शोध: सूरत के विद्यार्थी ने गोवा यूनिवर्सिटी में शोध के दौरान खोजी दुनिया की सबसे छोटी छिपकली

- विद्यार्थी ने मात्र एक इंच की छिपकली खोजी
- माइक्रोस्कोप की सहायता से छिपकली का किया निरीक्षण
- मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एंड फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर से शोध के लिए दिया जा रहा है अनुदान

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 15 Sep 2021, 02:07 PM IST

सूरत.
भारत में सरीसृप प्रजाति में सूरत के विद्यार्थी ने महत्व की रुचि से भरी एक शोध की है। सूरत के शोधकर्ता ने मात्र एक इंच की और भारत की सबसे छोटी छिपकली की एक प्रजाति की शोध की है। गोवा यूनिवर्सिटी में शोध के दौरान दिकांश परमार ने अंगूठे के नाखून के कद जितनी छिपकली खोज निकाली है। गोवा यूनिवर्सिटी के परिसर में मिली इस छिपकली को 'गोअन स्लेंडर गेको ' नाम दिया गया है।
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी के बायो साइंस विभाग के जूलॉजी विभाग में पढ़ाई पूरी करने वाले और जीवसृष्टि क्षेत्र में शोध की रुचि रखने वाले शोधकर्ता दीकांश परमार इन दिनों गोवा यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट -1 के तौर पर कार्यरत है। वह पिछले डेढ़ साल से सरीसृप क्षेत्र में शोध कर रहे है।
दीकांश मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एंड फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर से शोध के लिए दिए जाने वाले फंड में से हर्पिटोफोना ऑफ गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक पर काम कर रहे है। इस प्रोजेक्ट में काम करते समय छिपकली की नई प्रजाति को खोज लिया। शोध के दौरान गोवा यूनिवर्सिटी के परिसर में मात्र एक इंच की छोटी से छिपकली मिल गई। इस संदर्भ में उनका शोध पत्र जू टेक्शा नामक जर्नल में पब्लिश हुआ है। गोवा यूनिवर्सिटी में पिछले 36 सालो में पहली बार ऐसी शोध हुई है।
- माइक्रो स्कोप से किया निरीक्षण
शोधकर्ता दिकांश परमार ने बताया कि 'गोअन स्लेंडर गेको ' छिपकली अबतक भारत की सबसे छोटी छिपकली है। यह छिपकली अंगूठे के नाखून जितनी छोटी है। इसकी ऊंचाई 32 एमएम है और मोटाई 5 एमएम है। इस छिपकली का निरीक्षण करने के लिए माइक्रो स्कोप की सहायता ली जा रही है। इस शोध में अक्षय खांडेकर, नितिन। सावंत और ईशांत अग्रवाल ने भी सहायता की है।
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Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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