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SURAT NEWS: भारतीय विचारों को विश्व में मिलेगा उच्च स्थान

-आरएसएस के राममाधव लिखित पुस्तक का सूरत में विमोचन, सनातन संस्कृति के मूल विचार पुस्तक में समाहित

सूरत

Updated: October 23, 2021 06:23:25 pm

सूरत. भारतीय संविधान के अनुरूप भारत देश 70 साल से लगातार निर्बाध गति से आगे की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसमें भारतीय विचार का अभाव है जो कि भारतीयता की सशक्त पहचान है। हिन्दुत्व पैराडाइज पुस्तक में उन्हीं सब विषयों को संग्रहित किया गया है। इन्हीं भारतीय विचारों को निकट भविष्य में विश्वभर में उच्च स्थान प्राप्त होगा। यह बात शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य राममाधव ने कही। वे यहां हजीरा रोड पर ओरा यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम हॉल में हिन्दुत्व पैराडाइज पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके राममाधव ने संबोधन में कहा कि भारतवर्ष की सनातन संस्कृति में ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत समावेश है और इस संगम को वेद, उपनिषद समेत सैकड़ों ग्रंथों के माध्यम से दुनिया के सामने हमने रखा है। इसके बावजूद पाश्चात्य विचारों को लेकर 70 साल से हम अंग्रेजों के जाने के बाद भी चले जा रहे हैं। भारतीय संविधान व लोकतंत्र के पाश्चात्यीकरण में भारतीय चिंतन का अभाव है और भारतीय वैचारिक चिंतन इतना प्रबल व विराट है कि वो ही कह सकता है वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात सम्पूर्ण विश्व मेरा परिवार है। इन्हीं आदर्श विचारों के साथ भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर स्थापित होगा और इसके लिए हिन्दुत्व पैराडाइज पुस्तक में भारत ही नहीं बल्कि युरोपियन देशों में आत्मसात की जा चुकी भारतीय संस्कृति और विचार की झलक शामिल है। दुनिया में पहला बड़ा परिवर्तन दूसरे विश्व युद्ध के बाद आया था और अब वैसे ही परिवर्तन का बड़ा दौर वैश्विक कोविड-19 महामारी के बाद पर्यावरण की दिशा में आने की तैयारी है। धरती को मां कहने वाली भारतीय संस्कृति ही इस दिशा में दुनिया को कुछ नया करके दे सकती है और कोविड-19 के बुरे दौर में योग-आयुर्वेद ने सबको दिया भी है। राममाधव लिखित पुस्तक हिन्दुत्व पैराडाइज का सूरत में विमोचन कार्यक्रम दिशा फाउंडेशन के माध्यम से रखा गया था और कार्यक्रम में कई बुद्धिजीवी शामिल थे।
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-सनातन संस्कृति ही भारत की आत्मा

भारतीय संविधान के पाश्चात्यीकरण के बारे में राममाधव ने कहा कि जब 1948 में भारतीय संविधान निर्मात्री समिति के डॉ. बाबासाहब भीमराव अंबेडकर ने पहला ड्राफ्ट रखा तब उन्होंने कहा था कि यह सभी देशों के संविधान के अध्ययन का हिस्सा है, यह भारत का नहीं है। भारतीय संविधान के लिए जरूरी है वी आर वन नेशन ऑफ इंडिया...लेकिन हम तो जात-पंथ में बंटे हैं, ऐसे में इसमें एक राष्ट्र की भावना दिखाई नहीं देती है। आजादी से पहले महात्मा गांधी ने भी कहा था कि अपना एक तंत्र विकसित करो जो सभी के लिए हो। इसी तरह से पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भी कहा था कि लोकतंत्र ही सबसे अच्छी व्यवस्था पर भारत का अपना लोकतंत्र होना चाहिए। एनी बेसेंट ने भी कहा था कि भारत से हिन्दुत्व हटाओगे तो भारत मर जाएगा। सनातन संस्कृति ही भारत की आत्मा है।
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