विनीत शर्मा/मुकेश त्रिवेदी

सूरत. कोरोनाकाल में लॉकडाउन के दौरान आम आदमी तो घरों में कैद हुआ ही, दुनिया के पालनहार के दरों पर भी ताले लटक गए थे। शहर में जब ऑक्सीजन की कमी का संकट गहराया हुआ था, ऑक्सीजन के प्राकृतिक स्रोतों (बाग-बगीचे, पर्यटन स्थलों) को आमजन के लिए बंद कर दिया गया था। मौजीले सूरतीयों की जिम, डांस क्लास, खानपान और दूसरी प्रवृत्तियों पर मानो कोरोना का ग्रहण लग गया था। स्थिति काबू में आई तो राज्य सरकार ने कोरोना गाइडलाइन के पालन की शर्त के साथ प्रतिबंधों में ढिलाई देते हुए एक बार सब कुछ फिर खोल दिया। मंदिर खुले तो लोगों की आस्था ने हिलोरें लीं और भगवान के साथ भक्तों का संवाद फिर शुरू हो गया। बाग-बगीचों में पक्षियों की चहचहाहट के साथ ही बच्चों की खिलखिलाहट भी कानों में रस घोलने लगी। सिटी बसों का संचालन शुरू होने से आवाजाही के लिए सार्वजनिक परिवहन का संकट झेल रहे लोगों को राहत मिली और सूने पड़े बस स्टैंड कलरव करने लगे। कोरोना के कारण सरथाणा स्थित जू भी बंद था। कोरोना गाइडलाइन के तहत पर्यटकों के लिए दोबारा खोला गया तो जहां घूमने-फिरने के शौकीन जू के जानवरों को देखने पहुंचे, वहां अबतक अकेलेपन को झेल रहे प्राणियों ने भी मानव की उपस्थिति को महसूस किया। सूरत की सूरत पर आई रौनक को फिर कोरोना की नजर न लगे, इसके लिए कोविड गाइडलाइन पर अमल हमें ही करना होगा।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned