SURAT KAPDA MANDI: वार-टू-वार पैमेंट, लेट पैमेंट पर 18 फीसद ब्याज

वीवर्स एसोसिएशन ने बनाई नई व्यापार नीति, यार्न का पैमेंट 15 दिन में और खरीदारी के अगले दिन लेंगे एक टका डिस्काउंट

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 25 Oct 2020, 09:02 PM IST

सूरत. कोरोना काल में उद्योग नगरी सूरत के कई उद्योग-धंधों की व्यापार नीति भी बदलती जा रही है। फैडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स एसोसिएशन ने एक बार फिर से भुगतान मामले में कड़ी नीति अपनाने पर जोर दिया है हालांकि, फोग्वा यार्न का पैमेंट करने के मामले में स्वयं स्वयं को थोड़ी रियायत भी आवश्यक बैठक में किए गए निर्णयों में देती नजर आई है।
फोग्वा की आवश्यक बैठक रविवार को वराछा में लोक समर्पण रक्तदान केंद्र परिसर में बुलाई गई और इस बैठक में कतारगांव, वेडरोड, सचिन समेत अन्य क्षेत्र की वीवर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी आशीष गुजराती, हरि कथीरिया, महेंद्र रामोलिया, बाबु सोजित्रा, उमेश वेकरिया, राकेश असारवाला, बाबु भगत, हिमांशु बोडावाला, संजय देसाई समेत अन्य मौजूद थे। बैठक की जानकारी में फोग्वा के प्रमुख अशोक जीरावाला ने बताया कि वीवर्स एसोसिएशन की आवश्यक बैठक में रविवार को सर्व सम्मति से नई व्यापारिक नीति बनाई गई और कोरोना काल में इस बार पावरलूम्स यूनिटों में दीपावली वैकेशन मात्र दस दिन का ही रखने का निश्चय किया गया है। दीपावली से सभी कारखानों में अवकाश रहेगा और दसवें दिन बाद देव दिवाळी अर्थात देवउठनी एकादशी को सभी यूनिटें पहले के समान कार्यरत हो जाएगी। आवश्यक बैठक में नई व्यापारिक नीति के अलावा सरकारी स्तर पर पावरलूम्स यूनिटों के लिए नई सहूलियत की मांग भी की गई।


नई व्यापार नीति के नियम-


-वीवर्स के खरीदे कच्चे माल अर्थात सभी तरह के यार्न का पैमेंट 15 दिन नेट में करना होगा और खरीदी के अगले ही दिन पैमेंट पर एक टका डिस्काउंट काटेंगे।


-वीवर्स के द्वारा बेचा गया तैयार माल अर्थात सभी तरह के ग्रे का पैमेंट वार-टू-वार अर्थात सात दिन नेट केश में रहेगा। लेट पैमेंट पर 18 फीसद ब्याज देना रहेगा।


-कपड़ा बाजार में घटित आर्थिक अपराध की रोकथाम के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) के गठन की राज्य सरकार से की जाएगी मांग।


-प्रमुख वीवर्स एक कमेटी बनाकर कपड़ा बाजार में पार्टी पलायन करने व इसमें सहयोग देने वाले तत्वों की सूची बनाकर जारी करेंगे।
-नई यूनिट व नई मशीनों पर बिजली सब्सिडी का लाभ तय था, लेकिन अब तक नहीं मिला है। इस बारे में राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी जाएगी।


-कपड़ा उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के लिए कपड़ा मंत्रालय की ओर से हाल ही में बंद की गई कामदार बीमा पोलिसी को फिर से चालू किए जाने की मांग मंत्रालय के समक्ष की जाएगी।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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