SURAT KAPDA MANDI: दीपावली तक पहुंचा बस वो ही पहुंचा

सर्दी के सीजन में उत्तर भारत की मंडियों में सूरत कपड़ा मंडी से हो जाता है 3 हजार करोड़ तक का कारोबार

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 24 Dec 2020, 09:43 PM IST

सूरत. सिल्कसिटी सूरत नगरी के कपड़ा व्यापारियों के लिए सर्दी की सीजन भी कुछ खास अच्छी नहीं बीती है। दीपावली तक जितना माल भेजा जा सका बस वो ही उत्तर भारत की कपड़ा मंडियों में पहुंच पाया है, उसके बाद शुरू हुए किसान आंदोलन ने सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों की सर्दी की सीजन पूरी तरह से बिगाड़कर रख दी है। सर्दी के सीजन में अकेले उत्तर भारत में सूरत कपड़ा मंडी का तीन हजार करोड़ का कारोबार होता है।
कोरोना महामारी ने सूरत के कपड़ा उद्योग को पूरे सालभर मुश्किल में फंसाकर रखा है। वर्ष 2020 की शुरुआत में जनवरी-फरवरी तक ही कपड़ा कारोबार व्यवस्थित तरीके से हो सका, उसके बाद मार्च में कोरोना महामारी के आगमन के साथ ही लगातार छह महीने तक सूरत कपड़ा मंडी मुश्किल में फंसी रही। सितम्बर-अक्टूबर अवश्य सूरत कपड़ा मंडी में प्रिंट आयटम के लिए इतिहास बन गया और इसी दौरान सर्दी की सीजन भी दीपावली से पहले तक ठीकठाक ढंग से चली और इसे दिसम्बर तक चलना था मगर कोरोना की सेकंड वैव और किसान आंदोलन ने पूरी तरह से रोक दिया। वहीं, दीपावली पहले जो माल उत्तर भारत की कपड़़ा मंडियों खासकर पंजाब-हरियाणा की मंडियों में पहुंचा था, उसमें भी बड़े पैमाने पर गुड्स रिटर्न हुआ है। उसकी वजह में जानकार व्यापारी बताते हैं कि किसान आंदोलन का सर्वाधिक असर पंजाब व हरियाणा में है और वहां के बाजार भी इससे दीपावली बाद से ही लगातार प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे हालात में नए माल की डिमांड वहां से स्थानीय मंडी में नहीं है और दीपावली के बाद भी जो माल बिकने से रह गया उसे वहां के व्यापारियों ने जीआर के रूप में सूरत लौटाया है।


-25 फीसदी से अधिक गुड्स रिटर्न


दीपावली से पहले तक सर्दी की सीजन के लिए मोटा कपड़ा पश्मीना, वेलवेट, अल्फीनो, स्पन, जामसाटन आदि के ड्रेस मटीरियल्स की खूब डिमांड उत्तर भारत की मंडियों में थी और उसके मुताबिक माल भी खूब गया। मगर पंजाब-हरियाणा में किसान आंदोलन के कारण बिका माल पूरी तरह से बिक नहीं पाया तो उसे वापस लौटाया गया है। वहीं, दीपावली के बाद सूरत कपड़ा मंडी से भेजा गया माल कई दिनों तक रास्ते में फंसा रहने की वजह से वापस आया है।


-दूसरे साल ही होती है खरीदारी


आम तौर पर मोटे कपड़े की मंडियों में ग्राहकी एक साल ढीली तो दूसरे साल में तेजी वाली रहती है। उसकी वजह में एक साल कपड़ा खरीदने वाले लोग उसे एक साल अतिरिक्त उपयोग में लेते हैं और यह वर्ष उक्त धारणा के मुताबिक तेजी वाला था, लेकिन वैसा रुझान सूरत कपड़ा मंडी में नहीं आया है। हालांकि अब जनवरी से उम्मीद है कि गर्मी की सीजन अवश्य निकलेगी और किसान आंदोलन भी निपट जाएगा। स्थानीय व्यापारियों ने उसके लिहाज से जामकॉटन, जामसाटन, ग्लेज कॉटन, केम्ब्रिक, पीसी कॉटन आदि क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित कर नए माल की तैयारी की है।


-मीडियम और क्वांटिटी के वर्ग में व्यापारी


दीपावली के पहले से दिसम्बर अंत तक चलने वाली सर्दी की सीजन का कपड़ा कारोबार 3 हजार करोड़ तक का हो जाता है और इसमें मीडियम व क्वांटिटी वाले वर्ग के एक हजार से ज्यादा व्यापारी रिंगरोड कपड़ा बाजार व सारोली कपड़ा बाजार में व्यवसायरत है। दोनों ही वर्ग के व्यापारियों को किसान आंदोलन की वजह से व्यापारिक नुकसान हुआ है। आंदोलन की वजह से मालवाहक वाहन रास्ते में अटके तो पंजाब-हरियाणा माल की बुकिंग में दिक्कतें कपड़ा व्यापारियों ने महसूस की है।


-अब जनवरी से उम्मीद


सर्दी का सीजन तो इस बार भी पिछले वर्ष की तरह ही फीका साबित हो गया है, हालांकि ऐसा नहीं होना था पर किसान आंदोलन ने इसमें दिक्कतें पैदा कर दी। अब जनवरी से गर्मी का सीजन ही चलने की उम्मीद है और व्यापारियों ने तैयारियां भी की है।
राजेश दोदराजका, कपड़ा व्यापारी, न्यू टैक्सटाइल मार्केट


-ट्रांसपोर्ट में अटका, बिका वो भी लौटा


दिवाली के बाद शादियों का सीजन भी इस बार कुछ खास नहीं चला। किसान आंदोलन की वजह से सूरत कपड़ा मंडी का माल ट्रांसपोर्ट में अटका और जो वहां नहीं बिका वह गुड्स रिटर्न के रूप में वापस भेज दिया गया।
नवलेश गोयल, कपड़ा व्यापारी, न्यू बोम्बे मार्केट

Dinesh Bhardwaj Reporting
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