surat news कपड़ा उद्यमियों ने नहीं ढूंढा विकल्प तो कहीं खत्म ना हो जाए......

surat news कपड़ा उद्यमियों ने नहीं ढूंढा विकल्प तो कहीं खत्म ना हो जाए......

Pradeep Devmani Mishra | Updated: 14 Jul 2019, 08:26:54 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

श्रमिकों की संख्या भी संकट का अल्टीमेटम दे रही है

सूरत
सूरत के कपड़ा उद्योग के सामने जहां एक ओर सतत बदल रही फैशन ने चुनोती खड़ी कर दी है, वहीं दूसरी ओर लगातार घट रहे श्रमिकों की संख्या भी संकट का अल्टीमेटम दे रही है। यदि सूरत के उद्यमियों ने खतरे के इस आहट को नजरअंदाज किया तो आने वाले दिनों में यह संकट नासूर बनकर कपड़ा उद्योग के लिए विकट समस्या बन सकता है।
कपड़ा बाजार का इतिहास हमेशा अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों के कारण ही समृद्ध रहा है। सूरत में कपड़ा उद्योग का इतिहास लगभग अंग्रेजों से भी पहले का है। यहां की मूल प्रजा कपड़े बनाती थी। समय के साथ कपड़ा उद्योग का विकास हुआ। लूम्स मशीनें आई, डाइंग प्रोसेसिंग मिले शुरू हुई, एम्ब्रोइडरी मशीनें लगी, यार्न के प्रोजेक्ट भी शुरू हुए। इस तरह से सूरत के कपड़ा उद्योग का सूरज बुलंदियों पर पहुंच गया। इसके पीछे जितना हांथ मालिकों के विजन का रहा उतना ही हाथ यूपी, बिहार, ओडीशा, छत्तीसगढ, महाराष्ट्र सहित देश के हर कोने से आने वाले श्रमिकों का भी है। सूरत में अपने पसीना बहाकर अन्य राज्यों के श्रमिकों ने कपड़ा उद्योग को अच्छे मुकाम पर पहुंचा दिया है, लेकिन अब इन्हीं श्रमिकों की उदासीनता ने सूरत के कपड़ा उद्योग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। क्योंकि पुराने लोग जो कि एक समय में जी-जान से कपड़े की कंपनी में काम करते थे अब वह निवृत हो रहे हैं और नई पीढी के युवा इस उद्योग में आना नहीं चाह रहे। सात वर्ष पहले की बात करें तो सूरत के कपड़ा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या अंदाजन 10 लाख के उपर थी, जो कि अब साढ़े छह लाख पर पहुंच गई है।

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