वती की पूजा की और अच्छे वर की कामना की। पूजन करने वाली युवतियों ने बिना नमक के आहार किया। इस व्रत को अलुणा व्रत के नाम से भी पूजा जाता है। इसमेें महिलाएं पति की लम्बी आयु एवं पारिवारिक सुख के लिए पूजन करती हैं।

अलुणा व्रत कम से कम तीन तथा पूर्ण व्रत सात दिन तक चलता है
अलुणा व्रत कम से कम तीन तथा पूर्ण व्रत सात दिन तक चलता है। किशोरियां आषाढ़ शुक्ल एकादशी से व्रत आरम्भ कर देती हैं। वे पूर्णिमा तक दिन में उपवास रखकर गौरी की उपासना करती हैं।14 वर्ष से अधिक आयु की युवतियां आषाढ़ त्रयोदशी से श्रावण की द्वितीया तिथि तक व्रत रखती है। व्रत का उज्जवण अंतिम दिन रात को किया जाता है। आमली गायत्री मंदिर में अलुणा व्रत महोत्सव पर विशेष पूजा अर्चना रखी है। इसमें मंदिर फलिया, बसेरा रोड़, चाणददेवी, 66 केवी रोड, झंडा चौक, किलवणी नाका आदि आसपास की सोसायटियों से युवतियां पहुंचकर शिव पार्वती का पूजन कर रही हैं।

 

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महिलाओं ने समूह में जया पार्वती की पूजा की

महिलाओं ने समूह में सवेरे उगे हुए अनाज के ज्वार, धूप, अगरबत्ती, फूल, पूजन सामग्री के साथ जया पार्वती की पूजा की। शिव पार्वती को कुमकुम, शतपत्र, कस्तूरी, अष्टगंध, फूल, नारियल, अनार आदि चढ़ाकर पूजन किया। गायत्री मंदिर में पांच दिन तक नियमित कार्यक्रम चलेगा। घरों में महिलाओं ने शिव पार्वती की मूर्ति स्थापित करके रविवार से नियमित पूजन व कथा श्रवण आरम्भ कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्र नरोली, दादरा, मसाट, सामरवरणी, सायली, किलवणी, रखोली, खानवेल में जया पार्वती पूजन शुरू हो गया है। दादरा श्रीराम मंदिर, भवानी मंदिर में महिलाएं हाथ थाल में दीप, फल, फूल और पवित्र प्रसाद लेकर पहुंची एवं अपने आराध्य देव का मान-मनवार किया। इस पर्व को आदिवासी युवतियां मंगल उत्सव के रूप में मनाती हैं। पहले यह पर्व गुजरात में मनाया जाता था, परन्तु समय के साथ इसमें देश के सभी राज्यों की युवतियां सम्मिलित होने लगी हैं। इस पर्व की विशेषता यह है कि आहार में नमक का सेवन नहीं किया जा सकता है। इस त्योहार में किशोरियों के साथ सुहागिन महिलाएं भी सम्मिलित हो रही हैं।

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