मिशन एडमिशन : इंजीनियरिंग के बाद अब आर्किटेक्चर की सीटों पर भी मंडराने लगा खतरा

- राज्य की आर्किटेक्चर कॉलेजों में मॉक राउंड के बाद 30 प्रतिशत सीट रिक्त
- राज्य की 1048 सीटों में से 734 सीटों पर ही प्रवेश, 314 सीटें मॉक राउंड में ही हो गई रिक्त

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 14 Oct 2021, 02:05 PM IST

सूरत.
सूरत के साथ राज्य के आर्किटेक्चर कॉलेजों में पिछले एक माह से प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। एक माह की प्रवेश प्रक्रिया के बाद मॉक राउंड का मेरिट जारी होने पर सभी चौंक उठे। राज्य की आर्किटेक्चर कॉलेजों में मॉक राउंड के बाद 30 प्रतिशत सीट रिक्त दिखाई दे रही है। राज्य की 1048 सीटों में से 734 सीटों पर ही प्रवेश हुए है और 314 सीटें मॉक राउंड में ही हो गई रिक्त हो गई है।
राज्य की आर्किटेक्चर कॉलेजों में प्रवेश देने का जिम्मा एडिशन कमिटी फोर प्रोफेशनल कोर्स (एसीपीसी) को सौंपा गया है। इंजीनियरिंग में प्रवेश के बाद एसीसीसी ने आर्किटेक्चर कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया को शुरू किया। एक माह की पंजीकरण प्रक्रिया के बाद एसीपीसी ने मॉक राउंड का मेरिट जारी किया है। राज्य में 20 सवनिर्भर और 2 अनुदानित आर्किटेक्चर कॉलेज है। 22 आर्किटेक्चर कॉलेजों को मिलाकर कुल 1048 सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई थी। कोरोना के कारण इस बार 12वीं बोर्ड में सभी विद्यार्थियों को पास किया गया था। शिक्षा विशेषज्ञों को लगा की इंजीनियरिंग के साथ आर्किटेक्चर कॉलेजों की सीटें भी भर जाएगी। लेकिन मेरिट लिस्ट देख सभी के अनुमान गलत साबित हो रहे है। पहले इंजीनियरिंग में हजारों सीट रिक्त पड़ी हुई है। अभी भी इन सीटों को भरने के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इस बीच एसीपीसी ने आर्किटेक्चर कॉलेजों के मॉक राउंड की मेरिट लिस्ट जारी की। इस लिस्ट के अनुसार कुल 1048 सीटों के सामने 734 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश के लिए कॉलेजों का चयन किया है। जबकि मॉक राउंड में ही 314 सीट रिक्त हो गई है। अब इन्हें भर पाना अभी से मुश्किल भरा नजर आ रहा है।
- 2000 हजार अधिक पंजीकरण के बाद भी 314 सीट रिक्त:
राज्य की 1048 सीटों में 25 प्रतिशत सीट ईडब्ल्यूएस (इकनॉमिक वीकर सेक्शन) का है। इन सीटों के लिए ऑल इंडिया कोटा के लिए 1262 विद्यार्थी पंजीकृत हुए थे। गुजरात होम स्टेट कोटा से यानी के गुजरात के गुजरात बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड से 844 विद्यार्थियों ने पंजीकरण करवाया था। सभी को मिलाकर 418 विद्यार्थी अन्य स्टेट के है। 2000 हजार से अधिक विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया में पंजीकृत होने के बाद भी मॉक राउंड में 314 सीट रिक्त रह जाना चिंता का विषय बन गया है।
- दक्षिण गुजरात में अधिक विद्यार्थी फिर भी सीट रिक्त:
पूरे गुजरात में 12वीं के सबसे अधिक विद्यार्थी सूरत से पास हुए है। इस में दक्षिण गुजरात के अन्य 6 जिलों को शामिल किया किया जाए तो यह आंकड़ा और भी अधिक बढ़ जाता है। फिर भी दक्षिण गुजरात के आर्किटेक्चर कॉलेजों में सीटें रिक्त पड़ी हुई है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी में 52, भगवान महावीर में 89, रमण भक्ता में 41, विधियामंदिर कॉलेज में 22, पीपी सावनी की 23 सीटों पर किसी ने मॉक राउंड में प्रवेश नहीं लिया है। जिसने कॉलेज संचालकों की चिंता बढ़ा दी है।
- सीट बढाने के लिए किए कड़े प्रयास फिर भी निराश लगी हाथ:
वीएनएसजीयू में शैक्षणिक सत्र 2013-14 में 120 सीटों के साथ
गीजू छगन पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर विभाग की शुरुआत की गई थी। सूरत में रियल स्टेट के बढ़ते व्यवसाय को देखते हुए गुजरात में सबसे अधिक सीटों के साथ वीएनएसजीयू में आर्किटेक्चर विभाग शुरू किया गया। जब से आर्किटेक्चर विभाग शुरू हुआ उसके बाद उसकी सीट लगातार तीन साल तक कटती ही रही। काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए ) द्वारा 2014-15 में 40 सीटें कम कर देने से 80 सीटों पर प्रवेश दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2015-16 में 40 और सीटें काट ली गईं। उस साल 40 सीटों पर प्रवेश दिया गया था। शैक्षणिक सत्र 2016-17 में सीओए ने 10 और सीटें कम कर दीं। सीटें काटने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस भेजा गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस को अनदेखा कर दिया। नतीजा यह रहा कि सीओए ने 10 सीटें और काट लीं। शैक्षणिक सत्र 2017-18 में 30 सीटों पर प्रवेश दिया गया। सीटें कट जाने पर हंगामा हुुआ तो प्रशासन ने आने वाले साल में सीटें वापस हासिल करने का आश्वासन देकर मामला शांत किया था। साथ ही, सीएओ की सभी शर्तें पूर्ण करने का वादा भी किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हो पाया। कड़े प्रयासों के बाद इस साल काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर ने वीएनएसजीयू को 80 सीटों पर प्रवेश देने की अनुमति दी गई है। फिर भी यहां मॉक राउंड में 52 सीटें रिक्त नजर आ रही है। जो अभी सभी जगह चर्चा का विषय बन गया है।
रोजगार बनता जा रहा है परेशानी का कारण:
आर्किटेक्चर करने के बाद सूरत और आसपास रोजगार मुश्किल से मिल रहा है। विद्यार्थी 10 हजार में काम करने को मजबूर हो रहे है। खुद का ऑफिस शुरू करना और नया काम मिलना शुरू में काफी कठिन है। इसके सामने आर्किटेक्चर की डिग्री पाने में लाखो की फीस हो जाती है। इसका प्रभाव प्रवेश पर हो रहा है। इसलिए आर्किटेक्चर की सीट रिक्त हो रही है। इस क्षेत्र में फिलहाल डाउन फॉल चल रहा है। आने वाले समय में वापस बूम आने पर फिर से विद्यार्थियों की रुचि इस कोर्स के प्रति बढ़ेगी।
- वीरेन महीडा, सिंडीकेट सदस्य, वीएनएसजीयू

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