पाकिस्तान में जब्त भारतीय नौकाओं की नीलामी का मामला गरमाया

पाकिस्तान में कराची समेत अन्य नजदीकी बंदरगाहों पर वर्षों से समुद्री पानी के थपेड़े झेल रही जब्त 1090 भारतीय नौकाओं में से 690 की नीलामी की गई

सूरत. अरब सागर में पाकिस्तान मरीन सिक्युरिटी एजेंसी द्वारा करीब 20 वर्ष से लगातार जब्त की जा रही भारतीय नौकाओं में से अधिकांश नौकाओं की नीलामी मामले ने तूल पकड़ा है। गुजरात के सौराष्ट्र समेत अन्य समुद्री तट के मछुआरा संगठनों ने भारतीय नौकाओं की नीलामी प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया है और आशंका जताई है कि इनका भविष्य में भारतविरोधी गतिविधियों में उपयोग संभव है।
हाल ही में पाकिस्तान में कराची समेत अन्य नजदीकी बंदरगाहों पर वर्षों से समुद्री पानी के थपेड़े झेल रही जब्त 1090 भारतीय नौकाओं में से 690 की नीलामी की गई है। इसकी जानकारी भारतीय मछुआरों के विभिन्न संगठनों को मिलने पर उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है। हालांकि दूसरी तरफ यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार वर्षों से समुद्री पानी के थपेड़े खाने व सडऩे-गलने की स्थिति में पाकिस्तान कोर्ट की मंजूरी से इनकी नीलामी करवा सकती है। पाकिस्तान मरीन सिक्युरिटी एजेंसी द्वारा जब्त भारतीय नौकाओं में से ज्यादातर गुजरात की है और इसमें भी पोरबंदर की बताई गई है। बताया है कि पाकिस्तान में अभी तक जब्त 1090 नौकाओं में अकेले पोरबंदर की 750 नौकाएं है। उधर, पाकिस्तान की इस कार्रवाई का विरोध ऑल इंडिया फिशरमैन एसोसिएशन, पोरबंदर बोट एसोसिएशन, मरीन फिशरीज को-ऑपरेटिव सोसायटी समेत अन्य कई संगठनों ने किया है और भारत सरकार से पाकिस्तान में की गई भारतीय नौकाओं की नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संगठनों ने आशंका जताई है कि मुंबई में 26/11 आतंकी हमले में भारतीय नौका कुबेर का इस्तेमाल पाकिस्तान से आए आतंकवादी कर चुके है और उसके बाद आए दिन मादक द्रव्यों की हेराफेरी में जब्त नौकाओं के उपयोग की घटनाएं सामने आती रहती है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि वर्षों से जब्त भारतीय नौकाएं वापस भारतीय मछुआरों को लौटाई जाए।


यूं होती है भारतीय नौकाओं की जब्ती


गुजरात समेत आसपास के मछुआरे ज्यादातर अरबसागर की छोटी-बड़ी खाडिय़ों में मछली पकडऩे जाते है। भारत व पाकिस्तान की समुद्री सीमा के निकट इन खाडिय़ों में छिछला व कम गहरा पानी होने से यहां विपुल मात्रा में मछली मिलती है। पाकिस्तान मरीन सिक्युरिटी एजेंसी इन खाडिय़ों के नजदीक भारतीय मछुआरों को नौका समेत जलीय सीमा उल्लंघन का मामला बताकर पकड़ ले जाती है और अंतरराष्ट्रीय संधि के मुताबिक कैद मछुआरों को डेढ़ वर्ष की अवधि में छोड़ दिया जाता है लेकिन, जब्त नौकाएं नहीं छोड़ी जाती। हालांकि पहले ऐसा नहीं था, करीब 20 वर्ष पहले पाकिस्तान सरकार गिरफ्तार मछुआरों को उसी नौका में बिठाकर आईबीएल (इंटरनेशनल बॉर्डर लाइन) के पास छोड़ देती थी, जहां उन्हें भारतीय तटरक्षक बल की निगरानी में वेरावल के मत्स्य विभाग लाया जाता था और जांच-पड़ताल पूरी की जाती थी। लेकिन, करगिल युद्ध के बाद से ही पाकिस्तान सरकार ने गिरफ्तार भारतीय मछुआरों की रिहाई समुद्री मार्ग से बंद कर दी और उन्हें वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते से छोड़ा जाने लगा। तब से ही भारतीय मछुआरे तो रिहा होकर वापस यहां पहुंच जाते है लेकिन, उनकी नौकाओं के लौटने का रास्ता बंद हो गया।


लगातार जारी है प्रयास


पाकिस्तान में जब्त भारतीय नौकाओं की मुक्ति के लिए केंद्र सरकारों को लगातार कहा जाता रहा है। हाल ही में भारत-पाकिस्तान की सचिव स्तरीय वार्ता में भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई है, आगे सकारात्मक परिणाम आने की गुंजाइश तो है।
वेलजी मसानी, अध्यक्ष, ऑल इंडिया फिशरमैन एसोसिएशन

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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