CYBER CRIME : लॉकेशन बदल बदल कर कर रहे थे ऑन लाइन ठगी


- सचिन जीआइडीसी पुलिस ने झारखंड के अंतरराज्यीय गिरोह के छह को पकड़ा
- कार समेत 6.87 लाख का सामान जब्त किया, चार राज्यों में सात घटनाएं कबूली
- Sachin GIDC police arrested six of Jharkhand's interstate gang
- Seized 6.87 lakh goods including car, confessed seven incidents in four states

By: Dinesh M Trivedi

Published: 28 Feb 2021, 09:36 PM IST

सूरत. विभिन्न राज्यों में लोगों को फोन कर उनके साथ एटीेम फ्रोड़ समेत विभिन् तरीकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले झारखंड स्थित देवघर गिरोह के आधा दर्जन शातिरों को सचिन जीआइडीसी पुलिस ने गिरफ्तार किया है तथा उनके कब्जे से एक कार समेत 6.87 लाख रुपए का सामान जब्त किया है।

पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्यसूत्रधार सफार अंसारी है जो झारखंड के गिरडिह में 2017 में साइबर क्राइम के मामलों में पकड़ा जा चुका है। ये लोग कार में लॉकेशन बदल बदल कर लोगों को फोन करते थे और फिर उनके साथ ठगी करते थे। जीआइडीसी पुलिस को इनके रामेश्वर नगर में होने की सूचना मिलने पर पुसिल ने टीम ने इन्हें घेरा और गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में इन्होंने गुजरात के वडोदरा व आणंद जिलों दो, वहीं राजस्थान के दौसा व जयपुर जिलों में दो, मध्यप्रदेश के मंदसौर व बैतुल जिलों में दो व महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक मिला कर ऑनलाइन ठगी की कुल 7 घटनाओं को अंजाम देना कबूल किया है। इन्हें मध्यप्रदेश पुलिस को सौंपने की कवायद चल रही है।

इनको पकड़ा
झारखंड के देवघर जिले के जामा गांव निवासी सफार अंसारी (22), अब्दुल गफार अंसारी (26), मोहम्मद अब्दुल अंसारी (25), मनीयारड़ी गांव निवासी मोहम्मद मेहताब अंसारी (33), मोहम्मद सिराजुद्दीन अंसारी (29), टवा घाट गांव निवासी अकबर अंसारी (33)

36 मोबाइल सिमकार्ड मिले
आरोपियों के कब्जे से पुलिस को झारखंड पासिंग की एक कार, चार मोबाइल फोन, 42 हजार 490 रुपए नकद, 36 मोबाइल सिमकार्ड, 3 बैंक डेबिट कार्ड,3 पान कार्ड बरामद हुए है।

फोन कॉल कर देते थे झांसा
ये लोग अलग अलग सिमकार्ड का उपयोग कर झारखंड से गुजरात समेत देश के अलग अलग राज्यों में लोगों को फोन कॉल करते थे। फिर उन्हें बैंककर्मी या कंपनी के कर्मचारी के रूप में पहचान देकर सिम कार्ड ब्लॉक होने, लॉटरी लगने समेत विभिन्न तरह के झांसे देकर अपने जाल में फंसाते थे। फिर विश्वास में लेकर उनसे मैसेज व LINK के जरिए एटीएम, क्रेडिट कार्ड आदि की बैंक डिटेल व पिन नम्बर हासिल करते थे और उसका उपयोग कर उनके खातों से रुपए विभिन्न पैमेंट गेट वे वॉलेट में ट्रांसफर कर देते थे।

Dinesh M Trivedi Reporting
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