SURAT KAPDA MANDI: 'सब ठीक हो जाएगा, बस समय लगेगाÓ

खरीदारी करने आए थे काबुल-कंधार के कपड़ा व्यापारी, भारत में ही फंसे रह गए, पूरी पहचान नहीं देने की शर्त पर की पत्रिका से बातचीत

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 21 Aug 2021, 05:54 PM IST

सूरत. अफगानिस्तान में तालिबान आ तो गया है, लेकिन व्यापार को बहुत ज्यादा मुश्किलें नहीं आएगी। फिलहाल समस्या है मगर यह भी धीरे-धीरे समय बीतने पर ठीक हो जाएगी बशर्ते इसमें पाकिस्तान की कारस्तानी शामिल नहीं होनी चाहिए। यह बात अफगानिस्तान के कंधार के उस कपड़ा व्यापारी ने कही जो पिछले दिनों वहां पर पैदा हुए हालात के बीच भारत में ही फंसकर रह गया है।
पत्रिका से खास बातचीत में पूरी तरह से पहचान नहीं देने की शर्त पर कंधार के कपड़ा व्यापारी रुहानीभाई ने बताया कि जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से देखा और दिखाया जा रहा है उसमें और जमीनी हकीकत में काफी फर्क है। यह सच है कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है, लेकिन दो दशक पुराने तालिबान में और इसमें बड़ा फर्क है। इस फर्क की वजह से ही कहते हैं कि थोड़ा समय लगेगा मगर सब ठीक हो जाएगा और सूरत कपड़ा मंडी के साथ कपड़ा कारोबार में किसी तरह की कोई व्यापारिक दिक्कत नहीं आएगी। इसकी बड़ी वजह में रुहानीभाई ने बताया कि दो दशक पहले जब तालिबान का आतंक पूरे अफगानिस्तान में था तब भी सूरत कपड़ा मंडी से कपड़ा कारोबार होता था हालांकि तब रास्ते और तरीके जरूर अलग-अलग थे। अफगानिस्तान के बड़े शहर काबुल, कंधार, हैरात, मजार-ए-शरीफ आदि के कपड़ा व्यापारी 2009 से पहले तक दिल्ली कपड़ा मंडी के व्यापारियों के माध्यम से सूरत का सिंथेटिक व एल्पाइन कपड़ा ड्रेस मटीरियल, दुपट्टा, बुरका व शॉल के लिए खरीदते थे। इस मध्यस्थता के व्यापार में कुछ आर्थिक मुश्किलें आने पर काबुल, कंधार, हैरात व मजार के कपड़ा व्यापारी सीधे सूरत कपड़ा मंडी आने लगे और तब से यह बदस्तूर जारी है। अभी भी सूरत कपड़ा मंडी में खरीदारी के लिए काबुल-कंधार से 25-30 कपड़ा व्यापारी यहां आए हुए थे, लेकिन तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से ही एम्बेसी बंद हो गई और वे सभी यहीं फंसकर रह गए।

-रकम डूबने की नहीं है अधिक फिक्र

अफगानिस्तान के कपड़ा व्यापारी सूरत कपड़ा मंडी से केवल ड्रेस मटीरियल ही नहीं खरीदते बल्कि दुपट्टा, बुरका, शॉल के लिए भी थोक में अलग-अलग वैरायटी का कपड़ा खरीदते हैं। लेकिन, सूरत कपड़ा मंडी में यह खरीदारी ज्यादातर अग्रिम भुगतान के तरीके से होती है। सूरत कपड़ा मंडी व अफगानिस्तान के कपड़ा व्यापारी के बीच व्यापारिक पद्धति में पहले ऑर्डर, फिर पैमेंट और बाद में माल डिलीवरी का ही सिस्टम 70 फीसद चलन में है। थोड़ी-बहुत उधारी उन व्यापारियों से अवश्य होती है जिनके साथ व्यापारिक संबंध 10 साल से भी ज्यादा पुराने हो गए हैं।

-पाकिस्तान की नीयत पर है शक

कंधार के कपड़ा व्यापारी रुहानीभाई ने बातचीत में पाकिस्तान को शामिल करते हुए बताया कि तालिबानियों से पाकिस्तान के अच्छे संबंध हैं और भविष्य में भी यह ऐसे ही रहें तो निश्चय ही फिर थोड़ी-बहुत दिक्कतें भारत के साथ व्यापार में पैदा हो सकती है। अफगानिस्तान में बनने वाली तालिबानी सरकार का पाकिस्तान भारत के खिलाफ बेजा इस्तेमाल कर सकता है, हालांकि यह भी तय है कि यह वो तालिबान नहीं है और इसलिए पाकिस्तान के बहकावे में यह अपना आर्थिक नुकसान नहीं करेगा। फिर भी पाकिस्तान की नीयत पर शक करने की गुंजाइश से हम नहीं बच सकते हैं।

-पत्रिका संवाददाता की सीधी बातचीत

-मौजूदा परिस्थिति में व्यापारिक गतिविधि को कैसे देखते हैं?

रुहानीभाई-

फिलहाल सभी तरह की व्यापारिक गतिविधियां रुक गई है और वहां सभी छोटे-बड़े शहर-कस्बों में भी बाजार बंद समान ही है। समय बीतेगा तो तालिबानियों की व्यापारिक नीति सामने आएगी और उसके मुताबिक ही व्यापार होगा। समय तो लगेगा पर सब ठीक हो जाएगा और इसमें दोनों देश की व्यापारिक नीति भी बड़ी महत्वपूर्ण रहेगी।

-परिजनों की खैरियत के क्या समाचार है?

रुहानीभाई-

शुक्रवार को वहां छुट्टी रहती है और सभी परिजन घर पर ही हैं, ऐसे में शाम तक कोई बात नहीं की है। परिवार में 17 जनें है और इन दिनों में लड़कियां-महिलाएं घर से नहीं निकल रही वहीं, परिवार के पुरुषों को भी शाम तक घर लौट आने और दरवाजे बंद करके रखने की नसीहत दिनभर में पांच-सात बार अवश्य देता हूं।

-अफगान में पैदा मौजूदा हालात की जमीनी हकीकत क्या है।

रुहानीभाई-

हम व्यापारी आदमी है, इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते, लेकिन जो देखा-दिखाया जा रहा है वो पूरा सच नहीं है। वहां पश्तुन और फारसी की लड़ाई है और तालिबान में पश्तुन पठान अधिक है। यह सही है कि शरियत में उनका गहरा यकीन है तो ऐसे हालात में हमें अपने बहन-बेटियों को पर्दे में अधिक रखना पड़ेगा।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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