रिटर्न गुड्स और पेमेन्ट में देरी ने व्यापारियों की हालत बिगाड़ी

रिटर्न गुड्स और पेमेन्ट में देरी ने व्यापारियों की हालत बिगाड़ी

Pradeep Devmani Mishra | Publish: Jun, 23 2019 09:45:54 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

पेमेन्ट चार-चार महीना विलंब से होने के कारण कपड़ा उद्यमियों की हालत पतली


सूरत
एक ओर लग्नसरा और रमजान की खरीद कमजोर रहने से व्यापारी पहले से परेशान हैं। ऐसे में चार-पांच महीना पहले बेचा गया माल अब वापिस आ रहा है साथ ही पेमेन्ट भी चार-चार महीना विलंब से होने के कारण कपड़ा उद्यमियों की हालत पतली हो गई है।
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी की असर से कपड़ा बाजार अभी भी मुक्त नहीं हुआ है। दिवाली पर अपेक्षा से कम व्यापार रहने के बाद साड़ी और ड्रेस मटीरियल्स के व्यापारियों को लग्नसरा में अच्छे व्यापार की उम्मीद थी, लेकिन इस बार खरीद को लोकसभा के चुनाव का ग्रहण लग गया। चुनावी आचार संहिता के कारण अन्य राज्यों से नकद खरीद करने वाले व्यापारी नहीं आए और व्यापार आधा रहा। इसके बाद रमजान ईद की खरीद भी आधी रही। अब व्यापारी रक्षाबंधन की तैयारी में लगे हंै कि फरवरी और मार्च महीने में बेचे गए माल रिटेल में नहीं बिकने के कारण वापिस आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि रिटर्न गुड्स आने के बाद माल की कीमत आधी या उससे भी कम हो जाती है। इससे सूरत के व्यापारी को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसके अलावा यहां के व्यापारी माल वापिस भेजने वाले व्यापारी को यदि फटकार लगाए तो वह दोबारा अन्य व्यापारी से सौदा करने लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद कुछ दिनों तक रिटर्न गुड्स की समस्या कम थी लेकिन अब बढ़ गई है। जीएसटी रिटर्न में भी रिटर्न गुड्स के लिए डेबिट नोट बनाना पड़ता है। यह भी व्यापारियों के लिए गले की फांस बन गया है। एक ओर रिटर्न गुड्स की समस्या और दूसरी ओर दिसंबर और जनवरी में बेचे गए माल का पेमेन्ट अभी तक नहीं आने से सूरत के कपडा बाजार में आर्थिक संकट का माहौल बन गया है।
बढ़ता रिटर्न गुड्स
चार महीने पहले बेचे गए माल का पेमेन्ट आने के स्थान पर व्यापारी माल ही वापिस भेज दे रहे हैं। रिटर्न गुड्स ने व्यापारियों के लिए दुविधा बढ़ा दी है।
रजनीश बंका, व्यापारी
पेमेन्ट नहीं आ रहा
चार-पांच महीने पहले बेचे गए माल का पेमेन्ट अभी भी अन्य राज्यों के व्यापारी नहीं दे रहे। इसका असर सूरत के व्यापारियों पर पड़ रहा है। पूरे बाजार में आर्थिक संकट छा गया है।
रिंकेश लालवाणी, व्यापारी

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