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SURAT NEWS: महासंगम में हिन्दी का चिंतन-मंथन शुरू, सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने के प्रयास

-हिन्दी शब्द सिंधु-1 शब्दकोष में 14 भाषाओं का समावेश, दुनिया की 70 भाषाओं ने स्वीकारा
-हिन्दी के सुधिजन भी इसे स्वीकारें और अन्य शब्दों को जोडक़र लचीला बनाए

सूरत

Updated: September 14, 2022 08:58:39 pm

सूरत. दिल्ली के विज्ञान भवन से तीसरी बार हिन्दी दिवस समारोह बाहर निकला है और इसकी यह यात्रा यूं ही निरंतर आगे बढऩी है। हिन्दी प्रदेश उत्तरप्रदेश में विद्वता की नगरी वाराणसी में पहले अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के बाद वीर कवि नर्मद की नगरी सूरत में आयोजित दूसरा सम्मेलन हिन्दी भाषा को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने के रास्ते का प्रथम पड़ाव साबित होगा। इस आशय की बात बुधवार को शहर में घोड़दौडऱोड स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में अधिकांश वक्ताओं ने कही। उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित विगत 75 वर्षों में राजभाषा हिन्दी की विकास यात्रा व युवाओं को गर्व की अनुभूति कराती हिन्दी...विषय पर आयोजित सत्र के सभी वक्ताओं ने राजभाषा हिन्दी की तेजी से शुरू हुई विकास यात्रा के बारे में खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पूर्व सुबह उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पं. दीनदयाल उपाध्याय इंडोर स्टेडियम में मौजूद देशभर के राजभाषा अधिकारियों व हिन्दी के विद्वजनों से आह्वान करते हुए कहा कि आजादी का अमृतकाल 2035 तक मनाया जाएगा और इस दौरान हिन्दी को सर्वोच्च शिखर तक ले जाने की हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में दीर्घदृष्टि के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रखा है और इसमें राजभाषा हिन्दी के प्रयोग पर सर्वाधिक जोर दिया गया है। हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हिन्दी शब्द सिंधु-1 व कंठस्थ-2.0 का लोकार्पण हिन्दी दिवस के उपलक्ष में किया गया है। इसे सभी को अपनाना चाहिए और खासकर हिन्दी के विद्वजनों को इसमें नए शब्द जोडऩे की श्रृंखला को तेजी से आगे बढ़ाकर लचीला बनाने की ओर आगे बढऩा होगा। शाह ने आगे कहा कि हिन्दी शब्द सिंधु-1 यह पहला संस्करण है अर्थात इसके संस्करण आगे भी आएंगे और इन सभी में मेडिकल, विज्ञान, इंजीनियरिंग, कानून आदि के शब्द हिन्दी में होंगे।
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-लुटियन पंडितों पर कसा तंज


अमित शाह ने कहा कि 2010 तक मैं गुजरात की राजनीति तक सीमित था और बाद में राष्ट्रीय राजनीति में गया और हिन्दी की खासी जरूरत महसूस हुई। मुझे हिन्दी सीखने में आसानी इसलिए रही कि मैं गुजराती माध्यम से पढ़ा हूं। गुजराती व हिन्दी के बीच सखीभाव है और यहीं सीखने में सरलता रहने का कारण है। वहीं, लुटियन पंडितों ने हिन्दी की पैरवी भी अधिकांश जगहों पर अंग्रेजी में की है। हिन्दी को अन्य भाषाओं का प्रतिस्पर्धी होने का दुष्प्रचार भी खूब किया गया, सच्चाई यह है कि हिन्दी सभी भाषाओं की सखी के समान है और यह जितनी समृद्ध होगी, उतनी ही अन्य सब भाषाएं समृद्ध बनेगी। इसे उन्होंने यूं समझाया कि सुभद्राकुमारी चौहान की काव्य रचना झांसी की रानी...माखनलाल चतुर्वेदी की अभिलाषा...काव्य रचना देश की कई भाषाओं में हैं। इससे इतर भाषाओं की समृद्धि उसके बोलने वालों के बीच बढ़ी ही है। हिन्दी समावेशी भाषा है और इसके बारे में विनोबा भावे, काका कालेलकर, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, महात्मा गांधी सभी ने समय-समय पर जोर देकर कहा है।

-अंग्रेजी भगाकर संस्कृति के मूल्यों की रक्षा संभव


अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में स्वागत उद्बोधन में केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजयकुमार मिश्रा ने कहा कि गांधीजी ने हरिजन पत्रिका में लिखा था कि अंग्रेजी भगाकर ही सही तौर पर भारतीय संस्कृति के मूल्यों की रक्षा की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार दासता के चिह्नों से मुक्ति को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही हैं। पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने शिक्षा नीति में भारतीय इतिहास को दूर रखा था। अब जो नई शिक्षा नीति लागू हो रही है वह बहुत बड़े बदलाव का जनक बनेगी। हिन्दी के स्वर्णिम युग की शुरुआत 2019 के बाद से हो गई है और उसका दूसरा पड़ाव आज सूरत नगरी में देखने को मिल रहा है। अंग्रेजों ने देश में जन-जन की हिन्दी भाषा समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं को बांधने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे और देश के सभी महापुरुषों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रादेशिक भाषाओं को हिन्दी भाषा से सदैव जोडक़र रखा और इसे स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत बनाया था।

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