सूरत की बिल्डर्स लॉबी भी चाइना से अपनाएगी परहेज

कॉमर्शियल की बनिस्बत रेजिडेंसियल प्रोजेक्ट में चायनीज उत्पाद का होता है अधिक उपयोग

 

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 17 Jun 2020, 08:55 PM IST

सूरत. दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार भारत अब चीननिर्मित उत्पाद से दूरी बनाने की तय कर चुका है। गुजरात की औद्योगिक राजधानी सूरत महानगर की बिल्डर्स लॉबी ने इस दिशा में पहल करते हुए फैसला किया है कि वे अब अपने किसी भी प्रोजेक्ट में चीननिर्मित उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अकेले सारोली बिल्डर्स एसोसिएशन के इस निर्णय से सालाना अरबों रुपए का कारोबार अब चीन के बजाय अन्यत्र देश अथवा घरेलू बाजार की तरफ मुड़ेगा।
लद्दाख के पास भारतीय सैनिकों की चीनी सेना के साथ सोमवार को भिडं़त के बाद देशभर में लोगों का चीन के प्रति रोष बना हुआ है और वे चायनीज उत्पाद से दूरी बनाने के मंसूबे के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी शृंखला में वस्त्रनगरी सूरत की सारोली बिल्डर्स एसोसिएशन ने अपने मजबूत मंसूबे दिखाए हैं और अपने प्रोजेक्ट में चायनीज उत्पाद का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है। सूरत महानगर के सारोली क्षेत्र में गत दो-तीन वर्षों से कॉमर्शियल बिल्ंिडग अर्थात टैक्सटाइल मार्केट के दो दर्जन से ज्यादा प्रोजेक्ट चल रहे हैं और इसमें एक-एक की लागत 200-250 करोड़ से ज्यादा की है। इसी तरह से एसोसिएशन के ही कई सदस्य बिल्डर्स के वेसू, पाल, अलथाण समेत शहर के अन्य क्षेत्र में रेजिडेंसियल प्रोजेक्ट भी बड़े पैमाने पर चल रहे हैं।


प्रतिवर्ष मंगाते हैं अरबों का सामान


कॉमर्शियल प्रोजेक्ट में चायनीज उत्पाद के रूप में लाइटिंग, झूमर समेत अन्य आयटम कम ही इस्तेमाल होते हैं तो औसत 10 करोड़ की लागत पर 50 लाख रुपए तक का ही माल-सामान चायनीज रहता है। लेकिन, इसके विपरीत रेजिडेंसियल प्रोजेक्ट में दस मंजिले एक टावर में दो करोड़ से अधिक का माल-सामान चीननिर्मित उपयोग में लिया जाता है। इस तरह से प्रतिवर्ष अरबों रुपए का चीननिर्मित माल-सामान एजेंट के माध्यम से बिल्डर्स लॉबी खरीदती थी।


लगेगी लगाम, घरेलू बाजार को लाभ


शहर के विभिन्न इलाकों में प्रत्येक वर्ष दो सौ से ज्यादा रेजिडेंसियल प्रोजेक्ट नए शुरू होते हैं और इनमें औसतन चार टावर निर्मित होते हैं। प्रत्येक टावर में दो करोड़ के हिसाब सालाना 1500-1600 करोड़ के कारोबार का सर्वाधिक लाभ चाइना के बायकाट की वजह से घरेलू बाजार को मिलेगा। घरेलू बाजार में आवासीय बिल्डिंग में उपयोगी लोकल आयटम की डिमांड बढ़ेगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा और इससे वो सस्ते और किफायती दर में भी मिल सकेंगे।

जरूरी हो जाता है


देश के दुश्मन का विरोध जरूरी है और वह प्रत्येक मोर्चे पर आवश्यक है। शहर की बिल्डर्स लॉबी इस मामले में कड़ा मन बना रही है और चायनीज उत्पाद से परहेज कर घरेलू बाजार के उत्पाद को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे अरबों रुपए का सीधा लाभ स्थानीय बाजार को ही मिलेगा।
नरेश अग्रवाल, प्रवक्ता, सारोली बिल्डर्स एसोसिएशन।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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