TEXTILE NEWS-सूरत के उद्यमी अब प्रदूषण घटा कर भी करेंगे कमाई

TEXTILE NEWS-सूरत के उद्यमी अब प्रदूषण घटा कर भी करेंगे कमाई
TEXTILE NEWS-सूरत के उद्यमी अब प्रदूषण घटा कर भी करेंगे कमाई

Pradeep Devmani Mishra | Updated: 16 Sep 2019, 09:56:39 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

SURAT TEXTILE - डाइंग-प्रोसेसिंग यूनिट में एमिशन ट्रेडिंग स्कीम शुरू

सूरत

सूरत के उद्यमी अब व्यापार के साथ प्रदूषण कम कर भी कमाई करेंगे। गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की मदद से डाइंग-प्रोसेसिंग यूनिट संचालकों ने सोमवार से एमिशन ट्रेडिंग स्कीम शुरू की है। इस स्कीम से पॉल्यूशन कम होने के साथ इंडस्ट्री की आर्थिक लाभ भी होगा।
साउथ गुजरात टैक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रमुख जीतू वखारिया ने बताया कि इस योजना में जीपीसीबी की ओर से 150 से अधिक उद्योगों को चुना गया है। सूरत की डाइंग-प्रोसेसिंग इकाइयों में भी इसे शुरू किया गया है। इस योजना में जीपीसीबी की ओर से चिमनी पर एक डिवाइस लगाई जाएगी। यह डिवाइस चिमनी से निकलने वाले धुएं के आधार पर वातावरण में फैल रहे प्रदूषण की मॉनिटरिंग करेगी और डाटा भेजेगी। यह डाटा ऑनलाइन होगा, जिसे यूनिट संचालक और जीपीसीबी अधिकारी समेत सभी देख सकेंगे। वखारिया ने बताया कि जिन इकाइयों से प्रदूषण कम फैलेगा और जीपीसीबी के मापदंड के अनुसार होगा, उन्हें एमिशन क्रेडिट का लाभ मिलेगा। यह क्रेडिट उन इकाइयों को खरीदना पड़ेगा, जो ज्यादा प्रदूषण फैला रही हैं। क्रेडिट की कीमत पांच रुपए प्रति किलो होगी। कई साल से इस प्रयोग पर काम किया जा रहा था। तीन महीने से लगातार इस सिस्टम की प्रतिदिन मोनिटरिंग कर इसकी खामियों को दूर किया गया। फिलहाल यह योजना का पहला चरण है। दूसरे चरण में अन्य उद्योगो को इसमें शामिल किया जाएगा। डाइंग-प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए एमिशन ट्रेडिंग स्कीम की शुरुआत के दौरान पांडेसरा जीआइडीसी के उद्यमी कमल विजय तुलस्यान, प्रमोद चौधरी, जे.पी. अग्रवाल और जीपीसीबी के अधिकारी मौजूद थे।
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दुनिया में अपने किस्म की पहली योजना
गुजरात सरकार इसी साल विश्व पर्यावरण दिवस पर जून में एमिशन ट्रेडिंग स्कीम (उत्सर्जन व्यापार योजना) का ऐलान किया था। गुजरात की 170 से ज्यादा औद्योगक इकाइयों में सोमवार से यह योजना शुरू हो गई। इसके तहत कोई कंपनी अगर निर्धारित सीमा से अपना उत्सर्जन घटाती है तो वह अपना उत्सर्जन परमिट बेच सकती है। दुनिया में यह अपनी तरह की पहली योजना है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य ऐसी औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देना है, जो अपने उत्सर्जन को सीमित करती हैं। यह प्रदूषण घटाने की लागत को भी कम करेगी। इसके कारगर अनुपालन के लिए औद्योगिक इकाइयों को सतत उत्सर्जन निगरानी तंत्र से जोड़ा जाएगा।

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