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SURAT KAPDA MANDI: राजस्थान स्कूल यूनिफॉर्म में 60 फीसद हिस्सेदारी

- राजस्थान सरकार ने बदली सरकारी स्कूल की यूनिफॉर्म
-कोरोना काल में सूरत के कपड़ा व्यापारियों की व्यापारिक सूझबूझ आई काम
-लॉकडाउन में स्कूलें खुलने के बाद पहले व्यापारियों ने स्टॉक क्लीयरेंस पर दिया ध्यान

सूरत

Published: December 22, 2021 09:24:24 pm

सूरत. कोरोना काल में कई नई बातें आमजन के साथ-साथ सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों ने भी सीखी है और उसी का नतीजा है कि उन्हें राजस्थान सरकार के स्कूल यूनिफॉर्म का रंग बदलने के निर्णय से लाखों मीटर कपड़े का स्टॉक जमा रह जाने की कोई खास चिंता नहीं है। गौरतलब है कि राजस्थान की हजारों सरकारी स्कूलों के बच्चों की यूनिफॉर्म का 60 फीसदी कपड़ा सूरत कपड़ा मंडी से पहुंचता है।
राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों स्कूल यूनिफॉर्म का रंग बदलने के आदेश जारी किए हैं। इससे सबसे बड़ी मुश्किल में वहां के रेडीमेड व्यापारी फंस गए हैं। जबकि राजस्थान और सूरत के कपड़ा व्यापारी आपसी सूझबूझ व पुराने अनुभव की वजह से व्यापारिक दिक्कतों से बच गए। इस संबंध में सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद स्कूलें खुली और राजस्थान के व्यापारियों ने जहां सीमित माल मंगवाया वहीं, सूरत के व्यापारियों ने भी डिमांड से थोड़ी कम ही सप्लाय की। इससे कोरोना काल में जमा स्टॉक पूरी तरह से क्लीयर भी हो गया और नया माल भी थोक में इस बार कोरोना की नई परिस्थिति को ध्यान में रख नहीं बनवाया। ऐसे हालात में राजस्थान सरकार के स्कूल यूनिफॉर्म के रंग बदलने के निर्णय से प्रतिकूल व्यापारिक स्थिति के करोड़ों के नुकसान से कपड़ा व्यापारी बच गए।
SURAT KAPDA MANDI: राजस्थान स्कूल यूनिफॉर्म में 60 फीसद हिस्सेदारी
SURAT KAPDA MANDI: राजस्थान स्कूल यूनिफॉर्म में 60 फीसद हिस्सेदारी
-आंकड़े एक नजर में

-राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 75 लाख विद्यार्थी
-34 लाख छात्र व 41 लाख छात्राएं शामिल
-स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 3 करोड़ मीटर कपड़े की जरूरत
-सूरत कपड़ा मंडी से 60 फीसदी अर्थात पौने दो करोड़ मीटर से अधिक कपड़े की सप्लाय
-राजस्थान में स्कूल यूनिफॉर्म कपड़ा सप्लाय करने वाले सूरत कपड़ा मंडी के हरिओम, 451, राधे, शुभम आदि मार्केट में हैं 50-60 कपड़ा व्यापारी
-कोरोना काल में सूरत कपड़ा मंडी में जमा रह गया था करीब 25-30 लाख मीटर कपड़ा

-सूरत मंडी से 60 फीसदी आपूर्ति

राजस्थान में हजारों सरकारी स्कूलें हैं और वहां पर करीब 75 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उनकी स्कूल यूनिफॉर्म के लिए लाखों मीटर कपड़े की प्रतिवर्ष जरूरत पड़ती है। इसमें से 60 फीसदी कपड़े की आपूर्ति सूरत कपड़ा मंडी से होती है और शेष में बालोतरा कपड़ा मंडी 30 प्रतिशत व मुंबई कपड़ा मंडी का 10 फीसदी हिस्सा रहता है।

-यह मंडियां और क्वालिटी है प्रमुख

राजस्थान में स्कूल यूनिफॉर्म की बड़ी कपड़ा मंडियों में जयपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, अजमेर, ब्यावर, जोधपुर, अलवर, भरतपुर, हिंडौनसिटी आदि है। यहां पर सूरत कपड़ा मंडी समेत बालोतरा कपड़ा मंडी व मुंबई कपड़ा मंडी से स्कूल यूनिफॉर्म की विभिन्न क्वालिटी का लाखों मीटर कपड़़ा भेजा जाता है। इसमें रेमंड कॉटन, पिक एंड पिक, 56 बाय 6, मैजिक, रेमंड चिराग आदि क्वालिटी कपड़ा शामिल रहता है।

-निर्णय में आई गई थी तब्दीली

कोरोना काल में जैसे ही स्कूलें खुली तो राजस्थान सरकार ने अचानक स्कूल यूनिफॉर्म का रंग बदलने का निर्णय किया, लेकिन व्यापारिक संगठनों के विरोध से इसे स्थगित कर दिया गया था। इस वजह से ज्यादातर स्टॉक क्लीयर हो गया था। उस दौरान सूरत कपड़ा मंडी का 5-7 लाख मीटर कपड़ा राजस्थान और 15-20 लाख मीटर कपड़ा सूरत में जमा होकर फंस गया था, जो बाद में निर्णय यथावत रखने से क्लीयर हो गया।
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अभी मिल गया समय

इस बार के निर्णय में सूरत समेत सभी कपड़ा मंडियों के व्यापारियों को समय मिल गया है और नई यूनिफॉर्म अगले वर्ष अप्रेल से प्रारम्भ होगी तब तक डिमांड मुताबिक ही व्यापार किया जाएगा।
-मनोज गुलाबवानी, कपड़ा व्यापारी, हरिओम मार्केट

व्यापारिक सूझबूझ काम आई

लॉकडाउन के बाद स्कूलें खुलने पर यूनिफॉर्म कपड़े का स्टॉक डिमांड के मुताबिक व्यापारियों ने क्लीयर किया और नया माल जमा भी नहीं किया। इस सूझबूझ से सरकार के प्रतिकूल निर्णय में भी नुकसान के कम हुआ।
-दिनेश अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी, विकास लॉजिस्टिक मार्केट

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