फीस के साथ अभिभावकों से जबरन ले रहे हैं एनओसी

Divyesh Kumar Sondarva

Publish: Feb, 15 2018 11:00:49 AM (IST)

Surat, Gujarat, India
फीस के साथ अभिभावकों से जबरन ले रहे हैं एनओसी

सूरत के स्कूलों ने अपनाया वसूली का नया रास्ता, सरकार और शिक्षा विभाग के आदेश की परवाह नहीं

सूरत. शहर के स्व-निर्भर स्कूलों ने फीस वसूलने का नया रास्ता अपना लिया है। फीस पर आपत्ति नहीं होने को लेकर अभिभावकों से जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। सरकार के सख्त निर्देश के बाद भी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली जारी है। मामला अदालत में होने के बावजूद तरह-तरह के परिपत्र जारी कर फीस वसूली जा रही है। फीस नहीं देने वाले कुछ विद्यार्थियों को स्कूल से घर भेजने और स्कूल में बंदी बनाकर रखने के मामले पहले ही सामने आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया तो कुछ को परीक्षा परिणाम नहीं दिखाया गया। अब मामला प्रोविजनल फीस पर अटका हुआ है। प्रोविजनल फीस को लेकर असमंजस भी है। स्कूल इसी का फायदा उठा रहे हैं।

अतिरिक्त फीस वापस करने की घोषणा नहीं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्कूल पहले ही कह चुके हैं कि वह प्रोविजनल फीस वसूल सकते हैं। स्कूलों का कहना है कि प्रोविजनल फीस की रूपरेखा सरकार को तय करनी है। फीस रेग्युलेशन कमेटी का पुनर्गठन भी किया जाना है, जिसमें अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। यह सब तय होने के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देगी। स्कूल संचालकों का कहना है कि जब तक यह प्रक्रिया चल रही है, तब तक उनकी ओर से तय की गई प्रोविजनल फीस अभिभावकों को देनी पड़ेगी। सभी अभिभावकों को फरवरी के अंत तक फीस भरने को कहा जा चुका है। फीस के मामले को लेकर शहर की कई निजी स्कूलों के सामने अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। संचालकों के खिलाफ जिला शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री से शिकायत की गई, लेकिन फीस में किसी तरह की कमी नहीं आई। किसी स्कूल ने अतिरिक्त फीस वापस करने की घोषणा नहीं की है।

यह है असली मकसद
प्रोविजनल फीस तय नहीं होने के कारण स्कूलों की मनमानी वसूली जारी है। स्कूलों में पहले जो फीस थी, उसी को प्रोविजनल फीस के रूप में वसूला जा रहा है। इस पर कई अभिभावकों ने आपत्ति जताना शुरू तो स्कूलों ने नया रास्ता अपना लिया। वह अभिभावकों से एक पेपर पर हस्ताक्षर ले रहे हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि स्कूल जो फीस वसूल रहा है, उस पर अभिभावकों को किसी तरह की आपत्ति नहीं है। स्कूल नियम के अनुसार फीस ले रहा है। स्कूल ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि भविष्य में अभिभावक फीस को लेकर विरोध करें तो उनके हस्ताक्षर वाला पेपर अदालत या फीस कमेटी के सामने प्रस्तुत कर अपना बचाव कर सकें।

बच्चों को परेशान मत करो, अभिभावकों से बात करो
प्राइवेट स्कूलों में फीस जमा नहीं कराने पर बच्चों को परेशान किए जाने की शिकायतों को नेशनल कमिशन फॉर चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने गंभीरता से लिया है। यह देश में बाल अधिकारों की सबसे उच्च संस्था है। कमिशन ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई प्राइवेट स्कूल फीस के मामले को लेकर बच्चों का उत्पीडऩ नहीं करे। स्कूल इस मामले में सीधे अभिभावक से बात करें। प्राइवेट स्कूलों में फीस को लेकर बच्चों को किस तरह परेशान किया जाता है, इसके बारे में कमिशन अध्ययन करवा रहा है, जिसके बाद गाइडलाइन तय की जाएगी। कमिशन की तरफ से मुख्य सचिव को भेजा गए पत्र में कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलों में फीस जमा नहीं करने पर बच्चों का उत्पीडऩ और स्कूल स्टाफ का बच्चों के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव गंभीर चिंता का विषय है।

देशभर से शिकायतें

कमिशन के पास देशभर से ऐसी कई शिकायतें आई हैं कि बच्चों को परेशान किया जाता है। यह जेजे एक्ट के सेक्शन 75 में दिए गए बाल अधिकारों का उल्लंघन है। इसकी मॉनिटरिंग अथॉरिटी एनसीपीसीआर है। पत्र में कहा गया है कि स्कूल की फीस अभिभावकों और स्कूल अथॉरिटी के बीच का वित्तीय मामला है। इसलिए इस मामले को अभिभावकों के साथ ही डील करना चाहिए, न कि बच्चों के साथ। कमिशन की तरफ से मुख्य सचिव से कहा गया है कि वह प्राइवेट स्कूल अथॉरिटी को इस संबंध में निर्देश दें कि फीस के मामलों में बच्चों को शामिल नहीं किया जाए। कमिशन का कहना है कि सभी राज्यों में प्राइवेट स्कूलों में फीस को लेकर क्या-क्या दिक्कतें सामने आ रही हैं, इस पर अध्ययन किया जा रहा है। कहीं फीस के नाम पर परेशान करने की शिकायतें आ रही हैं तो कहीं बहुत ज्यादा फीस वसूलने की। अध्ययन के बाद कमिशन एक मॉडल गाइडलाइन बनाएगा। यह एक तरह से प्राइवेट स्कूलों में फीस रेगुलेट करने के लिए राज्यों को सिफारिश की तरह होगा। सभी राज्यों से इसे लागू करने के लिए कहा जाएगा। राज्य इस गाइडलाइन को सीधे लागू कर सकते हैं या इसके आधार पर अपनी अलग गाइडलाइन बना सकते हैं।

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